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नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू

 Special Coverage News |  4 Nov 2016 10:32 AM GMT  |  New Delhi

नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू

प्रकृति के प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य की आराधना और उपासना का महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरुआत हो गयी है। चार दिवसीय इस लोक आस्था के अनुष्ठान के तहत आज नहाय-खाय है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले लोगों के घरों में छठ के गीत गूंजने लगे हैं। छठ पर्व चार दिनों का होता है जिसमें पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी 'नहाय-खाय' के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर उसे पवित्र बनाया जाता है। आज के दिन छठ व्रत करने वाले श्रद्धालु दाल-चावल के साथ कद्दू की सब्जी को प्रसाद के रूप में लोग ग्रहण करते हैं। स्नान के बाद कद्दू, चने की दाल, चावल तैयार होंगे, घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं।

शनिवार को लोहंडा (खरना) व्रती दिन भर उपवास रखने के बाद शाम को गन्ने के रस में बने चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित करने के बाद ग्रहण करेंगे। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा। शनिवार को खरना होने से साढ़े साती और ढैया से प्रभावित लोगों के लिए भी काफी उत्तम संयोग है। खरना का प्रसाद ग्रहण करना उनके लिए विशेष फलदायी होगा। शनि की बाधा प्रभावित नहीं कर सकेगी।

रविवार को शाम 5.10 के पहले भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया जायेगा वहीं सोमवार को दूसरा अर्ध्य जबकि पारण सुबह 6:15 के पूर्व व बाद किया जायेगा। छठव्रत पर की गयी सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को प्रत्यक्ष ग्रह माना गया है। सूर्य की उपासना से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। सूर्य की तरह तेज और ओजस्वी होने का वरदान प्राप्त होता है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ महापर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

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