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मोदी को पसंद आया इनका आईडिया और ले लिया इतना बड़ा फैसला

 आलोक मिश्रा |  2016-11-10 08:14:50.0  |  New delhi

मोदी को पसंद आया इनका आईडिया और ले लिया इतना बड़ा फैसला

मंगलवार की रात देश के लोगों के लिए काफ़ी चौंकाने वाली रही, क्योंकि मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपयों के नोट पर रोक लगा दी. पर हर नीति, निर्णय के पीछे किसी न किसी का दिमाग तो होता है, पर इसके पीछे किसका दिमाग होगा? इसके पीछे जिसका दिमाग है उस कंपनी का नाम है 'अर्थक्रांति संस्थान'. अर्थक्रांति पुणे की इकोनॉमिक एडवाइज़री संस्था है, जिसमें चार्टेड अकाउंटेंट्स और इंजीनियर शामिल हैं. अर्थक्रांति प्रपोज़ल को संस्थान ने पेटेंट कराया है. बताया जा रहा है कि इस प्रपोजल के लिए ये संस्थान राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और भी कई नेताओं से मिल चुका था. संस्थान का ऐसा दावा है कि उनके एक मेम्बर अनिल बोकिल ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ कुछ महीने पहले एक मीटिंग की थी. हालांकि शुरू में बोकिल को बस 9 मिनट का समय दिया गया था, पर जब बोकिल ने बड़े नोट बंद करने का प्रपोज़ल दिया तो मोदी को इसमें इंटरेस्ट आया और 9 मिनट की तय मीटिंग 2 घंटे तक चली.

ऐसा भी कहा जा रहा है कि बोकिल और उनकी टीम डेढ़ साल पहले राहुल गांधी से भी मिलने गयी थी, पर उन्होंने बोकिल को मात्र 10 सेकंड का समय दिया. साथ ही ब्लैक कैट कमांडो ने उन्हें अंदर सीडी ले जाने की भी इजाज़त नहीं दी थी. राहुल ने कहा था कि आप प्लीज़ डॉ. गोपाल मोहन से मिल लीजिए. गोपाल मोहन राजीव गांधी फाउंडेशन के तत्कालीन डायरेक्टर थे.

क्या थे प्रपोज़ल के सुझाव?

इम्पोर्ट ड्यूटी छोड़ कर 56 तरह के टैक्स वापस लिए जाएं.
बड़ी करेंसी जैसे 1000, 500 और 100 रुपये के नोट वापस लिए जाएं.
सभी बड़े भुगतान और पेमेंट बैंक के ज़रिये चेक, डीडी और ऑनलाइन किया जाए.
कैश ट्रांजेक्शन की लिमिट फिक्स की जाए और इन पर कोई टैक्स ना लगाया जाए.

प्रपोज़ल की खास बातें:-

इंजीनियर्स और चार्टेड अकाउंटेंट वाली संस्था अर्थक्रांति के अनुसार वर्तमान में देश में हर रोज़ 2.7 लाख करोड़ रुपयों का बैंकिंग ट्रांजेक्शन होता है. इस हिसाब से एक साल में लगभग 800 लाख करोड़ रुपये हुए. समस्या ये है कि सिर्फ़ 20 प्रतिशत ट्रांजेक्शन ही बैंक के ज़रिये होता है, बाकि 80 फीसदी कैश के ज़रिये होता है, जिसको ट्रेस कर पाना मुमकिन नहीं है. देश की जो 78 फीसदी आबादी है वो हर रोज़ सिर्फ़ 20 रुपये ही खर्च करती है, तो उन्हें फिर हज़ार के नोट की क्या ज़रूरत

क्या होगा 500 और 1000 के नोट को वापस लेने से?

कैश ट्रांजेक्शन से होने वाला भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा. लोगों की ब्लैकमनी या तो व्हाइट हो जाएगी या बेकार. लोगों के पास इकट्ठा नोट कागज़ के टुकड़े रह जाएंगे.
मार्केट में ब्लैकमनी खत्म होने से प्रॉपर्टी इत्यादि की कीमतों पर लगाम लग जाएगी.
सुपारी लेकर किये जाने वाले क्राइम अपने आप बंद हो जाएंगे और कैश ट्रांजेक्शन के ज़रिये आतंकवाद की फंडिंग पर भी रोक लगेगी.
जाली नोटों का चलन भी ऐसे में बंद हो जाएगा और महंगी प्रॉपर्टी खरीदने के बाद रजिस्ट्री में हेर-फेर नहीं हो पायेगा.

और 56 तरह के टैक्सों को क्यों खत्म करना ज़रूरी
है?

इस पहल से नौकरीपेशा लोगों के हाथ में ज़्यादा पैसा होगा. साथ ही हर परिवार की खरीददारी की क्षमता बढ़ेगी.
पेट्रोल, डीज़ल और एफ़एमसिजी जैसी कमोडिटी 32 से 52 फीसदी तक सस्ती हो जाएंगी.
टैक्स भरने का झंझट ही नहीं होगा, तो ब्लैकमनी कोई जमा ही नहीं करना चाहेगा.
बिज़नेस के क्षेत्र में वृद्धि होगी और आम लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
इस प्रपोज़ल को लागू करने से क्या-क्या फ़ायदे होंगे?

जैसा ये संस्थान बता रहा है, अगर उसकी मानें तो ये प्रपोज़ल लागू हो गया तो सभी चीज़ों की कीमतें घटेंगी और नौकरीपेशा लोगों ज़्यादा पैसा पाएंगे. इस वजह से मांग और प्रोडक्शन बढ़ेगा, जो रोज़गार के अवसर भी बढ़ाएगा. बैंक सस्ते लोन उपलब्ध कराएंगे और इंटरेस्ट रेट घटेगा. प्रॉपर्टी की कीमतें कम हो जाएंगी और राजनीति में ब्लैकमनी का इस्तेमाल बंद हो जाएगा.
इस संस्थान ने ये दावा किया है कि ये प्रपोज़ल ब्लैकमनी, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, रिश्वतखोरी और आतंकियों की फंडिंग रोकने में पूरी तरह से कारगर होगी.

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