Top
Home > Archived > पैसे के लालच में बनी फर्जी बहन ,पहुची जेल

पैसे के लालच में बनी फर्जी बहन ,पहुची जेल

 आलोक मिश्रा |  23 Nov 2016 11:57 AM GMT  |  New delhi

पैसे के लालच में बनी फर्जी बहन ,पहुची जेल

कानपुर - इंदौर-पटना रेल हादसे के बाद एक ऐसा मामला सामने आया है .जिसे देखकर सभी हैरान है .पैसे की खातिर एक लड़की फर्जी बहन बनकर मंगलवार को सामने आयी .उसका कहना था कि उसका भाई इस रेल हादसे में मारा गया .लेकिन जब अफसरों ने शिनाख्त की तो अफसरों के होश फाख्ता हो गए .वह पैसे की खातिर फर्जी बहन बानी थी .पुलिस ने गुमराह करने के कारण लड़की को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है .

यूपी के कानपुर में हुए रेल हादसे में 150 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए. हादसे के बाद अपनों के शव लेने के लिए कानपुर पोस्‍टमॉर्टम हाउस में लोगों की भीड़ इकट्ठा है. 21 नवंबर को यहां एक लड़की आई, जिसने अपना नाम प्रीति बताया. उसका कहना था, वाराणसी का रहने वाला 26 साल का रिशू मेरा भाई था, जो रेल हादसे में मारा गया.मैं उसकी डेड बॉडी लेने आई हूं.मुझे जल्‍दी से भाई की बॉडी दे दो. करीब 36 घंटे तक वो पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ी रही. हालांकि, उसके पास रिशू का कोई आईडी प्रूफ नहीं था.

ऐसे हुआ लड़की की इस फर्जी कहानी का खुलासा

मंगलवार को प्रशासन रिशू की बॉडी प्रीति को सौंपने वाला था, इसी बीच वाराणसी के रहने वाले दीनानाथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. उनका कहना था, रिशू उनका बेटा है. वह उसकी डेडबॉडी लेने आए हैं. अफसर दीनानाथ की बातें सुन हैरान रह गए, क्‍योंकि प्रीति भी उसी डेडबॉडी के लिए क्‍लेम कर रही थी.
शिनाख्‍त कराई गई तो दीनानाथ ने मृतक रिशू से संबंधित सारे डॉक्यूमेंट दिखाए, जिससे यह साबित हो गया कि वो उन्‍हीं का बेटा था.


पैसे के लिए बोला झूठ

पूछताछ में प्रीती ने कहा, मैं वाराणसी की रहने वाली हूं. रिशू को मैं जानती थी. मुझे पता चला कि, मृतकों के परिजनों को 50 हजार रुपए सहायता राशि दी जाएगी. इसलिए डेडबॉडी लेने के लिए कानपुर आ गई. एसडीएम जयनाथ यादव ने बताया, गुमराह करने के आरोप में प्रीति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.


रीशू से पहले प्रीति ने एक और झूठ बोला था. उसने खुद को बिहार का बताया था. पुलिस से उसने कहा, पिता दिलीप और मां मनीषा देवी की बचपन में मौत हो गई थी. किसी तरह मजदूरी करके अपने भाई राहुल (20) का पालन-पोषण किया था.राहुल मध्य प्रदेश के सागर में नौकरी करता था. वह इंदौर-पटना एक्सप्रेस से पटना बहन के पास जा रहा था. ट्रेन हादसे में उसकी मौत हो गई. जब इसकी सूचना मिली तो वह भाई का शव लेने कानपुर पहुंची. इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओबराय वहां पहुंचे. उन्हें देखते ही प्रीति ने उनका पैर पकड़ लिया और चीख-चीखकर रोने लगी. फिर हाथ जोड़कर बोली- 'सर, मेरे भाई का शव जल्द दिला दो. मैंने उसे बेटे की तरह पाला था. मैं बिलकुल अनाथ हो गई हूं.अब जीने का सहारा भी नहीं बचा है. मैं यहां किसी को नहीं जानती.बड़ी मुश्किल से भाई का शव मिला है.जल्द पोस्टमार्टम करा दो. लड़की ने पुलिस को बताया कि मैं पैसौं के लालच में आ गई थी, इस वजह से ऐसा किया.

Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...
Next Story
Share it