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प्रधानमंत्री ने सुनी दिव्यांशु के मन की बात,दिए कार्रवाई के निर्देश

 आलोक मिश्रा |  3 Nov 2016 7:05 AM GMT  |  New delhi

प्रधानमंत्री ने सुनी दिव्यांशु के मन की बात,दिए कार्रवाई के निर्देश

'मेरा सपना डॉक्टर बनने का है। पापा जैसे-तैसे घर संभालते हैं। दादा जी के इलाज में बहुत सारे पैसे खत्म हो जाते हैं। इतने पैसे नहीं कि अच्छे स्कूल में नामांकन करवा सकूं।'' मुरौल प्रखंड के शांभा गांव का निवासी 12 वर्षीय दिव्यांशु का कहना है ''डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों का इलाज करूंगा ...सबकी तकलीफ दूर करूंगा।

अरविन्द मिश्रा व बिन्नी देवी के बेटे ने जब पीएम नरेंद्र मोदी को अपनी पीड़ा सुनाई, तो उनकी पहल पर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय (एमएचआरडी) ने उसके नामांकन की सिफारिश सीबीएसई बोर्ड से की। फिर, बच्चे की इच्छानुसार सीबीएसई ने मुजफ्फरपुर के डीएवी पब्लिक स्कूल (मालीघाट) में उसके नामांकन के लिए स्कूल के प्राचार्य को पत्र लिखा।

रेडियो से आया आईडिया

दिव्यांशु ने बताया कि उसके दादा कैंसर, अल्जाइमर, पाटिज्म व थायराइड जैसी कई बीमारियों से पीडि़त हैं। सुबह स्कूल जाने से पहले उन्हें दवा दे रहा था, तो रेडियो के एफएम रेनबो चैनल पर एक प्रचार सुना। उसमें कहा गया था कि अपनी परेशानी को सीधे पीएम तक पहुंचाओ और उनसे मन की बात कहो। दिव्यांशु ने बताया ''मैंने पता नोट कर लिया। सोच लिया कि मेरे सपने को सच करने में पीएम जरूर मदद करेंगे। उनके पास बहुत सारे पैसे होते हैं। जून में चिट्ठी भेज दी।'

अरविंद मिश्रा खुशी जाहिर करते हुए बताते हैं कि जब बेटे ने कहा पापा मुझे पीएम को पत्र लिखना है, तो मैंने टाल दिया। पता नहीं था कि प्रचार के माध्यम से मिले पते पर एक्शन भी लिये जाते हैं।

दिव्यांशु ने पीएम को लिखा कि वह पांचवी कक्षा का छात्र है तथा डॉक्टर बनना चाहता है। उन्होंने पीएम से डीएवी स्कूल में दाखिला दिलाने का आग्रह किया। इसके बाद पीएम की पहल पर मानव संसाधन विभाग ने सीबीएसई को छात्र के नामांकन को लेकर पत्र लिखा। फिर सीबीएसई ने नामांकन को लेकर मुजफ्फरपुर के मालीघाट स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य को प्रत्र लिखा।

डीएवी पब्लिक स्कूल (मालीघाट) के प्राचार्य जयश्री अशोकन के अनुसार मानव संसाधन विभाग की ओर से 13 जुलाई काे प्रेषित पत्र सीबीएसई ने उन्हें भेजा है, जिसके साथ बच्चे की टूटी-फूटी अंग्रेजी में पीएम को लिखी चिट्ठी भी संलग्न है। बोर्ड ने कहा है कि आरटीइ के नियमों व अपने बाइलॉज के अनुसार बच्चे की नामांकन की प्रक्रिया निपटाई जाए।

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