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क्या कांग्रेस मुक्त भारत का बीजेपी का सपना कहीं बीजेपी मुक्त दिल्ली ना हो जाय!

 special coverage news |  2017-02-19T10:56:11+05:30  |  नई दिल्ली

क्या कांग्रेस मुक्त भारत का बीजेपी का सपना कहीं बीजेपी मुक्त दिल्ली ना हो जाय!

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कांग्रेस-मुक्त भारत के अभियान में आम आदमी पार्टी भाजपा को एक और झटका देने की तैयारी में है। पंजाब विधानसभा चुनाव आप जीते या नंबर दो पर रहे लेकिन भाजपा का नुकसान होना तय माना जा रहा है। यह तय माना जा रहा है कि जिस तरह 2014 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा के नेता महीनों दिल्ली का फैसला टालते रहे और देरी से चुनाव होने पर आप प्रचंड बहुमत से विधानसभा चुनाव जीती, उसी तरह पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग की बनाई वीके शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक न करके व उस पर कारवाई न करने से पंजाब के बाद दिल्ली नगर निगम चुनावों में भी भाजपा का नुकसान होगा।


दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के दो साल पूरे होने पर भले ही कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के स्थानीय नेता दिल्ली सरकार की आलोचना कर रहे हों। आप के नेता भी केंद्र सरकार के खिलाफ हर रोज बयान दे रहे हैं। लेकिन वास्तव में भाजपा की केंद्र सरकार के फैसले से आप ताकतवर हो रही है।बिना नियम बनाए आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मामले पर चुनाव आयोग की सक्रियता से लगा कि फैसला पंजाब चुनाव से पहले आ जाएगा। पंजाब और दिल्ली का एक जैसा समीकरण होने से पंजाब के नेता दिल्ली में 21 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के भरोसे बैठे थे। माना जा रहा था कि कभी भी चुनाव होने पर सभी सीटें फिर से आप को नहीं मिलतीं। चुनाव आयोग का फैसला कई महीने से सुरक्षित है। इसी दौरान उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के विवाद पर चार अगस्त का फैसला आ गया, जिसमें उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासक बताया गया है। दिल्ली सरकार उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई और उसकी सुनवाई संविधान पीठ करेगा। इसी फैसले के बाद तब के उपराज्यपाल नजीब जंग ने पूर्व सीएजी वीके शुंगलू की अगुआई में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई जिसने आप सरकार के डेढ़ साल के फैसलों से जुड़ी चार सौ फाइलों की जांच करके अपनी रिपोर्ट 27 नवंबर को उपराज्यपाल को दी। इस समिति को आप सरकार अवैध ठहराने में लगी रही तो उपराज्यपाल ने सार्वजनिक बयान देकर न केवल कमेटी को सही ठहराया बल्कि शुरुआती जांच में आई गड़बड़ियों की सीबीआइ से जांच करवाने की बात कही और रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की घोषणा की।


बताया जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट को सार्वजनिक कर पाने के कारण उन्होंने दिसंबर में इस्तीफा दिया। जंग को तो कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार ने उपराज्यपाल बनाया था। लेकिन उनके जाने के बाद अनिल बैजल को तो भाजपा की सरकार ने उपराज्यपाल बनाया। रिपोर्ट आए ढाई महीने हो गए लेकिन उसे सार्वजनिक करना तो दूर उसपर कोई बयान तक नहीं आया। अगर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होती और राजनिवास से बाहर आनेवाली सूचनाओं के मुताबिक फाइलों की गड़बड़ियों की जानकारी तथ्यों के साथ लोगों तक पहुंचती तो आप को पंजाब में भारी नुकसान होता। आप दिल्ली में सरकार बनने से ही पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में लगी रही। उसने पंजाब के बाद गोवा जैसे राज्य को चुना जो आकार में छोटा है और जहां भाजपा और कांग्रेस में सीधी लड़ाई है।



वैसे तो दिल्ली में आप ने सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए। लेकिन उसके साथ मूल रूप से कांग्रेस का वोटर जुड़ा। निगमों में दस साल से भाजपा काबिज है। सत्ता में रहने के कारण उसके खिलाफ हवा बनी है। उसका लाभ अगर कांग्रेस और आप ने उठा लिया तो फिर निगम चुनावों में मुकाबलाभले ही तिकोना हो लेकिन असली लड़ाई आप और कांग्रेस में हो जाए और कांग्रेस-मुक्त देश भले न हो 'भाजपा-मुक्त' दिल्ली तो हो ही जाएगी। भाजपा के नेताओं के समय पर फैसला न लेने के कारण विधानसभा चुनाव में भाजपा की पहले ही पराजय हो चुकी है।

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