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मशहूर कवि एवं शायर 'बेकल उत्साही' का निधन

 Arun Mishra |  3 Dec 2016 6:16 AM GMT  |  नई दिल्ली

मशहूर कवि एवं शायर बेकल उत्साही का निधन

नई दिल्ली : पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं पद्मश्री से सम्मानित मशहूर कवि एवं शायर 'बेकल उत्साही' का आज निधन हो गया। बेकल उत्साही ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। ब्रेन हैमरेज की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बेकल उत्साही का जन्म एक जून 1924 को हुआ था। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के उतरौला के रहने वाले उत्साही का असली नाम शफी खान था। उन्होंने 1952 में विजय बिगुल कौमी गीत और 1953 में बेकल रसिया लिखी। उत्साही ने गोण्डा हलचल प्रेस, नगमा व तरन्नुम, निशात-ए-जिन्दगी, नूरे यजदां, लहके बगिया महके गीत, पुरवईयां, कोमल मुखड़े बेकल गीत, अपनी धरती चांद का दर्पण जैसी कई किताबें भी लिखीं।

गुलामी के दौर में बेकल अंग्रेज हुक्मरानों के खिलाफ जवानी में राजनीतिक नज़्म व गीत लिखने लगे। अंग्रेजों को यह हरकत नागवार गुजरी और बेकल को कई बार जेल जाना पड़ा। जेल से ही उन्होंने नातिया शायरी की शुरुआत की। बेकल ने साम्प्रदायिकता के खिलाफ धर्म निरपेक्षता के लिए हिन्दी और उर्दू भाषा को आपस में मिलाकर एक नई शैली प्रदान की। जिसे बेकल शैली कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। उत्साही को कांग्रेस की ओर से 1986 में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था। उनके गंगा जमुनी संस्कृति का मिश्रण एवं साहित्यिक सेवाओं में विशेष योगदान से प्रभावित होकर 1976 में उन्हें राष्ट्रपति ने पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।

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