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दिल्ली सरकार की नाक के नीचे हो रहे ऑटो घोटाले का पर्दाफ़ाश, गरीबों की सरकार ने कैसे मारे गरीब!

 Special Coverage News |  29 Nov 2016 10:16 AM GMT  |  New Delhi

दिल्ली सरकार की नाक के नीचे हो रहे ऑटो घोटाले का पर्दाफ़ाश, गरीबों की सरकार ने कैसे मारे गरीब!

दिल्ली: अपनी रोज़ी रोटी और ग़रीब परिवार का पेट पालने के लिए जब एक बेरोज़गार दिल्ली में ऑटो ख़रीदने जाता है, तो उसे 1,85,000 रूपये का नया ऑटो 4,50,000 से 4,70,000 तक में मिलता है। असल कीमत से दुगने से भी ज़्यादा पैसे में ऑटो मिलने का कारण है दिल्ली सरकार और फाइनेंस माफ़िया के बीच मोटी कमाई के लिए सांठगांठ। दिल्ली सरकार की नाक के नीचे चल रहे इस बड़े घोटाले का पर्दाफ़ाश करते हुए स्वराज इंडिया ने घोटाले से सम्बंधित कागज़ात पेश किये।


एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने ऑटो घोटाले को दिल्ली के उन हज़ारों गरीब ऑटो चालकों के साथ छलावा बताया जिनके समर्थन से आम आदमी पार्टी आज सत्ता में बैठी है। अनुपम ने पत्रकारों को विस्तार से जानकारी देते हुए बताया, "फाइनेंस माफ़िया और दिल्ली सरकार के गठजोड़ से सबसे पहले किसी पुराने ऑटो को किसी और के लाइसेंस बैज के नाम किया जाता है। फिर उस पुराने ऑटो को स्क्रैप कराके स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट ली जाती है। ट्रांसपोर्ट विभाग इसके बाद नो ड्यू सर्टिफिकेट देती है। इसके बदले नया ऑटो ख़रीदने के लिए दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी की मिलीभगत से एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी करवा दिया जाता है, और कानून के आँखों में धूल झोंकते हुए, सभी नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए ग़रीब ऑटो चालक को नया ऑटो फाइनेंस करवा दिया जाता है। हर कदम पर दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ होती है, या हस्ताक्षर होता है।


दिल्ली में लगभग सभी ऑटो फाइनेंस पर ही बिकते हैं। इस पूरे गोरखधंधे में फाइनेंसर की मुख्य भूमिका होती है जो सरकारी अधिकारियों, नेता, मंत्री से सांठ गाँठ करके ऑटो ड्राईवर का शोषण करता है। इतना ही नहीं, इस गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 16.12.1997 को M.C.Mehta Vs Union of India & Others मामले में यह स्पष्ट रूप से हिदायत दी थी कि किसी भी रूप में परमिट की ख़रीद फ़रोख़्त पाये जाने पर परमिट रद्द कर दिया जाएगा और साथ ही ऐसा करने वाले पर कानूनी कार्यवाई की जायेगी। परंतु दिल्ली सरकार और फाइनेंस माफ़िया की मिली भगत से सरेआम परमिट की ट्रेडिंग हो रही है। ऑटो रिप्लेसमेंट स्कीम की आढ में हो रहे इस घोटाले के कारण 1,85,000 रूपये के नए ऑटो की दिल्ली में कीमत 4,50,000 से 4,70,000 रूपये बना दी गयी है।


ग़रीब और बेरोज़गार ऑटो चालक के पास आज कालाबाज़ारियों के चंगुल में फंसने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।"अनुपम ने दिल्ली सरकार के ऑटो घोटाले पर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को घेरते हुए कहा, "आम आदमी पार्टी ने सत्ता का सफ़र ऑटो चालकों के कंधे पर बैठकर पूरा किया। पार्टी को 67 सीटें दिलाने में इन मेहनतकश और जुनूनी ऑटो चालकों का सबसे बड़ा योगदान था। आज ऑटो घोटाले के उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता कि वो उस कुर्सी पर बैठे रहें जो ऑटो वालों की मेहनत और दुवाओं से मिली है।"स्वराज इंडिया अध्यक्षमंडल के सदस्य पुरुषोत्तम ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, "दिल्ली में हर एक ऑटो की ख़रीद में 2,65,000 से 2,85,000 रूपये के कालेधन का लेनदेन हो रहा है।


आज जब देशभर में पार्टियाँ काले धन पर बड़े बड़े दावे और बहस कर रही हैं तो दिल्ली सरकार में बैठे लोग ग़रीबों के पसीने की कमाई मार के काला धन बनाने में व्यस्त हैं।"मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले ऑटो ड्राईवरों को बड़े बड़े लुभावने वादे किए थे। ये अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन वादों को पूरा करना तो दूर, ऑटो चालकों के साथ आज ऐसा घोर अन्याय हो रहा है।

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