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क्या जस्टिस ठाकुर प्रधान मंत्री मोदी को नाकारा साबित करने में लगे हैं ?

 Special Coverage News |  1 Nov 2016 10:53 AM GMT  |  New Delhi

क्या जस्टिस ठाकुर प्रधान मंत्री मोदी को नाकारा साबित करने में लगे हैं ?

सुभाष चन्द्र

जजों की नियुक्ति के मसले पर जिस तरह सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सरकार को फटकार लगाते हुई धमकी दी कि हम अगली बार पी एम् ओ के सचिव को तलब कर लेंगे, उससे लगता है जस्टिस ठाकुर प्रधान मंत्री को नाकारा साबित करने में लगे हैं.


सभी जानते हैं प्रधान मंत्री मोदी कितनी तत्परता से काम करते हैं, फिर भी जस्टिस ठाकुर ने भड़ांस निकाली कि 9 महीने से सरकार हमारी फाइल पर सो रही है --जबकि ठाकुर साहेब अपनी तरफ देखना ही नही चाहते -कि देरी सुप्रीम कोर्ट में हो रही है.

शायद कल प्रधान मंत्री ने दिल्ली हाई कोर्ट के स्थापना दिवस पर इसी लिएकहा कि सरकार और न्यायपालिका को मिल कर काम करना चाहिए और सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए --सुप्रीम कोर्ट की बेंच में बैठ कर सरकार को जिम्मेदारी निभाने के लिए कहना आसान है.


मगर अपनी जिम्मेदारी समझना कठिन है और यही प्रधान मंत्री ने याद दिलाया है --NJAC को संसद ने सर्वसम्मिति से पास किया --बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया --यानि 125 करोड लोगों की सहमति से पास बिल को 4 जजों ने रद्द कर दिया और कॉलेजियम को चालू रखा जिसमे अनेक खामियां खुद सुप्रीम कोर्ट ने बताई है --इसके बाद कॉलेजियम में सुधार के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट के कहने पर सरकार ने MOP मेमोरेंडम ऑफ़ प्रोसीजर तैयार किया मगर उसे अभी तक जस्टिस ठाकुर की सर्वोच्च अदालत ने मंजूर नही किया.


मुकुल रोहतगी ने यही कहा अदालत में कि MOP मंजूर ना होने से देरी हो रही है. मगर जस्टिस ठाकुर इस पर भी बरस पड़े कि MOP अगर मंजूर नही होगा तो क्या जज नियुक्त ही नही होंगे--जस्टिस ठाकुर ने खुद माना कि MOP के एक दो बिंदुओं पर सहमति नही बनी है. सवाल ये है कि आप उन पर सहमति क्यों नही बनाते. मगर उन्हें तो कॉलेजियम से ही जजों की नियुक्ति करानी है --यहीं पर तो गोलमाल है --और दोष दे रहे हैं प्रधान मंत्री मोदी को. जस्टिस ठाकुर 4 जनवरी 2017 को रिटायर हो रहे हैं. इसलिए चाहते हैं कि उनके मनपसंद जजों की नियुक्ति हो जाये. MOPको आने वाला मुख्य न्यायाधीश देख लेगा. NJAC के 5 जजों के फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए और ऐसा करने के लिए 11 जजों की पूर्ण संविधान पीठ बैठनी चाहिए -क्योंकि ऐसे संविधान संशोधन पर जो सर्वसम्मिति से पास हुआ हो, 5 जजों की खंडपीठ का निर्णय कोई मायने नही रखता.

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