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500 और 1000 के नोटों को निरस्त करने के कारणों को स्पष्ट करने और उसके लाभ बताने के लिए श्वेत पत्र जारी करे केंद्र सरकार - के. एन. गोविंदाचार्य

 Special Coverage News |  13 Nov 2016 9:45 AM GMT  |  New Delhi

500 और 1000 के नोटों को निरस्त करने के कारणों को स्पष्ट करने और उसके लाभ बताने के लिए श्वेत पत्र जारी करे केंद्र सरकार - के. एन. गोविंदाचार्य

8 नवंबर को शाम 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी जी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को निरस्त करने की घोषणा करने से देश में आया भूचाल अभी थमा नहीं है। सरकार द्वारा भारी मात्रा में जारी 500 और 1000 रुपये के नोट रद्द हो जाने से अधिकांश आम जनता परेशानी में आ गयी है। बैंकों की शाखाओं और एटीएम के बाहर लगी लंबी कतारें और देश भर से आ रहीं अफवाहें इसका प्रमाण हैं। सरकार के तुग़लकी फैसले से काले धन को कमाने वाले राजनेताओं-नौकरशाहों, टैक्स चोरी करने वाले व्यापारियों और अवैध धंधे वाले माफियाओं पर क्या असर पड़ेगा, या रसूख के कारण वे बच जाएंगे, यह तो भविष्य ही बता पायेगा। पर मोदीजी के झटके से आम जनता हलाल हो रही है। लोगों को रोज की जीवनोपयोगी वस्तुओं खरीदने में कठनाई हो रही है, चिकित्सा और यातायात जैसी आवश्यक सुविधाओं में परेशानी हो रही है।


आम जनता इन सब परेशानियों को सह भी लेगी जब वह इस अचानक हुए निर्णय के पीछे के कारणों को जानेगी तथा उस निर्णय से भविष्य में होने वाले लाभों से भी परिचित होगी। अतः सरकार एक श्वेत पत्र जारी करके आम जनता को बताये कि उसने इतना कठोर निर्णय अचानक क्यों लिया ? देश में कितने नकली नोट हैं ? 500 और 1000 रूपये के नोटों से नगदी के रूप में कितना काला धन बना हुआ है ? इन पुराने नोटों को छापने में सरकार ने आम जनता का कितना धन व्यय किया था ? इन नोटों को वापस लेने और नए नोटों को छाप कर उन्हें बदलने में आम जनता का कितना धन सरकार व्यय करने वाली है ? आजादी के बाद देश में अब तक कितना काला धन बनने का अनुमान सरकार लगाती है ? काले धन किस-किस रूप में कितना - कितना विद्यमान है ? 500 और 1000 रूपये के नोटों को रद्द करके 500 , 1000 और 2000 के नए नोटों को छापने के पीछे क्या तुक है ?



ये कुछ प्रश्न हैं जो इस देश के सभी नागरिकों के दिमाग को मथ रहें हैं। लोकतंत्र में राज्य को जनता के प्रति उत्तरदायी माना जाता है, उसे सरकार से जानने का पूरा अधिकार रहता है। जनता में फैले संभ्रम और अफवाहों को दूर करने के लिए उपरोक्त सभी प्रश्नों और अन्य सम्बंधित प्रश्नों के तथ्यपरक जानकारी देते हुए सरकार शीघ्र एक श्वेतपत्र जारी करके अपना कर्त्तव्य निभाए।

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