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"नोटबंदी के सही फ़ैसले से भारत को बचायें" - योगेन्द्र यादव

 Special Coverage News |  19 Nov 2016 3:22 PM GMT  |  New Delhi

नोटबंदी के सही फ़ैसले से भारत को बचायें - योगेन्द्र यादव

नई दिल्ली: नोटबंदी का सही फैसला कहीं भारतबंदी ना बन जाए, इस चिंता पर स्वराज इंडिया ने दिल्ली के 34 इलाकों में नुक्कड़ जनसुनवाई का आय्योजन किया। रविवार को 100 से ज़्यादा स्थानों पर जनसुनवाई का आयोजन होगा। स्वराज इंडिया ने इस कार्यक्रम को "नोटबंदी पर नुक्कड़" का नाम दिया है। स्वराज इंडिया का मानना है कि नोटबंदी जैसे गंभीर मामलों पर भी हमारी पार्टियाँ देशहित को आगे नहीं रख रही। पहले दिन से ही सरकार झूठे दावे और मिथ्या प्रचार करती रही, जनता की पीड़ा पर पर्दा डालती रही। उधर विपक्ष विरोध के लिए विरोध कर रहा है, आम लोगों के दुःख का फायदा उठा रहा है, सरकार को फंसा हुआ देख मजे ले रहा है, मौके को भुनाने में लगा है।


स्वराज इंडिया ने पहले दिन से देशहित की बात को आगे रखा। नोटबंदी की घोषणा के कुछ ही घंटो में इसका समर्थन किया, कहा कि इससे कालेधन पर तो ज्यादा असर नहीं पड़ेगा लेकिन जाली नोट रुकेंगे। हमने अपील की थी कि सब पार्टियां इस कठिन दौर में सरकार की मदद करें।


जनता ने सोचा कि नोटबंदी से कालाधन रुकेगा, इसलिए अपने सुख दुःख की चिंता किए बिना इसका समर्थन किया। लेकिन पिछले दिनों में गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, व्यापारी, सब परेशान दिखे। बैंकों के बाहर लंबी कतारों में पूरा देश खड़ा दिखा। कितनों का धंधा पानी, काम काज सब ठप हो गया। पता लगा कि इस परेशानी का कारण यह था कि सरकार ने इतने बड़े क़दम की तैयारी नहीं की थी।


स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने कहा, "देश के लोग ये सारी पीड़ा और परेशानी भी ख़ुशी ख़ुशी झेल लेते अगर इस फैसले से काला धन पर कोई बड़ा असर पड़ता। लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा। काले धन का बहुत छोटा हिस्सा कैश में है। ज़्यादातर ब्लैक मनी तो विदेशों में जमा है, सोना, या रियल एस्टेट के रूप में है। जो छोटा सा हिस्सा कैश है, वो भी ऐसे लोगों के पास है जो बहुत जुगाड़ू और पहुँच वाले हैं। सरकार उन्हें रोक नहीं पाएगी। वैसे भी अगर बड़े नोट बंद करने से कालाधन रुकता है तो सरकार 2000 के बड़े नोट बाज़ार में क्यूँ लाती?"


स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने पिछले दिनों के अनुभव को देखते हुए देश के सामने एक सकारात्मक सुझाव रखा है। ऐसे समय में किसी सार्थक समाधान की बजाये सिर्फ़ आरोप प्रत्यारोप की राजनीति हो रही है, स्वराज इंडिया का प्रस्ताव देश की जनता की परेशानी और पीड़ा को हल करने में मददगार होगा।


योगेंद्र यादव ने कहा, "नोटबंदी की योजना को 31 दिसंबर से लागू किया जाए और तब तक सभी लोगों को पुराने नोट इस्तेमाल करने की छूट दे दी जाए। यानि जो छूट अभी रेल, पेट्रोल पम्प, सरकारी हस्पताल आदि को है, वो सभी को दे दिया जाए। सरकार चाहे तो इसकी कोई लिमिट बाँध दे ताकि कालेधन के बड़े खेल खेलने वाले इसका फ़ायदा ना उठा सकें। लेकिन मेहनत की कमाई खाने वाले बिना परेशानी के अपने पुराने नोट बदल लें।


कोई कहेगा इससे काला धन पूरी तरह तो नहीं रुकेगा। इतने दिनों में कई काला धन वाले उसे सफ़ेद करने की तरकीब बना लेंगे। ये हो सकता है। लेकिन सरकार की वर्तमान नोटबंदी से भी तो फ़िलहाल यही हो रहा है। जाली नोट जरूर रुक रहे हैं, लेकिन जो काला धन कैश में लेकर बैठा है वो अपने नोटों को कहीं न कहीं से 'ऐडजस्ट' तो कर ही रहा है। असली परेशानी तो सिर्फ आम जनता को हो रही है। कितना अच्छा हो अगर सरकार इस सच को मान ले। उधर विपक्ष वाले भी नोटबंदी को वापिस लेने जैसी बातें बंद कर दें और इस घोषणा से जो फायदे सचमुच हो सकते हैं वो होने दें।


स्वराज इंडिया ने साथ ही मांग किया कि अब सरकार काला धन रोकने के लिए जल्द से जल्द बाक़ी बड़े कदम उठाये - जैसे मॉरीशस की खिड़की को बंद करे, विदेशों में जमा काला धन वापिस लाये, पी-नोट पर पाबन्दी लगाए, भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर न करे, पार्टियों की विदेशी फंडिंग पर रोक लगाए, पूंजीपतियों का क़र्ज़ माफ़ी ना हो, लोकपाल की नियुक्ति करे।

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