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क्या वास्तव में देश बदल रहा है? जी हाँ देश बदल रहा नहीं बदल गया, जानिए कैसे?

 Special Coverage News |  25 Nov 2016 11:24 AM GMT  |  New Delhi

क्या वास्तव में देश बदल रहा है? जी हाँ देश बदल रहा नहीं बदल गया, जानिए कैसे?

पीएम मोदी ने नोटबन्दी का ऐलान क्या किया देश में से कई मुद्दे इस तरह गायब हो गए जैसे गधे के सर सींग. पीएम के इस फैसले के बाद हिन्दू-मुस्लिम, दलित के नाम को रोना रोने वाले भूल गए कि आखिर हम क्या बोले.

आपको बता दें कि जैसे ही 8 नवम्बर को यह ऐलान हुआ लोगों को सिर्फ और सिर्फ पैसा बदलने कि जल्दी थी. नेताओं को विरोध कि जल्दी थी. क्या नजीब मिल गया. रोहित वेमुला जिन्दा हो गया. लोग भूल गए, कहा है कन्हैया और केजरीवाल. किधर गए राहुल गाँधी दलितों कि मसीहा मायावती क्या कर रही है. करेंसी बदलते ही क्या वास्तव में ही देश बदल गया. लोगों ने कहीं भी कहा कि बैंक कि लाइन में मरने वाला दलित है, या मुस्लिम है. नहीं ना. सिर्फ कहा गया बैंक कि लाइन में किसान, गरीब , कमजोर आदमी कि मौत हो गई.

चलो मोदी जी आपने नोटबन्दी करके इस देश में सब कुछ बदल दिया. अब लग रहा है कि देश बदल रहा है. भारत बदल रह है.

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