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लन्दन निवासी का केजरीवाल से बड़ा सवाल, यह लन्दन का धोखा क्यों?

 शिव कुमार मिश्र |  2017-03-09T20:04:17+05:30  |  New Delhi

लन्दन निवासी का केजरीवाल से बड़ा सवाल, यह लन्दन का धोखा क्यों?

नई दिल्ली: लंदन निवासी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली को लंदन जैसा बनाने का सपना दिखाने पर सवाल खड़ा कर दिया. और केजरीवाल को सम्बोधित पत्र लिखकर एक नया मुद्दा दे दिया है. इसी मुद्दे को लेकर एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी चुनाव में जाने वाली थी.

प्रिय श्री अरविन्द केजरीवाल,


मेरा नाम जय नाथ मिश्रा है और मैं पिछले 60 सालों से लन्दन, ब्रिटेन में रहता हूँ। मैं आम आदमी पार्टी के समर्थक समूह से हूँ जिससे आप भली-भाँती परिचित हैं। अगर आपको याद हो तो मैं दिल्ली विधानसभा चुनाव के तीन महीने पहले, सितम्बर2013 में चुनाव कैंपेनिंग में अपना योगदान देने दिल्ली आया था। उस दौरान हमने कई दफे साथ में मंच तो साझा किया परंतु कभी सीधी बात-चीत करने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ।


पिछले ढाई साल से आप दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन तो हैं, लेकिन मेरे विचार में आप अपनी ही पार्टी के मूल सिद्धांतो जिसे आप और अन्य लोगों ने पुस्तक 'स्वराज' में लिखा है, से पूरी तरह से दूर हो चले हैं। आपका फैसला जिससे दानकर्ताओं की सूची को पार्टी की वेबसाइट से हटाया गया, ऊँट की कमर तोड़ने में एक आखरी प्रहार था जिसके परिणामस्वरूप मैं आज चंदा बंद सत्याग्रह के मंच से आपको संबोधित करने के लिए विवश हो गया हूँ।


दिल्ली को एक वर्ष में लन्दन सरीखा तब्दील करने की कवायद जो आप कर रहे हैं ना, वो सिर्फ एक नया जुमला है जो की दिल्ली के मतदाताओं को एक बार फिर से लुभाने के लिए गढ़ा जा रहा है। आपकी इस नवीनतम चाल में कितनी सच्चाई है इसका ज्ञान आपको होगा ही, पर आपका थोड़ा सा सच्चाई से सामना करने का प्रयास मैं भी करना चाहूँगा। तो साहब, मुझे लन्दन में रहते 60 वर्षों से ऊपर हो गए हैं और मेरी 60 वर्षों की समझ यही कहती है की विकास करने में और जादू करने में काफी फर्क होता है।


जिस लन्दन को आप विकास का प्रतिरूप बना कर, उसी तर्ज पर दिल्ली के अग्रिम विकास की कहानी को लिखने की कवायद आप कर रहे हैं ना, उस विकास में निवेश किये गए समय काल की जानकारी से आप या तो अनभिज्ञ हैं, या फिर उसी को तोड़-मरोड़ कर चुनावी मोहरा बना रहे हैं। मैं वैसे दूसरे पक्ष से ज़्यादा सहमत हूँ।


साहब! लन्दन को 'लन्दन' बनने में ठीक उतना ही समय लगा जितना मुझे वहां रहते, और अब भी लन्दन बन रहा है। इस लन्दन के विकास का मैं खुद भागीदार भी रहा हूँ और गवाह भी। इसलिए मैं ये कह सकता हूँ की लन्दन को विकसित होने में कोई एक वर्ष नहीं लगा।


फिर भी, मैं बेहद आश्चर्य और रोचकता के साथ क्या आपसे यह पूंछना चाहता हूँ की ऐसे कौन से कदम उठाये जाएंगे, नीतियां अपनायी जाएंगी, और फैसले लिए जाएंगे जिससे की दिल्ली सिर्फ एक साल में लन्दन जैसा बन जाएगा? आपकी याददाश्त को थोड़ा ताज़ा करूँ तो पिछले चुनाव में आपका बयान आया था, "मुझे सत्ता या शक्ति दो, और मैं तुम्हे चमकती-चमचमाती दिल्ली दूंगा।" आको वो दोनों मिला जिसकी दरख्वास्त आपने घूम घूम कर लोगों से करी। सर नवाजा गया आपको आपकी मांगो से, पर आपने क्या किया?


आज ढाई साल हो गए लेकिन उसी सत्ता और शक्ति के नशे में चूर होकर आपने दिल्ली को चमकना-चमचमाने तो दूर, कूड़े के एक बड़े से ढेर में तब्दील कर दिया। इतने सब के बावजूद आप आज भी सिर्फ जुमलेबाज़ी पर ही अटके हुए हैं। क्या आपको यह महसूस नहीं होता की अब समय आ गया है जब आप अपने दृष्टिकोण में पूरी तरह से बदलाव लाएं और दिल्ली पर शासन करने के लिए फिर से उसी संविधान और नीतियों पर वापिस जाएँ जिस पर आपने अपने हस्ताक्षर दिए थे। इन्ही सवालों और ईश्वर से आपको सद्बुद्धि की कामना के साथ अपन पत्र समाप्त करता हूँ।

आशा है की आप जल्द जवाब देंगे,धन्यवाद।

जय नाथ मिश्र

लन्दन निवासी

सदस्य, चंदा बंद सत्याग्रह (आम आदमी पार्टी के खिलाफ)

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