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शिवराज की खुली पोल: सेन्ट्रल जेल या निश्चिन्त दौड़!

 Special Coverage News |  31 Oct 2016 12:29 PM GMT  |  New Delhi

शिवराज की खुली पोल: सेन्ट्रल जेल या निश्चिन्त दौड़!
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भोपाल की सेंट्रल जेल से आठ सिमी के कार्यकर्ता (आतंकवादी) एक पुलिसकर्मी की हत्या करके भाग जाते हैं. क्या पूरे सेन्ट्रल जेल परिसर में सिर्फ एक पुलिसवाला तैनात था? बैरक से गेट तक या फिर दिवारों तक कोई भी पुलिसकर्मी नहीं दिखा? सेन्ट्रल जेल क्या एक पुलिस वाले के अंडर में सुरक्षित रह सकती है? दूसरे कैदियों को भी भनक नहीं लगी? जेल से बाहर आने के बाद भोपाल शहर में घुसने के बजाए भागे हुए अपराधियों ने हाईवे से होते हुए पहाड़ियों पर एक साथ जाने का फैसला आखिर क्यों ?

सभी सिमी आतंकवादी पोलो की शर्ट, फास्ट्रैक की घडी और मेहेंगे जूते पहने थे, कहीं से ऐसा लगता है कि ये भागे है या इनको जान बूझ के भगाया गया है?


आठों सिमी के लोग शहर में दाखिल होते तो एक एक करके भाग सकते थे या कहीं छिप भी सकते थे परंतु उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? खाली हाथ भागे आठों कार्यकर्ता हत्या करके भागे थे, उनको पता था कि पुलिस के हाथ चढ़े तो मारे जाएंगे बावजूद इसके सब के सब एक साथ भाग रहे थे? क्या अद्भुत सीन बना है? जैसे फिल्मों में सीन दर्शाता है.

भोपाल पुलिस का बयान
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जेल से भाग कर किसी तालाब पर जब वो अपना मुह नदी में धो रहे थे, कुछ गाँव वालों ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया की यही हैं वो 8 जेल से भागे हुए कैदी और उन्होंने पुलिस को फ़ोन लगा कर सब बता दिया. पुलिस आती है और दोनों गुटों के बीच एक मुठभेड़ होती है. मुठभेड़ में पुलिस को अपनी जान बचाने का और कोई चारा नज़र नहीं आ रहा था सिवाए उन कैदियों को गोली मारने के क्योंकि उनके पास हथियार के रूप में जेल के बर्तन जो थे और वो आत्म-समर्पण करने को तैयार नहीं थे. तो बस पुलिस ने गाँव से 11 किलोमीटर दूर एक वीरान जगह पर उन कैदियों को गोली मार दी

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