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मोदी सरकार की विफलता का पिटारा है नोट बंदी!

 Special Coverage News |  9 Dec 2016 6:07 AM GMT  |  राजस्थान

मोदी सरकार की विफलता का पिटारा है नोट बंदी!

हमारे देश में जब से भाजपा की सरकार केंद्र में बनी है तब से अचानक देश में राजनीती का चोला पहनकर सत्ता के उच्च प्रतिष्ठानों में बैठकर देश दुनिया का धन लूटने वाले देश भक्तो की बहार आ गई है. योग के नाम पर दाल चीनी बेचने वाले भोगियों के दिन फिर रहे है एक और देश की जनता मोदी सरकार में मंदी की मार के साथ महंगाई से हलकान हो रही है वही दूसरी ओर देश में धर्म मंदिर, पूजा, राष्ट्रवाद के साथ योग को बेचने वाले देश में शासन कर रहे है. ये अंधभक्त देश की जनता की वास्तविक समस्याओ का निदान करने में विफल साबित हो रहे है. सीमा पार आतंक को लेकर मोदी सरकार की कोई नीति नही हैI सब कुछ भगवान् भरोसे चल रहा हैI


देश की जनता को गुजरात राज्य समझकर आज भी हमारे प्रधानमंत्री राष्ट्रवाद धर्म संस्कृति का अफीम पिलाकर देश की जनता की वास्तविक समस्याओ से जनता का मुह मोड़ने में लगे है. शानदार जुमलो के बल पर कुछ समय के लिए तालियाँ तो बज सकती है परन्तु जुमलो से गरीब का पेट नही भरता है. लफ़फाजी क्षणिक रूप से मनोरंजन तो कर सकती है परन्तु बीमार बच्चे की दवा नही बन सकती है. देश की सीमा पर पकिस्तान की नापाक हरकते जारी है. इस पूर्व हमारे पी.एम. अचानक पाक पी.एम. नवाज शरीफ की नातिन की शादी में पहुंचकर सबको चोका देते है. अचानक फैसले करने से देश दुनिया को अचम्भे में डालने वालो की बुद्धि का पैमाना भी अस्थिर ही रहता है. दिमागी अस्थिरता के कारण व्यक्ति कई बार सफ़र के सौरान अपने गंतव्य स्टेशन को भूलकर किसी अन्य अनचाहे स्थान पर पहुँच जाता है फिर हड़बड़ी में व्यक्ति अपनी भूल सुधारने के लिए आनन्-फानन में फैसले करता है. ये फैसले कभी कभी व्यक्तियों को भारी परेशानी में डाल देते है. ठीक इसी प्रकार की केंद्र सरकार स्थित इन दिनों दिख रही है. एक सौ पच्चीस करोड़ निवासियों के देश का प्रधानमंत्री पकिस्तान को आतंकवादी राष्ट्र घोषित करने के लिए अमेरिका से गुहार लगा रहा है आज तक हमारी सरकार पकिस्तान को आतंकवादी नही मानती है इसका प्रमाण है देश के गृहमंत्री का बयान 'की पकिस्तान से अब भी हम आतंकवाद रोकने पर बात करने को तैयार है पकिस्तान दूत सरताज अजीज को सरकार बिरयानी खिला रही है सीमा पर जवान मर रहे है. इस से पूर्व में जिस गुजरात राज्य के विकास के माडल की बात भाजपाई करते है वह विकास न जाने क्यों इन दिनों गुजरात भाजपा सरकार के लिए ही दलित जाती पटेल जातीय विरोध के रूप में चुनोती दे रहा है. गुजरात राज्य में रहने वाले हिन्दू मुस्लिम में स्थाई नफरत के बीज डालकर उन्हें भाजपाइयों ने परवान चढ़ाया है. बहुसंख्यक समाज में अल्पसंख्यक धार्मिक समूह की आक्रामकता को बढा चढ़ाकर स्थाई रूप से बहुसंख्यक समाज में भय का संचार करने के कारण ही भाजपा का शासन गुजरात में आज तक कायम है.

राज्य सरकार के शासन की शक्ति के बल पर अनेक फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष नागरिको को आतंकवादी बताकर मारने का उद्योग गुजरात की भाजपा सरकार ने खूब चलाया है. हर फर्जी मुठभेड़ पर सवाल उठाने वालो को देश धर्म विरोधी करार देने का कार्य आज तक भाजपा शासन में होता है. नागरिक की हत्या करा कर स्वयं को महिमा मंडित हिन्दू समाज में करने का उपक्रम आज कल मध्य प्रदेश सरकार में भी शुरू हो गया है. हर आतंकी हमले में राज्य पुलिस से मुख्यमंत्री की जान लेने के लिये हमलो को प्रचारित करने का उपक्रम गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में खूब हुआ है . इस प्रकार बहुसंख्यक समाज की आक्रामकता को राज्य शक्ति से खूब पाल पोस कर उसे गुजरात राज्य से देश तक फैलाया गया. इस करण नरेंद्र मोदी की सरकार आजतक देश व देश वासियों की समस्याओ के हर मूल में बहुसंख्यक समाज की भावनाओ को ही भड़काने के लिए हवा देती रही है.

देश में सर्जिकल स्ट्राइक को भुनाने वाले भूल गए है की इस देश की कांग्रेसी महिला प्रधान मंत्री ने तो पाकिस्तान के नापाक शरीर का एक हिस्सा ही तन से जुदा कर दिया था . आज के छदम देश प्रेमी कारगिल में अपनी ही भूमि को पकिस्तान से वापस लेने को भी अपनी विजय के रूप में याद करते है, देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने पुत्रो का बलिदान इस देश का किसान मजदुर परिवार ही देता है देश के लिए देश के सैनिको की कीमत कोई नही बता सकता है देशवासी अपने घरो में अपने परिवार के साथ सुख सपनों की नींद तब सोते है जब देश की सरहदों पर हमारे बहादुर जवान माइनस डिग्री में रात आँखों ही में गुजार देते है. जब ये बहादुर सैनिक वन रेक वन पेंशन की मांग करते है तो भाजपा सरकार के जुमले बाज झूठ बोलकर उनको भी मीठे जुमलो की गोली खिला देते है. वैसे देश की रक्षा में शहीद होने वाले हर सिपाही का धर्म भी आजकल भाजपाई देखकर ही उन्हें सम्मान देते है. सेना को भी अपनी धार्मिक राजनीती के दलदल में घसीट कर भाजपाई अपनी ही तरह नंगा कर रहे है. हर शहीद वीर जवान की मोत पर इस प्रकार विलाप करते है जैसे ये किसी संघ की शाखा से निकला वीर भाजपा का सैनिक राष्ट्र की रक्षा में कुर्बान हो गया. देश की समस्याओ के निराकरण में असफल प्रधान मंत्री के द्वारा रातो रात बिना किसी तैयारी के नोट बंद करने का निर्णय ले लिया.

आज देश में काले धन वाले अवैध तरीको से अपना धन सफेद कर रहे है देश का मजदूर किसान बैंको की लाइन में खड़ा अपनी खून पसीने की कमाई लुट जाने से बचाने के लिए अपमान झेल रहा है. मोदी सरकार के फैसले से देश का मेहनतकश मजदूर किसान अपराधी महसूस कर रहा है. अपने जीवन की पूंजी के लुट जाने का गम लाइन में लगे लोगो को दोहरे सदमे लगा रहा है. घर में बीमार बेटे के लिए देखभाल करने वाले लोग बैंक की लाइन में पुलिस की लाठियों से बेहोश हो रहे है तो कही जवान बेटी की शादी कैसे होगी घर में पैसे होने के बाद भी सरकार फैसले से बूढा बाप जवान भाई परिवार सब मातम कर रहे है . घर में शादी की पूर्व वेला पर असहाय बाप की आँखों में बेबसी के आंसू बह रहे है . मोदी सरकार के निर्णय से असहाय मजदूर किसान ससम्मान अपने जीवन को नष्ट करके दुनिया छोड़ कर जा रहे है . मगर इंसानी लाशो पर सियासत करने वालो की सरकार के बिकाऊ पत्रकार जिन्होंने पत्रकारिता को कोठे की तवायफ बना दिया है बिकाऊ जमीर के जिन्दा लाश बने दलाल कह रहे है कि देश के लिए कुर्बानी दो.

मगर यह सवाल भी है की देश के लिए कुर्बानी देने में एक भी भाजपा सरकार का मंत्री विधायक या भांड चारण बनकर सत्ता के पैसो से स्वांग भरकर मनोरंजन करने वाले किसी पत्रकार के घरवाले क्यों बैंक की लाइन में नही दिखते है क्यों किसी राम भक्त राष्ट्रवादी राजे महाराजे मनोहर श्याम दामोदर के घर से दुखो के बोझ से जीवन की डोर तोड़ने वाले की आवाज नही सुनाई देती है. देश में बड़ी बिडम्बना है देश की सीमा पर भी देश के गरीब किसान मजदुर का बेटा ही प्राण न्योछावर कर रहा है बैंको की लाइन में सुबह चार बजे लाइन में लगकर अपनी बारी पर बैंक में कैश समाप्त हो गया सुनकर सदमे से देश का मजदुर किसान ही मर रहा है. मोदी सरकार की नोट बंद करने की मंशा ठीक हो सकती है परन्तु अधकचरे ज्ञान के ज्ञानियों के द्वारा लिया गया तो नोट बंदी का फैसला देश की समस्याओं के निदान में विफल सरकार का हताश कर देवे वाला फैसला बन रहा है. ये फैसला देशवासियों को खासकर अनपढ़ ग्रामीण किसान मजदूरो को हताश कर रहा है. इस फैसले से हुई मोतो की कोई कीमत नही है देशवासियों की जान माल माल का नुकसान फिलहाल इसके फायदे से कही ज्यादा है समय के साथ ये बढ़ता ही जाएगा. ये आंकड़े इस पर स्वयं ही सवाल उठा रहे है. और भाजपाई काला-सफ़ेद करने के कारण नए नोटों के साथ पकडे जा रहे है.


मो. हफीज (व्यूरो चीफ राजस्थान)


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