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जयपुर : हैदर अली के नेतृत्व में यातायात पुलिस के बढ़ते कदम

 Arun Mishra |  2017-03-07T11:27:33+05:30  |  New Delhi

जयपुर : हैदर अली के नेतृत्व में यातायात पुलिस के बढ़ते कदमहैदर अली, यातायात पुलिस उपायुक्त, जयपुर

जयपुर शहर जैसे प्राचीन बसावट वाले शहर के यातायात को व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से चलाना हमेशा ही चुनौती पूर्ण काम रहा है। हमारे देश में बड़ी संख्या में रोजगार की तलाश में ग्रामीण, भारत के निवासी पलायन करके शहरों की और बेहतर भविष्य के सपने लेकर आते हैं। बड़ी आबादी का शहरों की और पलायन करके आने के कारण शहरों में अनियंत्रित बसावट एक बड़ी समस्या बन गयी है।

अनियंत्रित बसावट का शिकार जयपुर भी बना है। शहर का अधिकांश व्यापार आज भी जयपुर की चार दिवारी के भीतर से ही संचालित होता है। जबकि चार दिवारी से कई गुना अधिक आबादी बाहरी जयपुर में निवास करती है। सम्पूर्ण बाहरी आबादी अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए आज भी शहर के चार दिवारी क्षेत्र में ही आना पसंद करती है। शहर के भीतरी भागो में बाहर से आने वाले पर्यटन से जुड़े वाहनों का आना जाना लगा रहता है। बढती आबादी के अनुपात में वाहनों के पंजीकरण व संचालन के कारण भी सडकों पर हमेशा यातायात के संचालन की समस्या बनी रहती है। प्राचीन शहर की सडकों पर यातायात को सुगम एवं सरल रूप से चलाना चुनौती पूर्ण कार्य था। इस चुनौती पूर्ण कार्य को अपने विवेक और बोद्धिक क्षमता से यातायात पुलिस उपायुक्त हैदर अली ने आसान बना दिया है।

देश की राजधानी में ओड़ ईवन का फार्मूला लागू करना पड रहा है मगर राज्य की राजधानी में यातायात को अधिक सुगम और सरल बनाने के लिए यातायात पुलिस के अनेक वैज्ञानिक ढंग से सुधार किये है। शहर में वाहनों की दुर्घटना होने पर शहर के निवासियों का अमूल्य जीवन बचाने के लिए 464 पुलिसकर्मियों एवं ट्रेफिक वार्डन को प्राथमिक उपचार करने का जीवन रक्षा प्रशिक्षण दिलाया गया है। सड़क दुर्घटनाओ के कारणों का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण करके उनका निदान किया गया है। यातायात नियमों की जांच हेतु एलइडी डिस्प्ले बोर्ड लगाना ईन्टर सेप्टर वाहनों का आधुनिकीकरण करना, यातायात नियंत्रण हेतु बीटा मोबाइल वाहन प्रणाली लागू करना एवं यातायात पुलिसकर्मियों का स्वास्थ्य परिक्षण करवाने का काम यातायात पुलिस कर चुकी है। आमजन को यातायात नियमों की जानकारी के लिए यातायात पुलिस वेबसाईट, फेसबुक, ट्विटर पर सोशल एक्टिविटी से भी यातायात पुलिस जुडी है।

यातायात पुलिस चालान का भुगतान ई मित्र के जरिये से करना, बढती दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित सीमा से अधिक तेजगति से वाहन चलाने वालो के विरुद्ध 25 मुकदमे दर्ज करके दुर्घटनाओ पर अंकुश लगाने का काम हो रहा है। वर्ष 2016 में आयोजित राजस्थान ग्लोबल एग्रोटेक मीट, ब्रिक्स महिला सांसद सम्मेलन व काउंटर टेरेरिज्म कोंफ्रेंस के आयोजन में यातायात पुलिस द्वारा आयोजन स्थल के पास खाली पड़े भूखंडो के स्वामियों से बात करके वहां पार्किंग स्थल बनाकर अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। यातायात शिक्षा के लिए यातायात शिक्षा शाखा के द्वारा वर्ष 2016 में 127 स्कुलो में 31018 छात्र-छात्राओ को 3097 प्रशिक्षण केम्प लगाकर शिक्षित किया गया। ट्रेफिक पार्क में 43880 छात्रो को इंदिरा प्रियदर्शनी वाहन के द्वारा फिल्म के माध्यम से 146 स्थानों पर यातायात नियमो की शिक्षा दी। जवाहर लाल नेहरु मार्ग पर इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाकर लाल बत्ती की अवहेलना करने वाले वाहनों का फोटो स्वत: ही सिस्टम में रिकॉर्ड करके सूचना कंट्रोल को तत्काल पहुंचाकर सूचना को प्रोसेस करके चालान करना एवं चालान वाहन स्वामी के पते पर पहुँचाया जा रहा है। यह सिस्टम रात्रि में भी कार्य करता है।

जयपुर शहर में यातायात पॉइंट्स का विस्तार करके यातायात पर सतत निगरानी रखी जा रही है। यातायात पुलिसकर्मियों की नियमित रूप से रोस्टर प्रणाली के तहत बदली की जा रही है। यातायात सुधारों के परिणाम स्वरुप दुर्घटनाओ में कमी लाई जा रही है। वर्ष 2015 में 1894 दुर्घटना के केस दर्ज हुए थे। जिनमे 1661 घायल 476 व्यक्ति मारे गए थे। वर्ष 2016 में 1781 मामले दर्ज हुए है जिनमें 1002 घायल एवं 445 व्यक्ति दुर्घटना में मरे हैं। वर्ष 2016 में मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन करने वालों के 571422 चालान बनाकर वाहन चालको के विरुद्ध कार्यवाही की।

इससे 80493050 रुपयों की प्रशमन राशि वसूली गई जो राजकोष में जमा की जा चुकी है। अपने कार्यालय में जनता की समस्याए सुनने के लिए हर समय हैदर अली तत्पर तैयार मिलते है। छुट्टी के समय भी वे नियमित रूप से कार्यालय में बैठकर जयपुर के यातायात को सुगम व सरलरूप से चलाने के लिए प्रभावी नजर रखते है। यातायात पुलिस को हैदर अली के कार्यकाल में अधिक वैज्ञानिक ढंग से कार्य करने वाला अनुशासित पुलिस बल बनाया जा रहा है। चालान प्रणाली का सम्पूर्ण रूप से डिजिट लाईजेशन करके चालान की सूचनाओं को ऑनलाइन रिकॉर्ड करने का कार्य इनके समय में ही शुरू किया गया है। अक्सर यातायात पुलिस पर चालानों में भृष्टाचार करने के आरोप इन सुधारो को लागु करने के कारण अब कम हो गये है। सभी प्रकार के चलानो का अब राज्य के किसी भी ई मित्र सेंटर पर प्रशमन किया जा सकता है।

बदलते जमाने में आज जयपुर शहर की यातायात पुलिस भी अब पूर्ण रूप से हाईटेक बनकर देश-प्रदेशवासियों की सेवा में निरंतर कार्य करने वाली जागरूक संस्था बन रही है।यातायात पुलिस उपायुक्त हैदर अली व जयपुर पुलिस आयुक्त संजय अग्रवाल को इन सब सुधारो को लागू करने का श्रेय जाता है। हैदर अली की देख रेख में यातायात पुलिस के बढ़ते कदमों से जयपुर की जनता को निरंतर लाभ मिल रहा है इसके लिए हैदर अली व उनकी पुलिस टीम बधाई की पात्र हैं।
मो. हफीज, व्यूरो चीफ, राजस्थान

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