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नोट बंद होने से आम आदमी परेशान कालाबाजारियों की मौज

 Special Coverage News |  20 Nov 2016 4:47 PM GMT  |  New Delhi

नोट बंद होने से आम आदमी परेशान कालाबाजारियों की मौज

जयपुर मो हफीज व्यूरो चीफ राजस्थान

राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में भारत सरकार के द्वारा बाजार में चल रहे हजार, पांच सौ रूपये के नोट बंद होने से आम आदमी की परेशानियाँ कई गुना बढ़ गयी है I देव उठते ही शादियों की भरमार होने जा रही थी I शादियों के सीजन में घर में शादी की तैयारियों के खर्चे के लिए रखे नोट रातोरात बंद होने से लोगो पर मुसीबतों के पहाड़ टूट पड़े है I जवान बेटे की बीमारी के इलाज के लिए घर में रखे चालू नोट एकाएक बंद होने से दवा मिलना दूभर हो गया है I



राजधानी में देर रात शादियों के समारोह में मजदूरी करके मजदूरी के पांच सौ रुपए के नोट लाने वाले मजदुर नोट जेब में होने के बाद भी पैदल घर पहुंचे है I अचानक बाजार में चलने वाली मुद्रा बंद होने के कारण मजदूरो के पास पैसे होने के बाद भी टैक्सी वाले ने उन से पांच सौ रूपये भाडा देने पर भी टैक्सी में नही बैठाया I गाँवो में अपनी जमीन बेचकर घर लाखो रूपये लाने वाले किसान अपनी जमीन जाने व् जमीन की कीमत के रूपये बंद होने से डबल सदमे में आ गए है I भारत सरकार ने बाजार में चलने वाली मुद्रा को अचानक बंद करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया I इस निर्णय से बाजार से काला धन समाप्त करने का उद्देश्य शायद ही पूरा होगा I बाजार में दो नंबर के काले धन से पचपन सत्तर हजार रूपये प्रति दश ग्राम सोना जमकर सोना व्यापारियों ने प्रथम दिन बेचा I राजधानी में चार्टर्ड अकाउंटेंट बने काला बाजारियों ने बैंक के भृष्ठ अफसरों की मदद से एक लाख के 60 हजार में सैकड़ो करोडो रूपये के अग्रिम सौदे कर के अग्रिम चेक बांटे है I



शहर में पेट्रोल पंप मालिक काले धन को सफ़ेद बना रहे है I गली गली कॉलोनियों में एक लाख रूपये के 60 हजार के भाव से सफेद धन देने वालो की चांदी हो गयी है I सरकार के काला धन समाप्त करने की दावो की पोल खुल गई है I हजार, पांच सौ रूपये के नोट बंद होने से हवाला कारोबारी अब राजधानी में ही काला धन सफेद करने के कार्य में लगकर फिर से काला धन बना रहे है I फर्क इतना है कि पहले काला धन राम के पास था वह अब श्याम का हो गया है I कुल मिलाकर सरकार के इस कदम से आम आदमी का जीना दूभर हो गया है I दिहाड़ी के मजदुर अब अपना काम छोड़कर बैंको की कतार में खडा है I राज्य की निरक्षर खेतीहर आबादी के हाथ में पैसो के होने के बाद भी अभाव का जीवन जी रही है I



सरकार के इस निर्णय से बाजार में पहले से विद्यमान तरल पूंजी एक दम से समाप्त हो गई है I बेरोजगारी बढ़ने के साथ भारी संख्या में लोगो का मजदूरी के लिए होने वाला गाँवों से शहरों में पलायन रुक जाएगा I बाजार में सामान है हाथ में पैसे है फिर भी आमजन बेबस बन गया है I लोग सरकार के इस तुगलकी फरमान को जारी करने पर सदमे में है तथा सरकार को भला बुरा भी खूब कह रहे है सरकार के इस निर्णय को लागू करने की शेली विवाद पैदा कर रही है I

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