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मधुसूदनन और चिनम्मा ने एक दूसरे को किया बर्खास्त करने का दावा

 Arun Mishra |  10 Feb 2017 2:10 PM GMT  |  चेन्नई

मधुसूदनन और चिनम्मा ने एक दूसरे को किया बर्खास्त करने का दावा

चेन्नई : तमिलनाडु में सियासी उठापटक और सियासी अनिश्चितताओं के बीच अब इस पर बहस हो रही है कि AIADMK में पहले किसने किसको पार्टी से निष्कासित किया। AIADMK की अंतरिम महासचिव वी. के. शशिकला ने शुक्रवार को पार्टी प्रेसिडियम चेयरमैन (अध्यक्ष मंडल प्रमुख) ई. मधुसूदनन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। इससे कुछ घंटे पहले मधुसूदनन ने ऐलान किया था कि उन्होंने चुनाव आयोग को मेमोरैंडम सौंपकर शशिकला के महासचिव चुने जाने को अमान्य घोषित करने की गुजारिश की है।

मधुसूदनन के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद शशिकला ने बयान जारी कर उनके निष्कासन का ऐलान किया। शशिकला ने अपने बयान में कहा, 'मधुसूदनन ने पार्टी के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है और पार्टी की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटाया जा चुका है।' उनकी जगह पर पूर्व मंत्री और विधायक के.ए. सेनगोट्टैयन को अध्यक्ष मंडल प्रमुख बनाया गया है।

शशिकला ने कार्यकर्ताओं से मधुसूदनन से दूरी बनाने की गुजारिश की है। दूसरी तरफ अपने निष्कासन पर मधुसूदनन ने कहा, 'वह मुझे बर्खास्त नहीं कर सकती क्योंकि मैंने पहले ही उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमारे संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन द्वारा तय किए गए नियमों को तहत पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा ही कोई शख्स पार्टी महासचिव चुना जा सकता है। इसे देखते हुए शशिकला का चुनाव अमान्य है इसलिए वह पार्टी महासचिव नहीं हैं।'

ई. मधुसूदनन एम.जी.आर. और बाद में जयललिता के काफी करीबी थे। पार्टी में उनकी नंबर दो की हैसियत थी। उन्होंने गुरुवार को कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम से मुलाकात कर उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लिया गया फैसला बताया। इसके बाद उन्होंने पन्नीरसेल्वम के साथ राजभवन जाकर राज्यपाल विद्यासागर राव से मुलाकात की। मधुसूदनन उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने जयललिता के निधन के बाद शशिकला से मुलाकात कर उन्हें पार्टी पार्टी महासचिव का पद स्वीकार करने की गुजारिश की थी।

आंखे बंद कर किसी को न बुलाएं राज्यपाल: पीएमके
पट्टाली मक्कल कॉची (पीएमके) ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव को राज्य में सराकर गठन के लिए अन्नाद्रमुक की महासचिव वी. के. शशिकला को आंखें मूंद कर आमंत्रित नहीं करना चाहिए। पीएमके के प्रवक्ता और वकील एन. विनोबा भूपति ने कहा, भारतीय संविधान निमार्ताओं ने अनुच्छेद 164 का प्रावधान किया, ताकि कोई भी क्षमतावान व लोकप्रिय व्यक्ति पहले मंत्री बन सके और फिर छह माह के भीतर चुनाव लड़कर विधानसभा या विधानपरिषद की सदस्यता ले सके। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के आरोप पर भी गौर करना चाहिए, जिनका कहना है कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

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