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ज्योतिष पर काफी भरोसा करती थी जयललिता, अंतिम संस्कार भी पंचांग के हिसाब से

 Special Coverage News |  6 Dec 2016 10:28 AM GMT  |  New Delhi

ज्योतिष पर काफी भरोसा करती थी जयललिता, अंतिम संस्कार भी पंचांग के हिसाब से

चेन्नई: जयललिता भले ही इस दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो चुकी हैं लेकिन वे हमेशा अपने समर्थकों के दिलों में जिंदा रहेंगी। अम्मा अपनी दिलचस्प आदतों की वजह से हमेशा ही मशहूर रही हैं। अम्मा को अपनी एक खास कुर्सी से बेहद लगाव था और वे उसी पर ही बैठती थीं, हरी साड़ी पहनना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। दरअसल अम्मा ज्योतिष विद्या पर बहुत यकीन करती थीं।

कहते हैं कि साल 2011 में उन्होंने मन्नत मांगी थी की जब वह चुनाव जीतकर सत्ता में वापस आएगी तो अपने नाम के अंत में एक और A जोड़ लेंगी। अपने जन्म के ग्रहों और कुंडली को ध्यान में रखते हुए वह 5 और 7 को अपना भाग्यशाली अंक मानती थीं। संयोग देखिए कि उनके निधन की तारीख भी 5 ही रही।

अम्मा का अंतिम संस्कार का समय भी पंचांग के हिसाब से तय किया गया है। मंगलवार दोपहर 3.30 से लेकर अपराह्न के 4.30 तक राहू काल है। इस अवधि में कोई काम नहीं किया जाना चाहिए। यही वजह है कि उनकी अंतिम यात्रा शुरू करने का समय भी 4.30 के बाद ही तय किया गया है।

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