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केन्द्रीय स्वच्छता सचिव ने पेश की अनूठी मिसाल, तेलंगाना के एक गांव में शौचालयों के गड्ढों को किया साफ

 Arun Mishra |  19 Feb 2017 12:17 PM GMT  |  नई दिल्ली

केन्द्रीय स्वच्छता सचिव ने पेश की अनूठी मिसाल, तेलंगाना के एक गांव में शौचालयों के गड्ढों को किया साफ

नई दिल्ली : वैसे तो आपने अधिकारियों को स्वच्छता की बड़ी-बड़ी बातें करते खूब सुना होगा, लेकिन एक अधिकारी ने खुद सफाई करके लोगों को स्वच्छता का महत्व सिखाया है। केन्द्रीय स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर ने खुद शौचालय साफ करके एक ऐसी ही मिसाल पेश की है। शनिवार को सुबह वह 23 राज्यों के करीब दर्जन भर अधिकारियों के साथ लंबी बस यात्रा करके हैदराबाद से तेलंगाना स्थित वारंगल पहुंचे। लोगों में शौचालय से जुड़ी सामाजिक शर्मिंदगी को दूर करने के मकसद से सभी ने गंगादेवीपल्ली गांव में 6 शौचालयों के गड्ढों की सफाई की। इस अभियान का मकसद शौचालय सफाई से जुड़ी सामाजिक शर्मिंदगी को दूर करना था।

परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि अपनी तरह के इस पहले अभियान में हिस्सेदारी करने वाले अधिकारी अपने साथ एक बोतल कंपोस्ट भी लेकर गए थे। वे ग्रामीणों को जैविक कंपोस्ट खाद के महत्व के बारे में बताना चाहते थे। ग्रामीणों को समझाया गया कि कंपोस्ट खाद ना केवल बेहद फायदेमंद होता है, बल्कि इसका कोई नुकसान भी नहीं होता है। शौचालय के गड्ढे साफ करने के बाद अधिकारियों ने कंपोस्ट को हाथ में भी उठाया। उन्होंने बताया कि कंपोस्ट देखने में एकदम गाढ़े भूरे रंग के कॉफी पाउडर जैसा लगता है।

परमेश्वरन अय्यर ने बताया, '2 गड्ढों वाले शौचालय को साफ करना सुरक्षित है और इसका कोई नुकसान भी नहीं होता है। हम लोगों को समझाना चाहते थे कि किस तरह कम लागत में तैयार होने वाले ट्विन-पिट शौचालय ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं।' उन्होंने बताया, 'ये गड्ढे एक साल या 6 महीने तक बंद रहते हैं। उनको खोलकर उन्हें खाली करना और गड्ढे की सफाई करना सामाजिक तौर पर शर्मिंदगी का काम समझा जाता है। लोग खाद में बदल चुके मल की सफाई करने से हिचकते हैं। हम लोगों को समझाना चाहते थे कि यह सफाई की प्रक्रिया ना केवल बेहद आसान है, बल्कि ऐसा करना दिनचर्या के कामों की ही तरह सामान्य भी है। जब एक गड्ढा भर जाने पर आप उसे कुछ महीनों के लिए बंद कर देते हैं, तो उसके अंदर भरा मल साफ कंपोस्ट खाद में बदल जाता है।'

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