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राजपरिवार के प्रदर्शन से सहमी वसुंधरा खोला गया राजमहल पैलेस का गेट

 special coverage |  2016-09-04 10:13:01.0  |  New Delhi

राजपरिवार के प्रदर्शन से सहमी वसुंधरा खोला गया राजमहल पैलेस का गेट

जयपुर : पूर्व राजपरिवार और सरकार के बीच राजमहल पैलेस होटल को लेकर चल रहे विवाद में रविवार को एक और मोड़ अाया। जयपुर डवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) के अधिकारियों ने छुट्टी के दिन राजमहल पैलेस के मेन गेट पर लगी सील खोल दी है |

राजस्थान की जनता के सामने यह किसी पहेली से कम नहीं है की 24 अगस्त को आनन-फानन में राजमहल के दरवाजे क्यों सीज किए गए और रविवार सुबह होने से पहले सरकार ने दरवाजे क्यों खोले दिए. इससे पहले शनिवार रात को मुख्यमंत्री निवास में दिल्ली से भेजे गए बीजेपी के केंद्रीय संगठन महामंत्री सोहदान सिंह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ओर पूर्व राजघराने की राजमाता पद्मभनी देवी के बीच सीधे बातचीत करवाई उसके बाद मुख्यमंत्री निवास में ही राजमाता पद्मभनी देवी से ही बयान दिलाया गया कि वह वसुंधरा राजे से मिलकर संतुष्ट हैं और उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री उनकी शिकायत पर कार्रवाई करेंगी. इसके बाद लोगों ने देखा सुबह राजमहल का दरवाजा खुला हुआ था.

सूत्रों के अनुसार राजमहल के गेट खोलने पर सहमति तो बन गई थी, मगर वसुंधरा राजे राजघराने के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को हटाने की मांग मानने के लिए तैयार नही है. इस बीच राजपूत संगठनों ने जयपुर बंद का एलान कर दिया था.

इस मामले में दो दिन पहले राजपरिवार की ओर से जयपुर में निकाली गई रैली के बाद सरकार की ओर से स्वायत्त शासन मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को बताया था कि कार्रवाई बिल्कुल सही की गई है और जिस गेट पर सील लगाई गई है, वह उसी खसरे में है जो सरकार ने अधिग्रहित कर रखा है। उनका कहना था कि राजपरिवार को कोई गलतफहमी है और जहां तक कार्रवाई की बात है तो दीयाकुमारी हमारी बहन है, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है।

इसके अगले दिन ही राष्ट्रीय संगठन सहमंत्री श्योदान सिंह जयपुर पहुंचे और उन्होने पहले दिन में राजपरिवर की सदस्य और भाजपा विधायक दीयाकुमारी से करीब दो घंटे तक मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमुंत्री वसुंधरा राजे से शाम को करीब पांच घंटे तक बैठक चली। इन बैठकों के बावजूद इस मामले को लेकर असमंजस बना हुआ था और शनिावर को राजपरिवार के साथ जुड़े राजपूत समाज ने ताले नहीं खोलने पर नौ सितंबर को जयपुर और 15 सितंबर को राजस्थान बंद की चेतावनी दे दी थी। इसके बाद देर शाम राजमाता पद्मिनी देवी ने मुख्यमंत्री राजे से मुलाकात की और इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पद्मिनी देवी के नाम से बयान जारी किया गया। इस बयान में सरकार व राजे पर पूरा विश्वास व्यक्त किया गया और कहा गया कि सरकार भी हमारी है और राजे भी हमारी है।

सूत्रों का कहना है कि सौदान सिंह ने दोनों पक्षों को कहा कि इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाए। इससे पार्टी और सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है। भाजपा को उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में चुनाव का सामना करना है। यह चुनाव भाजपा के लिए खासा अहम है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजपूत जैसा अगड़ा वर्ग अभी भाजपा के साथ है। राजस्थान का विवाद उन्हें कहीं भाजपा से अलग नहीं कर दें, इस लिहाज से समस्या का जल्द निपटारा किया जाए। दीया कुमारी को भी सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं देने को कहा गया है। इस मामले में प्रदेश भाजपा किसी भी तरह से कोई बयान नहीं दे रही है।

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