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अरे बेशर्मों क्यों तोड़ दी भारत माँ की प्रतिमा!

 Special Coverage News |  5 Nov 2016 7:51 AM GMT  |  New Delhi

अरे बेशर्मों क्यों तोड़ दी भारत माँ की प्रतिमा!

राधेश्याम द्विवेदी

दीवानी चौराहा स्थित भारत माता की प्रतिमा गुरुवार की रात को खंडित कर दी गई। शुक्रवार सुबह इस खुराफात का पता चलने पर लोग भड़क गए। भाजपाइयों और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त हंगामा कर एमजी रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रतिमा के सामने ही तीन घंटे धरना दिया। दोपहर तक चले बवाल के बाद प्रशासन ने नई प्रतिमा लगवाए जाने का आश्वासन दिया। तब जाकर मामला शांत हुआ। इस दौरान दो सीओ और चार थानों की फोर्स तैनात रही।


एडीएम सिटी धर्मेंद्र सिंह और प्रभारी एसपी सिटी विद्या सागर मिश्र के सामने तीन मांगे रखी गई। खुराफातियों को गिरफ्तार कर एनएसए लगाया जाए। नई प्रतिमा बनवाकर स्थापित कराई जाए। और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अधिकारियों ने तीनों मान लीं। हंगामा प्रदर्शन में भाजपा, आरएसएस, विहिप, हिंदू जागरण मंच, हिंदू युवा वाहिनी, भारत विकास परिषद शामिल रहे।
इनमें उत्तर सीट से विधायक जगन गर्ग, दक्षिण विधायक योगेंद्र उपाध्याय, जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया, महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, पूर्व मंत्री रामबाबू हरित, पूर्व विधायक विधायक केशो मेहरा, जितेंद्र चौहान, हेमंत भोजवानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख अशोक कुलश्रेष्ठ, अश्वनी वशिष्ठ, भानु महाजन, अशोक पिप्पल, संजीव चौबे, नीतेश शिवहरे, गौरव राजावत, मनीष थापक, प्रमेंद्र जैन, दिनेश अगरिया प्रमुख रहे।


दूसरी बार खंडित की गई प्रतिमा
भारत माता की प्रतिमा को दूसरी बार खंडित किया गया। इससे पहले 2012 में खंडित की गई थी। तब भी भारी बवाल हुआ था। लगभग साढ़े तीन महीने बाद नई प्रतिमा लगाई गई थी। इसकी स्थापना वर्ष 2000 में भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज ( वर्तमान में केंद्रीय मंत्री) के हाथों की गई थी। 30 सितंबर 2007 को प्रदेश के तत्कालीन उद्यान मंत्री नारायण सिंह सुमन और तत्कालीन सांसद राजबब्बर ने भारत माता पार्क एवं छतरी का लोकार्पण किया था।


चार नवंबर को ही हुआ था अनावरण
प्रतिमा को चार नवंबर को खंडित किया गया है। इसका अनावरण भी चार नवंबर को ही 2012 में किया गया था। अनावरण के लिए भाजपा नेता राजनाथ सिंह ( वर्तमान में केंद्रीय गृहमंत्री) आए थे। तब प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि प्रतिमा के आस पास पुलिस तैनात की जाएगी। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। लेकिन बाद में दोनों में से एक भी काम नहीं किया गया।


लोगों ने जाम किया रोड
आगरा में भारत माता की प्रतिमा टूटने पर बवाल खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आगरा के दीवानी चौक स्थित प्रतिमा को गुरुवार रात कुछ असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया।प्रतिमा की हालत को देखने के बाद शुक्रवार सुबह हिंदूवादी संगठनों में रोष फैल गया। हालात तब बिगड़े जब हिंदूवादियों ने शहर के एमजी रोड को जाम कर दिया और जमकर हंगामा किया।लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखी गई। आगरा दक्षिण से भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।उन्होंने प्रतिमा तोड़ने वाले आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। हालांकि, अभी तक मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस जांच में जुट गई है।बताते चलें कि प्रतिमा का उद्घाटन 2012 में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किया था।

शहर में दीवानी क्रासिंग पर लगी भारत माता की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया। यह घटना शहर में आग की तरह फैल गई। सूचना पाते ही हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता और दो भाजपा विधायक अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए। भारत माता की खंडित प्रतिमा देख लोगों ने हंगामा खड़ा कर दिया। लोगों का गुस्सा देख पुलिस के हाथपांव फूल गए।

शहर में दीवानी क्रासिंग पर लगी भारत माता की प्रतिमा को रात में असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया। सुबह आने जाने वालों ने देखा तो वे भौंचक्के रह गए। यह सूचना शहर में आग की तरह फैल गई। सूचना पाते ही बड़ी संख्या में हिन्दूवादी संगठन बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी व कार्यकता पहुंच गए। भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय और जगन प्रसाद गर्ग बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पहुंच गए। खंडित प्रतिमा देख लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर बड़ी संख्या में हरिपर्वत पुलिस पहुंच गई। हिन्दूवादी संगठन असामाजिक तत्वों को तलाश कार्रवाई की मांग करने लगे। वहीं चौराहा पर हंगामा की वजह से एमजी रोड पर दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिमा को शीघ्र सही कराने और मूर्ति खंडित करने वालों को गिरफ्तार कर कार्रवाई पर जाम को खोला गया।

17 जून 2000 में स्थापित हुई थी प्रतिमा
दीवानी क्रासिंग पर यह प्रतिमा 17 जून 2000 में स्थापित हुई थी, जिसका उदघाटन मौजूदा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया था।

2012 में भी असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया था
दीवानी क्रासिंग पर लगी भारत माता की प्रतिमा को 2012 में भी असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया था। जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया था। हिन्दूवादी संगठनों ने मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में काफी बवाल किया था। भारत विकास परिषद ने इसे जयपुर से बनवाकर दोबारा लगवाया था। उस दौरान पुलिस प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरा लगाने और दो सिपाही तैनात करने को कहा था। सीसीटीवी कैमरे तो नहीं लगे। दो सिपाही भी चार महीना ड्यूटी करने के बाद हटा दिए गए।



भाजपाइयों ने प्रतिमा स्थल पर धरना देकर की दोषियों पर कार्रवाई, अष्ट धातु की प्रतिमा लगाने की मांग-हिंदूवादी संगठनों ने भी की घटना की निंदा, कहा दोषियों को गिरफ्तार कर लगाई जाए रासुकाआगरा, प्रमुख संवाददातादीवानी चौराहा स्थित भारत माता की प्रतिमा एक बार फिर किसी सिरफिरे की करतूत के कारण खंडित हो गई। इस घटनाक्रम से शहरवासियों में उबाल है। घटना की जानकारी होते ही हिंदूवादी संगठन और भाजपाई मौके पर पहुंच गए। भाजपाई धरने पर बैठ गए। पीतल की प्रतिमा लगाने और दोषियों पर रासुका लगाने की मांग की गई है। तमाम संगठनों ने घटना की निंदा की है।महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे के नेतृत्व में भाजपाई दीवानी स्थिति प्रतिमा स्थल पर पहुंचे। वहां धरने पर बैठ गए। नारेबाजी करने लगे। भाजपाइयों ने कहा कि इस कृत्य को करने वालों को तत्काल पकड़ा जाए। उन पर देशद्रोह का मुकदमा चले। प्रशासन अष्ट धातु या पीतल की प्रतिमा लगवाए। पार्क में उचित प्रकाश व्यवस्था हो और सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए जाएं। प्रदर्शनकारियों में संघ के ब्रज प्रांत संपर्क प्रमुख अशोक कुलश्रेष्ठ, जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया, विधायक द्वय योगेंद्र उपाध्याय व जगन प्रसाद गर्ग, केशो मेहरा, भानू महाजन, अश्वनी वशिष्ठ, हेमंत भोजवानी, राजकुमार गुप्ता, अशोक पिप्पल, सोनू पंडित, संजीव चौबे, बॉबी वर्मा, दिनेश अगरिया आदि शामिल थे। सांसद प्रतिनिधि प्रमोद गुप्ता व प्रवक्ता शरद चौहान ने प्रतिमा खंडित करने वालों पर रासुका लगाने की मांग की है।भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक राना ने कहा है कि एक ओर मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए सेना का मनोबल और देशवासियों का सिर गर्व से उठाया है। वहीं सपा शासन में भारत माता तक सुरक्षित नहीं है। हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों ने भी प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर घटना पर आक्रोश जताया। मंच के प्रदेश महामंत्री अविनाश राना, युवा वाहिनी प्रदेशाध्यक्ष अज्जू चौहान और धर्म जागरण मंच के नंद किशोर वाल्मीकि ने कहा कि घटना सोची-समझी साजिश के तहत की गई है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। रोष जताने वालों में जितेंद्र प्रताप सिंह, राजेश वर्मा, रविशंकर शर्मा, राजन गुप्ता, देव शर्मा, कृष्णा पाराशर, मनोज चौहान, प्रिंस अग्रवाल, अमित रावत आदि शामिल थे।आप ने की रासुका की मांगआम आदमी पार्टी के वीर बहादुर सिंह धाकरे एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई बैठक में घटना पर रोष व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि आगरा प्रेम व सौहार्द की नगरी है। मगर ऐसी घटनाओं के जरिए कुछ लोग माहौल खराब करना चाहते हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित कर रासुका लगाई जाए। राजेश बघेल, जयकिशन गुप्ता, अमित निषाद, रजत निषाद, उपेंद्र जाटव, रवि यादव, खजान सिंह, मनमोहन यादव, ओमप्रकाश शर्मा, बृजेश आदि मौजूद रहे।


अबुल मुज़फ्फर मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर (४ नवम्बर १६१८ – ३ मार्च १७०७) जिसे आमतौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर (स्वंय को दिया हुआ शाही नाम जिसका अर्थ होता है विश्व विजेता) के नाम से जाना जाता था भारत पर राज्य करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन १६५८ से लेकर १७०७ में उसकी मृत्यु होने तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी से भी ज्यादा समय तक राज्य किया। वो अकबर के बाद सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था। अपने जीवनकाल में उसने दक्षिणी भारत में मुग़ल साम्राज्य का विस्तार करने का भरसक प्रयास किया पर उसकी मृत्यु के पश्चात मुग़ल साम्राज्यसिकुड़ने लगा।


औरंगज़ेब के शासन में मुग़ल साम्राज्य अपने विस्तार के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा। वो अपने समय का शायद सबसे धनी और शातिशाली व्यक्ति था जिसने अपने जीवनकाल में दक्षिण भारत में प्राप्त विजयों के जरिये मुग़ल साम्राज्य को साढ़े बारह लाख वर्ग मील में फैलाया और १५ करोड़ लोगों पर शासन किया जो की दुनिया की आबादी का १/४ था।


औरंगज़ेब ने पूरे साम्राज्य पर फतवा-ए-आलमगीरी (शरियत या इस्लामी कानून पर आधारित) लागू किया और कुछ समय के लिए गैर-मुस्लिमो पर अतिरिक्त कर भी लगाया। गैर-मुसलमान जनता पर शरियत लागू करने वाला वो पहला मुसलमान शासक था। उसने अनेक हिन्दू धार्मिक स्थलों को नष्ट किया और गुरु तेग बहादुर की हत्या करवा दी।

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