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मुस्लिम युवा आंखें खोलिए, देखिए रजिजुद्दीन खान दानिश आपको पुकार रहे हैं..

 Special Coverage News |  7 Nov 2016 6:29 AM GMT  |  New Delhi

मुस्लिम युवा आंखें खोलिए, देखिए रजिजुद्दीन खान दानिश आपको पुकार रहे हैं..

संदीप देव

मुख्यधारा से लेकर सोशल मीडिया तक क्या किसी मुस्लिम को सरहद पर शहीद हुए बीएसएफ जवान रजिजुद्दीन खान दानिश के लिए एक लाइन भी लिखते देखा है? जो भोपाल एनकाउंटर में मारे गए सिम्मी के सदस्यों के समर्थन में लगातार लिख रहे हैं, जो एक लफ्फाज वामपंथी पत्रकार रवीश कुमार के लिए 'आई सपोर्ट रवीश कुमार' पेज से लेकर 'साला कह कर लेंगे' जैसे शब्दों के तीर चला रहे हैं, क्या उन मुस्लिम युवाओं को पाकिस्तान की गोली से शहीद हुए रजिजुद्दीन खान दानिश की शहादत पर कोई टवीट करते देखा है?


रजिजुद्दीन खान दानिश को मुस्लिम सैनिक इसलिए लिख रहा हूं, कि मुसलमान आतंकवादियों के समर्थन में तो बहुत लोग खड़े हैं, लेकिन मुस्लिम सैनिक के समर्थन में एक कैंडल तक कहीं नहीं जल रहा है! इसलिए मुस्लिम लिखना और अधिक जरूरी है.


यह बहुत पुरानी नहीं, कल 4 नवंबर के शाम की ही घटना है, जब यह युवा जवान दानिश शहीद हुए! और यह जवान आजमगढ़ से है, जिसे कांग्रेस राज में आतंकवादियों के गढ़ के रूप में पेंट किया गया था, देखिए उसी कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी के झूठ के समर्थन में नारा-पीटते सोशल मीडिया पर कई मुस्लिम युवा मुझे दिखे हैं! लेकिन जिसकी वजह से आजमगढ़ का कलंक मिट सकता था, उस पर मुसलमानों के अंदर ही खामोशी, दिल दहलाने वाली है.


यही नहीं, उस लफ्फाज रवीश कुमार, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष, और उसके वामपंथी साथियों की तथाकथित पत्रकारीय निष्पक्षता भी देख लीजिए, आतंकी याकूब मेनन की खबर के लिए रात भर जागे थे, अफजल गुरु के समर्थकों के लिए जेएनूय में डेरा डाल दिया था, लेकिन रजिजुद्दीन खान दानिश के लिए एक शो तक इनके पास नहीं है। यह वो लोग हैं जो मुस्लिम युवाओं को गुमराह करते हैं! वामपंथियों ने पाकिस्तान के समर्थन में प्रस्ताव पास किया था, इस आलोक में देखेंगे तो ही वामपंथियों की इस नीच हरकत को समझ पाएंगे.



आतंकी बुरहान वानी के लिए तो शोर खूब मचा, लेकिन उसी घाटी से निकले आईएएस वानी के लिए इस जमात में ही किसी तरह का उत्साह नहीं दिखा! यह ट्रेंड है! सोशल मीडिया इसके आकलन का सबसे निष्पक्ष प्लेटफॉर्म है! इसे ठीक से देखिए! देखिए कि रवीश की लफ्फाजी पर 'वाह-वाह' की ताल सबसे अधिक मुस्लिम युवा जमात से ही आ रही है.



कहीं न कहीं, मुसलमानों के अंदर अपने 'हीरो' को लेकर भ्रम की स्थिति है! जो देश के साथ है, वह इनका नायक नहीं है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में है, वह चाहे आतंकवादी ही क्यों न हो...वह इनका नायक है! याकूब मेनन से लेकर बुरहान तक के जनाजे में उमड़ी भीड़ भी तो इसी की गवाही देती है.


मुसलमान युवाओं के भ्रम को दूर करने के लिए मुस्लिम बुद्धिजीवी भी तो नहीं दिख रहे? दिखें भी कैसे? वह भी तो मोदी विरोध में देश विरोध की सीमा लांघने के लिए दौड़ लगा रहे हैं? याद रखिए, मोदी आज प्रधानमंत्री हैं, कल नहीं... लेकिन यह देश तब भी था जब आप नहीं थे और तब भी रहेगा जब आप नहीं रहेंगे. आंखें खोलिए, देखिए रजिजुद्दीन खान दानिश आपको पुकार रहा है.

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