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रिहाई मंच ने नोटबंदी को बताया आर्थिक आतंकवाद, मृतकों को शहीद बताकर दी श्रद्धांजलि

 Special Coverage News |  20 Nov 2016 3:12 AM GMT  |  New Delhi

रिहाई मंच ने नोटबंदी को बताया आर्थिक आतंकवाद, मृतकों को शहीद बताकर दी श्रद्धांजलि

बलियाा: रिहाई मंच ने मोदी सरकार द्वारा लागू नोटबंदी को आर्थिक आतंकवाद बताते हुए नोट बदलवाने के दौरान मरे लोगों को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।


बलिया रेलवे स्टशन परिसर पर नोटबंदी के नाम पर फैलाए गए अािर्थक आतंकवाद के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने जुटी हजारों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए रिहाई मंच के जिला अध्यक्ष डाॅ अहमद कमाल ने कहा कि मोदी ने 2014 में कहा था कि उन्होंने अगर 100 दिन के अंदर विदेशों में जमा काला धन लाकर कर हर आदमी के खाते में 15 लाख रूपया नहीं डाल दिया तो उन्हें जनता फंासी पर चढ़ा दे। लेकिन मोदी ने 2016 के जाते-जाते आम लोगों की ही गाढ़ी कमाई को काला धन बताकर लोगों को बैंकों के आगे खड़ा कर दिया है। जिसमें अब तक तकरीबन 60 लोग मर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मोदी ने इस फैसले से अपने को भारत का सबसे धुर्त प्रधानमंत्री साबित कर के इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया है।


रिहाई मंच नेता मंगल राम ने कहा कि अभी तक मोदी और उनके मंत्री जनता को यह नहीं समझा पाए हैं कि पांच सौ और हजार रूपए के बंद होने और बाजार में 2000 का नोट आ जाने से काला धन पर कैसे रोक लग जाएगा। उन्होंने कहा कि जगह-जगह भाजपा कार्यकर्ताओं की आम जनता द्वारा की गई पिटाई साबित करने के लिए काफी है कि अगर आज चुनाव हो जाए तो भाजपा की एक चैथाई सीटें भी नहीं बचेंगी। मंगल राम ने कहा कि संघ परिवार और उससे जुड़े दलित विरोधी सवर्ण और सामंती तत्व आम जनता में यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे कष्मीर और पूरे देश में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर रोक ल्रग जाएगी। सवर्ण सामंती तत्व नोटबंदी को मुसलमानों के खिलाफ बताकर आम साम्प्रदायिक हिंदुओं के बीच इसे जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि मोदी के नाम पर आए दलित विरोधी मनुवादी राज को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण फैली अव्यवस्था के सबसे ज्यादा शिकार मजदूर, रिक्शा चालक और छोटे किसान हुए हैं जिनमें सबसे ज्यादा दलित समाज के लोग आते हैं।



रिहाई मंच के जिला महासचिव बलवंत यादव ने कहा कि भाजपा नेता कह रहे हैं कि जब जवान सीमा पर खड़ा हो सकते हैं तो फिर देष हित में जनता लाइन में क्यांे नहीं लग सकती। उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार लाइन में लगी जनता की तुलना सेना के जवानों से कर रही है तो उसे नोट बदलवाने के दौरान मरे लोगों को षहीद का दर्जा देते हुए उन्हंे मिलने वाली सभी सुविधाएं भी मृतक परिवार को देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे तमाम परिवारों को पेट्रोल पम्प, सरकारी नौकरी, रोडवेज बसों और रेल यात्रा मुफ्त करने का अधिकार के साथ ही पंेषन भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि मोदी और संघ गिरोह के लोग जनता को यह नहीं बता रहे हैं कि भाजपा के राज्य सभा सांसद विजय माल्या समेत 63 धनपषुओं का 7000 करोड़ रूपया माफ कर देने से देष को कौन सा फायदा होने जा रहा है या इससे पाकिस्तान को कौन सा नुकसान होने जा रहा है।


वहीं गौड़ समुदाय के लोकप्रिय नेता और इंडियन पीपुल्स सर्विस के अध्यक्ष अरविंद गांेडवाना ने कहा कि मोदी ने कहा कि पिछले तीन साल में मोदी की अािर्थक नीतियों से सिर्फ उनके करीबी मित्रों विजय माल्या, अम्बानी, अडानी और रामदेव के ही अच्छे दिन आए हैं। मोदी राज में लूट का यह आलम है कि लोग मनमोहन सिंह और कांग्रेस के कारपोरेट परस्त सरकार को भी इससे बेहतर मानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का पूरा ड्रामा दिवालिया हो चुके बैंकों को बचाने के लिए किया गया ताकि उनके पास इतना पैसा हो सके कि वे मोदी के दोस्तों को वापस न मिलने वाला कर्जा दे सकें। श्रद्धांजलि सभा का संचालन रिहाई मंच बलिया के सचिव मंजूर आलम ने किया। इस दौरान अजय कुमार, अली अवसत, रोशन परवेज, अभय राम, सुरेष शाह, लक्ष्मण यादव, रंजीत गांेड, रोषन अली आदि ने भी अपनी बात रखी।

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