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दो चार मुस्लिमों को मारने से कुछ नहीं होगा, दम है तो खुले मैदान में आओ मोदी - तौकीर रजा

 शिव कुमार मिश्र |  4 Nov 2016 11:44 AM GMT  |  बरेली

दो चार मुस्लिमों को मारने से कुछ नहीं होगा, दम है तो खुले मैदान में आओ मोदी - तौकीर रजा

बरेली: भोपाल में सिमी कार्यकर्ताओं के एनकाउंटर को लेकर इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के मुखिया तौकीर रजा ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोल दिया. तौकीर रजा ने कहा है कि यूपी का चुनाव जीतने के लिए मुसलमान नौजवानों के खून की सख्त जरूरत है तो दो-चार को मारना छोड़िए खुलकर मैदान में आइए.


मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि यूपी विधानसभा जीतने के लिए बीजेपी और आरएसएस ने बहुतजहरीली प्लानिंग बनाई है. उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी जी समुद्र किनारे कोई स्थान चुन लीजिए सारे मुसलमान वही एकत्र हो जाएंगे. आप आरएसएस के साथ आकर खून की होली खेलने का अपना अरमान पूरा कर लीजिए. लेकिन रोज-रोज मुठभेड़ व आतंकवाद के नाम पर खून खराबा बंद कीजिए.


उन्होंने ये भी कहा कि एक बार नरेंद्र मोदी आरएसएस और अपनी पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठ कर देश के प्रधानमंत्री की हैसियत से विचार कीजिए. हो सकता है आपकी संवेदना जाग जाए और फर्जी मुठभेड़ के नाम पर खून खराबा रुक जाए.


तौकीर रजा ने भोपाल एनकाउंटर को फर्जी बताया. गुरुवार को अपने निवास स्थान पर पत्रकारों से बात करते हुए मौलाना तौकीर ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर नौजवानों को जेल में डाला जा रहा है या फिर फर्जी एनकाउंटर में मारा जा रहा है. यह सबसे बड़ा आतंकवाद है और ये आतंकवाद ऐसा है जो प्लानिंग के साथ एक समुदाय विशेष की नस्लकुशी के लिए किया जा रहा है. तौकीर रजा ने भोपाल एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए कहा कि इन बंदियों में कई ऐसे थे जिन्होंने खुद ही सरेंडर किया था और सभी अंडर ट्रायल थे. सम्भव था कि कुछ दिनों में वो बाइज्जत बरी हो जाते.


मौलाना तौकीर रजा ने सवाल उठाते हुए कहा कि थोड़ी देर को यह मान लिया जाए कि एनकाउंटर की कहानी सच है तो क्या यह सम्भव है कि जिन्हें पुलिस खूंखार आतंकवादी बना कर पेश कर रही है वो इतने नासमझ कैसे हो गए कि जेल से फरार होने के बाद सभी एक स्थान पर कैसे पहुंच गए. जबकि जेल से भागने वाला सुरक्षित ठिकाना खोजता है. इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जेल से फरार होने के बाद उनके पास हथियार कहां से आए, किसने उपलब्ध कराए. साथ ही वो जीन्स और शर्ट में मिले क्या यह सम्भव है कि जेल से भागने वाला सुरक्षित स्थान की तलाश के पहले अपने सूट-बूट की व्यवस्था कर सकता है. और फिर सभी शहर में सुरक्षित स्थान तलाशने की जगह सीधे जंगल में भाग गये. भागने के चार या पांच घंटे में पूरी कर्यवाही को अंजाम देना किसके गले उतरेगा. मोदी जी अपने अन्दर झांको आपको खुद जबाब मिल जायेगा. यूपी फतह ऐसे नहीं हो सकती है.

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