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मुलायम और रामगोपाल की सपा में क्या इतना बड़ा फर्क - अमित जानी

 special coverage news |  2017-02-17T08:36:26+05:30  |  इटावा

मुलायम और रामगोपाल की सपा में क्या इतना बड़ा फर्क - अमित जानी

आज सुबह अखबार पढ़ा और ये देख के आश्चर्य हुआ की रामगोपाल जी ने सट्टा बाजार के आधार पर ये कहा की सपा जीत रही है। ये एक बहुत महत्वपूर्ण बात है ये समझने के लिए की मुलायम और रामगोपाल की सपा में क्या फर्क है। मुझे याद आता है की जब 1993 के आस पास मुलायम सिंह यादव से एक पत्रकार ने ये पुछा की आप कितने सीटें जीत रहे हैं।


तो मुलायम ने कुछ यूं उत्तर दिया, " हमें सीटें नहीं पता कित्ती जीत रहे, हमसे जे पूछ लेउ की कौन सी सीटें हम जीत रहे। हम तुम्हे एक -एक गांव से कित्ते वोट मिलिहैं बताय सकत हैं" । जब इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पत्रकार ने कुछ सीटों पर विस्तार से बात की - तो मुलायम ने उस विधानसभा के तकरीबन 200 गांव का नाम , उनके प्रधान सहित ले डाला और ये बताया की किस गांव से उन्हें कितने वोट मिलेंगे। उस पत्रकार ने तकरीबन 10 सीटों के बारें में बहुत विस्तार से बात की, बाकि सीटों पर भी उसने मुलायम से सीधा पूछ लिया की जीतेंगे या हारेंगे।


मुलायम ने बोला था कि हम तकरीबन 140 सीटें लाएंगे, आप 20, 30 इसमें से घटा देना - नेता हैं थोड़ा तो बड़ा के बोलेंगे। पत्रकार ने जब मुलायम से कहा की सटटा बाजार तो कुछ और ही कह रहा है , तो मुलायम का जवाब था, " हम किसान हैं, व्यापारी नहीं- ज़मीन को ज्यादा अच्छे से समझते हैं बाजार को नहीं "।जब चुनाव के रिजल्ट आये तो पत्रकार मुरीद हो गया मुलायम सिंह का, उनकी पार्टी ने 110 सीटें जीती थी। ज्यादा आश्चर्यजनक बात ये थी की उन 10 सीटों पर जिस पर पत्रकार ने विस्तार से चर्चा की थी - मुलायम सिंह तकरीबन उतने ही वोटों से जीते थे, जितना उन्होंने कहा था।


वो पत्रकार सालों इस कहानी हर ओपिनियन पोल वाले को सुनाता रहा। ताउम्र कायल रहा मुलायम की उस क़ाबिलियत के वो किस तरह अपने हर कार्यकर्ता और पूरे उत्तर प्रदेश के हर गांव से इस क़दर संपर्क बनाये हैं। ये थे मुलायम सिंह यादव जो चुनाव के बाद ये बता देते थे की समाजवादी पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी- आधार होता था उनका ज़मीन से जुड़ाव। और एक रामगोपाल जी हैं जो कहते हैं की सट्टा बाजार कह रहा है सपा जीतेगी। ये दिन दुखद हैं उन समाजवादियों के लिए जिनको लगता था की समाजवाद की जड़ें समाज में होनी चाहिए, अवैध बाजार में नहीं। जस चेला तस गुरु।

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