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हिंदुत्व के महानायक है 'आज़म खान!

 शिव कुमार मिश्र |  27 Oct 2016 5:26 AM GMT  |  लखनऊ

हिंदुत्व के महानायक है आज़म खान!

आसमौहम्मद कैफ संपादक

सप्ताह पहले छोटे भाई जैसे समीर कौशिक सावरकर से मुलाक़ात हुई थी । समीर कौशिक आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता है और नागपुर मे कम समय मे उन्होंने अपनी एक पहचान बनाई है । समीर बता रहे थे कि आज़म खान हिंदुत्व के महानायक है क्योंकि उन्होंने हिन्दू समाज को संगठित होने मे मदद की है । क्रिया की प्रतिक्रिया नियम के तहत ऐसा हुआ है।


जैसे याद कीजिए एक समय कैराना लोकसभा के जलालाबाद मे एक सभा मे जहां से सर्वधर्म एकता के प्रतीक नेता मनव्वर हसन के बेटे नाहिद हसन लोकसभा के प्रत्याशी थे आज़म खान साहब ने अपने खास अंदाज़ मे 'एकतरफा ' तक़रीर कर दी। कारगिल वाला चर्चित बयान दिया। इससे पहले 50 हजार से जयादा हिन्दू वोट नाहिद को उनके पिता की छवि के चलते वोट सपोर्ट कर रही थी ,यह आखरी चुनावी महत्वपूर्ण सभा भी थी। दिल पर लगी तो हिन्दू समाज का बहुत बड़ा हिस्सा नाहिद से टूट गया।


आपको जानकर हैरानी होगी कि 2012 के विधानसभा चुनाव मे और 2014 के लोकसभा चुनाव मे भी ज्यादातर समाजवादी पार्टी के 'लड़ाको' ने अपने चुनाव क्षेत्र मे आज़म खान साहब की मांग ही नही की और कई ने तो पार्टी कार्यालय को मना ही कर दिया खासतौर पर मुस्लिम कैंडिडेट उन्हें बुलाने से बच रहे थे। इसके उलट आज़म खान साहब अपनी उलजुलूल हरकतों से कट्टरपंथी हिन्दू संगठनो को उनकी आड़ लेकर मुसलमानो को निशाना बनाने का मौका दे देते है।


हाल ही मे यादव परिवार के आपसी तकराव के बीच उनका यह बयान आया है जिसमे मुसलमानो को थाली का बेंगन न होने की बात कही गयी है यह वही बात है जैसे इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुसलमानो को वोटो की मंडी न समझने की बात कह चुके है। आज़म ने लिखा है कि 'भाजपा को हराने के लिए ' मुसलमान एकजुट होकर वोट करेगा । इस एक बात के बहुत मतलब हो गए है कि आज़म खान जो कह रहे है क्या वही सोच रहे है !दरअसल ऐसा नही है क्योंकि मुसलमान बिल्कुल बेचैन नही है उसके सामने दिल्ली और बिहार के चुनाव की ताज़ी मिसाल है।


दरअसल बेचैनी आज़म खान के अंदर है ।वो यह बर्दास्त नही कर सकते की समाजवादी पार्टी मे उनसे ज्यादा किसी और मुसलमान को प्रचार मिले ,इस विवाद मे आशु मालिक प्रचार पा गए है अभी तक यह ही 'हवा ' थी कि मुस्लिम नेताओ मे आज़म मुलायम सिंह यादव के सबसे क़रीबी है अब अचानक से आशु मालिक को उनका बेटा जैसे प्रचार मिल रहा है । मीडिया मे इस विवाद मे एक ही मुस्लिम चेहरा दिख रहा है वो आशु मालिक का है ,आज़म जबरदस्ती घुसना चाह रहे है । समाजवादी पार्टी इस समय मुश्किल हालात से जूझ रही है ऐसे समय यह चिट्ठी मौका का फायदा उठाने जैसी भी है ।राजनीति मे इसे ब्लैकमेलिंग कहते है। आज़म समाजवादी पार्टी के तमाम मुस्लिम नेताओ के अंतरविरोद्ध के लिए जाने जाते है । यह चिट्ठी लिखने का उनकी टाइमिंग शातिराना चाल से भरी है ।

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