Home > Archived > अनबन के बीच चाचा भतीजे का इम्तहान शुरू!

अनबन के बीच चाचा भतीजे का इम्तहान शुरू!

 शिव कुमार मिश्र |  2 Nov 2016 5:21 AM GMT  |  लखनऊ

अनबन के बीच चाचा भतीजे का इम्तहान शुरू!

प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र यादव

जब जानबूझ कर दो शक्तिमान एवं बुद्धिमान शक्ति परीक्षण करते हैं, तो परिणाम बहुत भयानक होता है, जिसकी कल्पना भी आम जनमानस नही कर पाता है. इस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है. सरकार और संगठन आमने-सामने हैं. सरकार का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं संगठन का नेतृत्व प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवपाल यादव कर रहे हैं. एक जोश से काम ले रहा है, तो दूसरा सारे फैसले पूरे होशो-हवास में ले रहा है. एक तरफ युवाओं का हुजूम है, जो कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखता है. तो दूसरी तरफ अनुभव है, जो इस प्रकार के जोश को कैसे कुंद करना है, इसकी समझ रखता है. दोनों ओर इन धुरंधरों को राय देने वाले लोग है. दोनों तरफ इन धुरंधरों को बढ़-चढ़ कर उनकी शक्ति बताने वाले लोग हैं. दोनों तरफ कुछ ऐसे लोग घुसे हैं, जो इधर की बात उधर एवं उधर की बात इधर करने वाले हैं. इससे दोनों को अपनी शक्ति का सही भान नही हो पा रहा है.

इसे भी पढ़ें शिवपाल ने दिया अखिलेश की रथ यात्रा को झटका

समाजवादी पार्टी के दोनों तरफ के समर्थकों से बात करने पर यह पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ जो लोग खड़े हैं, उन्होंने जनता के बीच में अपनी पहचान खो दी है. अपने-अपने क्षेत्र की जनता को इतना सताया है कि वह उन्हें साथ खड़े होने या उनका साथ देने को बिलकुल तैयार नही है. दूसरी तरफ शिवपाल से जुड़े हुए है, उनकी एक बौद्धिक पहचान है. उनके पास जनता की नब्ज समझने की शक्ति है. कब, किस तरह जनता को नियंत्रित करना है, उन्हें इसका तरीका ज्ञात है. यदि अखिलेश समर्थकों की ही बात करें तो शिवपाल के कुछ युवा नेताओं के पास कम युवा शक्ति नही है. वह 4 नवंबर को शक्ति परीक्षण के दौरान दिखेगी. यह भी देखने में आया है कि प्रो. राम गोपाल में निष्ठां रखने वाले कुछ बुद्धिजीवी अखिलेश के भी साथ हैं, जो प्रो. राम गोपाल को पार्टी एवं पद से हटाये जाने से क्षुब्ध हैं, और सहानुभूति पूर्वक अखिलेश के पक्ष में दिखाई देते हैं. लेकिन ऐसे प्रो. राम गोपाल समर्थकों की अखिलेश के पास तक फुंह ही नही है.


इसे भी पढ़ें CM अखिलेश ने लखनऊ में समाजवादी ऐम्बुलेंस की सुविधा लॉन्च की

3 नवम्बर को अखिलेश रथ यात्रा के माध्यम से अपना शक्ति परीक्षण कर रहे हैं, तो 4 नवम्बर को शिवपाल युवाओं के माध्यम से लखनऊ में शक्ति परीक्षण कर रहे हैं. वे सपा मुखिया मुलायम सिंह के उस कथन को सही साबित करने का प्रयास कर रहे हैं कि शिवपाल के पास अखिलेश से कम युवा नही हैं. खैर यह दोनों नेताओं की अपनी-अपनी समझ है. मेरा तो इतना ही कहना है कि ऐसी स्थिति जब-जब उत्पन्न हुई है, तो उसके पीछे जो कारण नजर आये हैं, उसके अनुसार एक तो दोनों को एक-दूसरे की शक्ति का सही आकलन नही होता है, दूसरे उनके इस प्रकार के शक्ति परीक्षण से क्या नुक्सान होगा, इसका भी सही आकलन नही होता है. जहाँ एक और अखिलेश को अपने विकास कार्यों एवं अपनी छवि का अहंकार हो गया है, किन्तु एक बात तय है, कि चुनाव सिर्फ विकास के बल पर ही नही जीते जाते. हाँ, लोगों की सहानुभूति जीती जा सकती है. सहानुभूति को वोट में बदलने के लिए जो उपाय किये जाते हैं, उसकी क्षमता इस दल में या तो मुलायम सिंह के पास है या शिवपाल के पास है.

इसे भी पढ़ें सीएम अखिलेश के सपनों का विकास रथ तैयार, क्या है इसकी खूबियाँ?

जिस तरह से सांप्रदायिक शक्तियों से लड़ने वाले सभी छोटे-बड़े दलों को एक पटल पर लाने का काम 5 नवम्बर को 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के निमत्रण पत्र बांटने के बहाने शिवपाल द्वारा किया जा रहा है, उससे एक बात तो तय है कि शिवपाल की नजर एक ऐसे महागठबंधन की है, जो उनके प्रति लायल हो. इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की टिप्पड़ी या बयां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नही दिया गया है. इसका सीधा फायदा शिवपाल को मिलने की गुंजाइश है. दूसरे शिवपाल जहाँ भी जा रहे हैं, अपने बेटे एवं पीसीएफ के चेयरमैन आदित्य उर्फ़ अंकुर को साथ लेकर जा रहे हैं. यानी अपने बेटे को राजनीति में प्रतिस्थापित करने की दूरदृष्टि भी इसके पीछे काम कर रही है.

इसे भी पढ़ें अखिलेश यादव के समक्ष एक नई चुनौती!

इसके आलावा इससे जुडी हुई एक बात और मैं कह देना चाहता हूँ कि अनुशासनहीनता एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर जिन लोगों को पार्टी के बाहर का रास्ता शिवपाल ने दिखाया है, उसका कोई प्रचंड विरोध पार्टी के अंदर नही दिखाई दे रहा है. जिन-जिनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई है, उनके समर्थक जरूर नाराज हुए हैं, लेकिन उनके कारण अपने को अलग-थलग होने वाले या उनसे पीड़ित जन मानस शिवपाल के इस कार्रवाई का समर्थन भी कर रहा है. उनका हर हालत में साथ निभाने का काम केवल और केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें लखनऊ: सीएम अखिलेश के आश्वासन पर होमगार्डों का आंदोलन हुआ खत्म

मेरी दृष्टि से यह जो कुछ हो रहा है, उसका मिशन – 2017 में कोई फायदा नही मिलने वाला है. जब पूरी पार्टी एक होती है, एक लक्ष्य पर ही नही, उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करती है, तो ही फायदा मिलता है, अलग-अलग केन्द्रों पर अवस्थित होकर जो प्रयास किया जाता है, उसका कितना फायदा पार्टी को मिलेगा, यह तो समय ही बताएगा.

इसे भी पढ़ें लखनऊ: CM अखिलेश से मुस्लिम धर्म गुरुओं ने की मुलाकात

Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...
Next Story
Share it
Top