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आईजी सीआरपीएफ के बहाने राजनाथ सिंह पर निशाना साधा BJP अध्यक्ष केशव मौर्या ने

 special coverage news |  17 Feb 2017 9:05 AM GMT  |  लखनऊ

आईजी सीआरपीएफ के बहाने राजनाथ सिंह पर निशाना साधा BJP अध्यक्ष केशव मौर्या नेफोटो 4 PM से

संजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश

लखनऊ: सीआरपीएफ गृह मंत्रालय के अधीन होता है। इस समय गृह मंत्री राजनाथ सिंह है। लखनऊ उनका संसदीय क्षेत्र है। स्वाभाविक है कि यहां सीआरपीएफ में जो अधिकारी तैनात होगा वह राजनाथ की पसंद से होगा। राजनाथ सिंह ने कुछ महीने पहले ही यहां एडीजी सुभाष की आईजी सीआरपीएफ के पद पर तैनाती की। सुभाष सीएम अखिलेश यादव की प्रमुख सचिव अनीता सिंह के पति हैं। भाजपा के विरोधी खेमे को यह बात अखरी थी कि सीआरपीएफ के हाथ में चुनाव की कमान होती है। ऐसे पद पर राजनाथ सिंह के करीबी व्यक्ति की तैनाती चुनाव में असर डाल सकती है। माना जा रहा था कि बसपा इसकी शिकायत करेगी, मगर लोगों को हैरानी तब हुई जब बसपा ने तो नहीं लेकिन भाजपा अध्यक्ष केशव मौर्या ने आईजी सुभाष की शिकायत कर उन्हें हटाने की मांग कर डाली। इसके साथ ही यह बात साफ हो गई कि भाजपा में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।


दरअसल केशव मौर्या को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के समय भी राजनाथ सिंह से सलाह नहीं ली गई थी। भाजपा के अन्दर यह चर्चा लगातार चलती रही है कि राजनाथ सिंह और नरेन्द्र मोदी के बीच शीत युद्ध जैसी स्थिति कई बार बनी। इसके बाद ही लगातार राजनाथ सिंह का कद यूपी में घटाने की कोशिश की गई। यह बात दीगर है कि वर्तमान समय में राजनाथ सिंह के स्तर का भाजपा में यूपी में कोई नेता नहीं है। यहीं नहीं जब उनके पुत्र पंकज सिंह को टिकट देने की बात चली तो पार्टी के ही कई नेताओं ने भीतर-भीतर वंशवाद की बात शुरू की जबकि पंकज पिछले दस सालों से पार्टी के भीतर शानदार काम कर रहे हैं। पहली लिस्ट में पंकज का नाम इसीलिए नहीं जोड़ा गया क्योंकि पार्टी के कुछ नेता संदेश देना चाहते थे कि सब कुछ राजनाथ के कहने पर नहीं हो रहा। दूसरी लिस्ट में पंकज का नाम फाइनल हुआ तब भी पार्टी के कुछ लोग उन्हें हराने की साजिश करने लगे। राजनाथ सिंह भलीभांति समझ गए हैं कि पार्टी में उनका विरोध क्यों और किसके लिए किया जा रहा है। बताया जाता है कि इससे पहले राजनाथ स्वाति सिंह को भी लखनऊ से टिकट दिए जाने के पक्ष में नहीं थे, क्योंकि स्वाति के पति दयाशंकर सिंह ने पंकज का काफी विरोध किया था। जब सीआरपीएफ लखनऊ के आईजी के रूप में सुभाष की तैनाती हुई तब भी भाजपा के कुछ नेताओं ने यह बात फैलाई कि सुभाष सीएम की प्रमुख सचिव अनीता सिंह के पति हैं। इस परिवार के राजनाथ सिंह से भी अच्छे संबंध हैं इसीलिए यह तैनाती की गई है। हालांकि सुभाष की छवि बेहद सीधे और अच्छे अफसरों में होती है। पिछले दिनों यूपी के चुनाव में केशव मौर्या की अपराधी छवि का मुद्दा कई बार उठा तो माना गया कि इसके पीछे राजनाथ गुट का हाथ है। इसी का बदला लेने के लिए केशव मौर्या ने सीआरपीएफ के आईजी को हटाने की मांग कर डाली। राजनैतिक गलियारों में केशव मौर्या की यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है। साथ ही कार्यकर्ताओं में भी यह बात फैल गई है कि भाजपा के बड़े नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी अभी थमने का नाम नहीं ले रही है।


राजनाथ के गढ़ में भी की गई उनकी उपेक्षा

भाजपा के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से यह सन्देश देते रहे हों कि वह एक हैं। मगर हकीकत यह है कि राजनाथ के गृह जनपद के आस-पास भी प्रत्याशियों के चयन में उनकी खास राय नहीं मानी गई। इसी का नतीजा यह था कि पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी भाजपा बैक फुट पर आ गई और यह चर्चा आम हो गई कि पार्टी यहां 4 सीटों पर हार जाएगी। 7 बार से विधायक रहे श्याम देव चौधरी का टिकट जब काटा गया तो पार्टी में बागवत की स्थिति पैदा हो गई और माना जाने लगा कि पार्टी को यहां बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भी यह सोचकर पसीने छूट गए कि अगर पीएम के क्षेत्र में 4 सीट हार गए तो स्थिति बहुत खराब हो जायेगी। आनन-फानन में श्याम देव चौधरी को लखनऊ बुलाया गया और बकायदा ऐलान किया गया कि उनको एमएलसी बनाया जायेगा। राजनाथ सिंह यूपी के राजपूतों में अच्छी हैसियत रखते हैं और राजपूतों को यह पसंद नहीं आ रहा कि उनके नेता का इस तरह अपमान हो।

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