Home > Archived > आज का सवाल: लखनऊ में मैट्रो सुबह कितने बजे कहां से कहां तक चलती है? टिकट कहां से मिलता है ?

आज का सवाल: लखनऊ में मैट्रो सुबह कितने बजे कहां से कहां तक चलती है? टिकट कहां से मिलता है ?

 Special Coverage News |  11 Feb 2017 10:53 AM GMT  |  लखनऊ

आज का सवाल: लखनऊ में मैट्रो सुबह कितने बजे कहां से कहां तक चलती है? टिकट कहां से मिलता है ?

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र यादव ने सीएम अखिलेश यादव से आज के सवाल में पूंछा कि लखनऊ मेट्रो कब चलती है कब मिलती.

आज का सवाल?

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सवाल कि लखनऊ में मैट्रो सुबह कितने बजे चलती है ? कहां से कहां तक चलती है ? लखनऊ में मैट्रो का टिकट कहां से मिलता है ? लखनऊ के लोग मैट्रो यात्रा करना चाहते है ?

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र यादव ने आज कुछ सवाल किये है. उत्साह के साथ पश्चिम क्षेत्र के मतदाता निकले है जिनका उत्साह देखकर लगता है कि भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र के साथ भाजपा को मत देने जा रहे है। पीएम मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का विकास का विजन यूपी के चुनाव का मुख्य केन्द्र बन चुका है। जिन मुद्दों को हमने उठाया उन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस-सपा और बसपा को आने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यूपी के नौजवानों को रोजगार का वादा करने वाले को यह पता होना चाहिए भर्ती घोटाले में यूपी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव को हाईकोर्ट ने निकाला था।


कांग्रेस और सपा ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। हजारों लाखों नौजवानों के रोजगार प्रक्रिया को मजाक बनाने वाली सपा ने दोषियों के खिलाफ कभी कोई कार्यवाही नहीं की। जिन्होंने पिछले चुनाव में नौजवानों को रोजगार भत्ता देने का वादा किया था आज गरीबों केा पेंशन की बात कर रहे है वह बताएं कि बेरोजगारों को पांच साल में भत्ता क्यों नहीं दे पाएं। जिस प्रदेश में सबसे ज्यादा अपराध महिलाओं पर होते है। नेशनल क्राइम ब्यूरों के आंकड़े है कि दलितों पर 17 प्रतिशत से ज्यादा अपराध बढ़े है। प्रदेश में प्रतिदिन 11 बलात्कार। छेड़छाड़, लूट, अपराध के आंकडे बढ़ रहे है। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान में असफल रहे अखिलेश यादव को माफी मांगनी चाहिए। अभी तक यूपी के छात्रों को उन्होंने लैपटाप भी पूरी तरह से नहीं बांटे। जाति और धर्म के भेदभाव के आधार पर लैपटाप बांटे गये। अब मुफ्त साइकिल की बात कर रहे है। एक काम पूरा किया नहीं, फिर दूसरा वादा कैसे कर सकते है ?


प्रदेश में अब पुलिस आधुनिकीकरण की बात की जा रही है। पुलिस अधिकारियों की हत्या, आईपीएस अधिकारियों की हत्या, जवाहरबाग काण्ड में पुलिस अधिकारी मारा गया। यूपी में मायावती के राज में 745 पुलिसकर्मियों की हत्या हुई। अखिलेश जी की राज में 1400 पुलिसकर्मियों की हत्या हुई और न केवल पुलिस पर हमले हुए, भ्रष्ट पुलिस अधिकारी और अपराधियों के गठजोड़ के रूप में श्रवण साहू हत्याकाण्ड सामने आया। जिस पर हाईकोर्ट को भी संज्ञान लेना पड़ा। हजारों अपराधी पैरोल पर फरार है। जेल के अंदर से संगठित अपराध हो रहे है। कानून व्यवस्था की स्थिति जर्जर और लाचार है। तो उ0प्र0 में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने वाले पुलिस का आधुनिकीकरण कैसे कर सकते है ?


शहीद पुलिस वालों के परिवार के लोग पूछ रहे है कि उनके हत्यारों को सजा कब होगी ? यह प्रश्न मुख्यमंत्री से रोज पूछा जा रहा है। हम रोज मुख्यमंत्री से सवाल कर रहे है क्या ये सच नहीं है कि मायावती के शासनकाल में जितने पुलिस पर हमले हुए क्या वह अखिलेश राज में दूगने नहीं हुए। जनता यह जान चुकी है कि यह अवसरवादियों का गठबंधन है। जब चुनाव हो शुरू चुका है तब इन्हें पता चल रहा है कि इन्हें चलना कहां से है। यह दो शहजादों का गठबंधन है। जिसका प्रदेश की गरीब जनता से कोई लेना देना नहीं है।

Tags:    
Share it
Top