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अब अखिलेश की पुलिस हुयी उनके खिलाफ, बसपा का देंगे साथ

 Special Coverage News |  10 Feb 2017 11:21 AM GMT  |  लखनऊ

अब अखिलेश की पुलिस हुयी उनके खिलाफ, बसपा का देंगे साथ

वाराणसी: यूपी चुनाव 2012 में सपा के चुनावी घोषणा पत्र से पार्टी को बहुत फायदा हुआ था। सपा ने पुलिस वालों के लिए खास घोषणा की थी। पुलिस को सपा का साथ मिला था और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बन गयी थी। इस बार यही दांव बसपा सुप्रीमो मायावती ने खेला है।


सीएम अखिलेश से नाराज पुलिस अब बसपा का साथ दे सकती है। पुलिस के लिए जिले के पास तैनाती का मुद्दा बड़ा होता है। सपा ने इस मुद्दे का भुनाया था और वर्ष 2012 में सरकार बनने के बाद सीएम अखिलेश यादव ने पुलिस को गृह जनपद के पास जिले में तैनाती दी थी। जिससे पुलिस वाले बहुत खुश हुए थे। बाद में बदायू रेप कांड के बाद सीएम अखिलेश ने नियम बदल दिया था इसके बाद से पुलिस को गृह जनपद के पास जिलों में तैनाती मिलना बंद हो गयी है। अनुशासन के चलते पुलिस वालों ने खुल कर इस निर्देश का विरोध नहीं किया था, लेकिन गहरी नाराजगी जतायी थी। इसके बाद से पुलिस वाले सपा सरकार से नाराज चल रहे हैं।


बसपा सुप्रीमो ने पुलिस प्रशासन की नाराजगी को भुनाने के लिए ही बड़ा दांव खेला है। पूर्व सीएम मायावती ने साफ कह दिया है कि यूपी में 2017 के चुनाव में बसपा को बहुमत मिलता है तो पुलिस वालों के गृह जनपद के पास जिलों में तैनाती दी जायेगी। बसपा की इस घोषणा से पुलिस वालों में खुशी की लहर दौड़ गयी है। फिलहाल पुलिस वाले बसपा की इस घोषणा से बहुत खुश है यदि पुलिस वालों की चली तो बसपा को लाभ हो सकता है।


विधानसभा चुनाव में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जनता तो अपनी इच्छा से मतदान करती है लेकिन मतदान के पहले पुलिस के पास माहौल बनाने का मौका रहता है। फिलहाल सीएम अखिलेश यादव की नाराजगी का बसपा ने लाभ लेने की रणनीति बनायी है। यदि बसपा का तीर निशाने पर लग जाता है तो सपा-कांग्रेस गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ेगा।

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