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अबकी बढ़ी रार तो समाजवादी पार्टी की होगी सबसे बड़ी हार!

 Special Coverage News |  6 Dec 2016 3:00 AM GMT  |  लखनऊ

अबकी बढ़ी रार तो समाजवादी पार्टी की होगी सबसे बड़ी हार!

लखनऊ: समाजवादी परिवार में कुछ दिनों से रुकता नजर आ रहा 'महासंग्राम' टिकट बंटवारे पर फिर मुखर हो सकता है। इससे नये टिकिट दावेदारों, विधायकों और कुछ मंत्रियों में भी सियासी भविष्य को लेकर बेचैनी फैल रही है। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने परिवार का महासंग्राम थामने का जब भी प्रयास किया, टिकट बंटवारे में अधिकार का मुद्दा हर बार जोर शोर से उठा।


मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसी समय कहा था कि 'इम्तहान मेरा है, टिकट बंटवारे का अधिकार भी मुझे मिलना चाहिए'। वह यहां तक कह गये थे कि 'नेताजी' चाहें तो सब कुछ ले लें मगर टिकट बांटने का हक नहीं लें'। शीर्ष नेतृत्व ने इसे समझा और टिकट बंटवारे में अखिलेश यादव को वरीयता का संकेत दिया।



सूत्रों का कहना है कि मुलायम ने प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को अखिलेश यादव से राय-सलाह कर टिकट बांटने का इशारा किया था, जिसके बाद शिवपाल ने सबसे चर्चा कर टिकट बांटे जाने की बात कई बार दोहराई। मगर, सोमवार को शिवपाल ने कहा कि 165 टिकट फाइनल कर दिये हैं। मौजूदा विधायकों के बारे में विचार चल रहा है। हर विधानसभा की अपनी समस्याएं होती है। उन्हें पूरा न कर पाने पर लोग नाराज होते हैं। मौजूदा विधायकों, मंत्रियों के क्षेत्रों में सर्वे चल रहा है। इसी आधार पर टिकटों का वितरण होगा, जिताऊ-टिकाऊ को ही टिकट मिलेगा। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में शिवपाल यादव की इन बातों में ढेरों विधायकों के टिकट कटने का संकेत था। 40 विधायकों के टिकट कटने की चर्चा पार्टी में लंबे समय से है। सोमवार को शिवपाल ने इसी ओर इशारा किया।



इससे इतर यह भी आम चर्चा है कि कई विधायक दूसरे दलों के संपर्क में हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद वे दूसरे दलों का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इन परिस्थितियों में उन विधायकों में ज्यादा बेचैनी है, जिन्हें संगठन, शीर्ष नेतृत्व से ज्यादा एक राष्ट्रीय महासचिव करीबी कहा जाता है। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश-शिवपाल के बीच मतभेद 'बाहरी' दखल से गहराया और फायदा उन्होंने उठाया जिनका 'बाहरी' लोगों से छत्तीस का आकड़ा था। सूत्रों का कहना है कि अब जो परिस्थितियां फिर पैदा हो रही है, अगर उसमें अगर मुलायम सिंह यादव ने समय रहते दखल नहीं दिया तो ठंडा हुआ महासंग्राम फिर शुरू होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है, जो कि सपा के लिए नुकसानदायक ही नहीं घातक भी होगा।

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