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मालिक को इतना भी मुलायम नहीं होना चाहिए कि साझीदार साइकिल पर लाध कर ले जाएँ

 Special Coverage News |  26 Oct 2016 7:18 AM GMT  |  New Delhi

मालिक को इतना भी मुलायम नहीं होना चाहिए कि साझीदार साइकिल पर लाध कर ले जाएँ

Zahid M Shah

आज से लगभग दो ढाई दशक पहले देश मे एक समाजवादी नामक कंपनी खुली थी जिसका काम था यादव समाजवाद,दलित समाजवाद और मुस्लिम समाजवाद का उत्पादन करना और उचित दाम पर उतर प्रदेश मे बेचना।कंपनी के मालिक बहुत ही मुलायम ह्रदय के मालिक थे,अपने कुनबे से बहुत प्यार करते थे तो उन्होंने अपनी समाजवादी कंपनी मे अपने भाई भतीजे,बेटे बहु,साले साली,समधी समधन इत्यादि को कंपनी मे भागीदार बना लिया।जब कंपनी चल पड़ी है तो सब अपना हिस्सा माँग रहे हैं।इसीलिए बड़े बुज़ुर्गों ने कहा है कि मालिक को इतना भी मुलायम नहीं होना चाहिए कि साझीदार साइकिल पे लाध कर ले जाएँ।इसी पर एक शेर अर्ज़ है।
पड़वा दिए कंटाप,कर दी मेरी ऐसी तेसी।
ह्रदयहीन कुर्सी मैय्या मगर तू वैसी की वैसी।।
मुस्कुराते रहो।

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