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रथ-यात्रा में अखिलेश के लिए जरूरी 9 सावधानिया!

 Special Coverage News |  27 Oct 2016 8:51 AM GMT  |  New Delhi

रथ-यात्रा में अखिलेश के लिए जरूरी 9 सावधानिया!

प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र यादव
जिसकी प्रतीक्षा बहुत दिनों से राजनीतिक हलकों में की जा रही थी, वह 3 नवम्बर, 2016 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में निकल रही है. इसके प्रति जनमानस में एक उत्सुकता है. लोगों को लग रहा है कि अन्य यात्राओं से यह कुछ मायने में जरूर अलग होगी. मैंने कानपुर, उन्नाव और लखनऊ की आम जनता से बातचीत की. उनसे चर्चा के बाद कुछ बिंदु जो उभर कर आये, उनका वर्णन मैं यहाँ कर रहा हूँ. यदि उनकी आशाओं पर अखिलेश एवं उनकी रथ-यात्रा खरी उतरती है, तो उसका लाभ होगा, यदि नही, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसके लिए कुछ जरूरी ऐतिहात बरतने की जरूरत है.

1. भाषण के बजाय जनता से संवाद – इन जिलों की जनता ने चर्चा में कहा कि वह अखिलेश का भाषण नही सुनना चाहती है. बल्कि उसके मन जो प्रश्न हैं. उनका उत्तर जानना चाहती है. उसके पास जो जानकारियां हैं, उनके साथ शेयर करना चाहती है. उसके साथ पार्टी के कुछ नेताओं ने जो ज्यादतियां की है, उसे बताना चाहती है. इसलिए अखिलेश यादव को लम्बे-चौड़े भाषण देने के बजाय जनता से सीधे संवाद करना चाहती है.

2. बूथ एवं सेक्टर लेवल के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक – जिन बूथ एवं सेक्टर लेबल के कार्यकर्ताओं ने अपने जान की बाजी लगा कर 2012 के चुनाव में मतदान करवाया था, पूरे साढ़े चार उसकी घोर उपेक्षा की गयी. पार्टी का यह तबका बहुत गरीब है. उसके पास इतना धन नही होता है कि वह जिला एवं लखनऊ का चक्कर लगाता फिरे. इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा मार्ग में आने वाली विधान सभाओं के बूथ एवं सेक्टर लेबल के कार्यकर्ताओं गोपनीय बैठक करनी चाहिए. यदि ऐसा नही हुआ, या किया गया, तो मिशन – 2017 का हश्र कितना बुरा होगा, इसकी कल्पना भी नही की जा सकती है.

3. करीब से देखने की इच्छा – तमाम लोगों ने यह इच्छा जाहिर की कि जब वे हमारे क्षेत्रों से निकलें, तो खुली गाड़ी में हों, गाड़ी की गति बहुत धीमी हो, जिससे सामान्य लोग जो उनको करीब से देखना चाहते हैं, उनकी इच्छा पूरी हो सके. यदि कोई कुछ कहना चाहता हो, तो उसे भी सुने. इससे उनकी लोकप्रियता भी बढ़ेगी एवं उद्देश्य भी पूरा होगा.

4. समस्यायों का तुरंत निस्तारण – अखिलेश यादव यह यात्रा एक मुख्यमंत्री के रूप में निकाल रहे हैं, इसलिए यात्रा के दौरान उन्हें तमाम प्रार्थना पत्र मिलेंगे. जिनका निराकरण यदि मौके पर मुख्यमंत्री ने करवा दिया, तो इस यात्रा के उद्देश्य से ज्यादा परिणाम सामने आएंगे.

5. दुष्ट सपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई – मैं किसी सपा नेता के ऊपर उंगली नही उठा रहा हूँ, लेकिन जनता ने चर्चा के दौरान यह शब्द उपयोग किया है. पार्टी के तमाम नेताओं ने अनैतिक एवं गैर कानूनी कार्य किया है. सत्ता का दुरूपयोग किया है. जिनकी शिकायते भी जनता मुख्यमंत्री से इस यात्रा के दौरान करेगी. मुख्यमंत्री को मौके पर ही उन नेताओं को बुला कर हकीकत जानने के बाद उचित कार्रवाई करनी चाहिए.

6. स्थानीय नेताओं को दूर रखना –
अपनी इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को स्थानीय नेताओं को अपने साथ खड़े होने या लेकर चलने से बचना चाहिए. क्योंकि इन नेताओं के बारे में जनता का दृष्टिकोण ठीक नही है. इन्होने पिछले चार साल जनता को जिस तरह से परेशां किया है. छल किया है. उससे जनता बहुत दुखी है. यदि वे स्थानीय नेताओं को साथ लेकर चलेंगे, तो जनता के मन यह भाव आना स्वाभाविक है कि इन लोगों का पोषण खुद मुख्यमंत्री ही कर रहे हैं. जिसका खामियाजा मिशन – 2017 भुगतना पड़ेगा.

7. स्थानीय विकास की पड़ताल करना – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस यात्रा के दौरान स्थानीय विकास की भी पड़ताल की व्यवस्था करनी चाहिए. कितना विकास हुआ है और कौन-कौन से विकास जरूरी हैं. इसकी एक फेहरिस्त बनानी चाहिए. जो बहुत जरूरी हों, और एक – दो महीने में पूरे होने वाले हों, उन्हें तुरंत शुरू करवा देना चाहिए. इससे मुख्यमंत्री की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और मिशन – 2017 में उसका लाभ मिलेगा.

8. अपने मुख्यमंत्रित्व काल में की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानना –
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चुनावी घोषणा – पत्र के उल्लेखित सभी वायदों को पूरा कर दिया है. लेकिन स्थानीय नेताओं एवं अधिकारियों ने उसे जमीन पर कितना उतरने दिया है. कहाँ-कहाँ घालमेल किया है. इसकी भी जानकारी करनी चाहिए. यदि कहीं नियमों – कानून को ताख पर रख कर जरूरतमंदों एवं पात्रों को योजना का लाभ न मिला हों, तो उन्हें लाभ मिले यह सुनिश्चित करना चाहिए.

9. पारिवारिक विवाद पर बोलने से बचना चाहिए – इस समय जिस प्रकार का विवाद चल रहा है, उस पर बोलने एवं तंज कसने से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बचना चाहिए. आज भी जनता सपा मुखिया के खिलाफ कुछ भी सुनना नही चाहती है.

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