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शिवपाल-अखिलेश गुट में हिंसात्मक झड़प मिशन – 2017 के लिए....

 Special Coverage News |  31 Oct 2016 9:06 AM GMT  |  New Delhi

शिवपाल-अखिलेश गुट में हिंसात्मक झड़प मिशन – 2017 के लिए....

प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र यादव

समाजवादी पार्टी में जो कुछ घटित हो रहा है, उसे अप्रत्याशित नही कहा जा सकता. वह एक प्रक्रिया है. जब-जब सत्ता एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थान्तरित होती है, तब-तब इस तरह का वातावरण बन ही जाता है. इसी तरह की आलोचना-समालोचना लोग करते हैं. इस तरह के वातावरण में कार्यकर्ताओं का उत्तेजित होना भी लाजिमी है. अपने-अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी एवं समर्थन करना दोनों उचित है. किन्तु उसके लिए हिंसा को किसी प्रकार उचित नही ठहराया जा सकता


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निरीक्षण करने के लिए लखनऊ से सड़क मार्ग से जब लखनऊ से इटावा के लिए निकले. इसकी सूचना जब उनके समर्थकों को मिली, तो सभी ने उनकी एक झलक पाने और उनका स्वागत करने के लिए उन मार्गों एवं चौराहों पर जमा हुए. जगह-जगह उनका स्वागत भी किया. अधिकांश जगह उन्होंने हंसते हुए अभिवादन किया. लेकिन इटावा के चौपुला चौराहे पर जिस तरह का व्यवहार अखिलेश के समर्थकों के साथ हुआ, वह निंदनीय है. वहां जमा हुए उनके समर्थकों के साथ गाली-गलौज एवं मारपीट कर उन्हें भगा दिया गया. यह कस्बा शिवपाल की विधानसभा जसवंत नगर में पड़ता है. इस क्षेत्र में उनके समर्थकों का बाहुल्य होना भी लाजिमी है. इसे लोगों ने लखनऊ में शिवपाल समर्थकों के पीटे जाने की प्रतिक्रिया कहा. ध्यातव्य हो कि अखिलेश के समर्थकों ने शिवपाल के समर्थकों को उस दिन पीट दिया था, जिस दिन प्रदेश कार्यालय में माइक के छीना-झपटी की घटना घटी थी. लेकिन यह उचित नही है. हर पार्टी में समय एवं योगदान के अनुसार नेताओं का कद बढ़ता-घटता रहता है. इसका मतलब यह कतई नही होता है कि उनके समर्थक कद बढ़ने – घटने को अपने अहंकार से जोड़ लें और संतुष्ट होने के लिए हिंसा का सहारा लें.


दोनों नेता एक हैं. एक ही पार्टी में हैं. पार्टी को मजबूत करने के लिए अपना-अपना प्रयास कर रहे हैं. न तो अखिलेश संगठन में हस्तक्षेप कर रहे हैं और न ही शिवपाल सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं. सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दोनों नेताओं को जो – जो जिम्मेदारियां सौपी हैं, उसके हिसाब से वे अपना-अपना कार्य कर रहे हैं. इस बात को समर्थकों को भी समझना चाहिए. शिवपाल एवं अखिलेश दोनों नेताओं को अपने समर्थकों से यह अपील करना चाहिए कि इस तरह की कोई हरकत न करें, जिससे उनकी तथा पार्टी की छवि पर कोई उंगली उठा सके. जब मिशन – 2017 की और दोनों के कदम बढ़ चुके हैं. एक – एक वोट, एक – एक विचार महत्त्वपूर्ण है. ऐसे में मन के मैल को दूर करके, कलुषता को दूर करके आपसी मेल-जोल से मिशन – 2017 में जुटना चाहिए.



यदि इस तरह की हिंसात्मक झड़प होती रही तो इसका मिशन – 2017 पर गलत प्रभाव पड़ेगा. मतदाता सोचने पर मजबूर हो जायेंगे, कि यदि ये लोग इसी तरह से मारपीट करते रहेंगे, तो भविष्य में यदि इनकी सरकार बन जायेगी, तो फिर एक दूसरे के प्रति दुर्भावना के कारण बदला भी लेगें. इन मारपीट का बेजा फायदा विपक्षी दल उठाएंगे. वे मंचों से जनता को समझायेंगे कि जो पार्टी आपस में गृह युद्ध में फंसी है, वह आपका भला नही कर सकती है. इसलिए कार्यकर्ताओं को मतभेद भुला कर मिशन – 2017 में जुटना चाहिए. हर क्षेत्र के वरिष्ठ एवं प्रभावी नेताओं को हस्तक्षेप करना चाहिए, जिससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. सभी पाठकों को दीपावली की शुभकामनायें !

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