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अखिलेश यादव के समक्ष एक नई चुनौती!

 Special Coverage News |  1 Nov 2016 7:49 AM GMT  |  New Delhi

अखिलेश यादव के समक्ष एक नई चुनौती!

प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र यादव


समाजवाद में राष्ट्र धर्म सर्वोपरि होता है. जब- जब देश पर संकट आया, तब-तब राजनीतिक दलों से अपने तमाम मतभेदों के बावजूद समाजवाद में विश्वास करने वाले नेता एवं राजनीतिक दल एक पटल पर आए और उस चुनौती का सामना करने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया. एक बार फिर ऐसा ही संकट देश के सामने हैं. तमाम चेतावनियों एवं तिरस्कार के बावजूद हमारा पड़ोसी मुल्क लगातार हमारे देश के जवानों एवं अवाम को गोलियों एवं मोर्टारों का शिकार बना रहा है. कोई ऐसा सप्ताह नही गुजरता, जब किसी बहन की मांग न सूनी होती हो. कोई बच्चा अनाथ न होता हो. किसी माँ-बाप के बुढ़ापे की लाठी न छिनती हो. देश का हर नागरिक इसे लेकर चिंतित है.


बिना परिश्रम के पैसे और पद की चाहत ने राष्ट्र धर्म के सामने चुनौती पेश कर दी है. अभी हाल में जो जासूस पकड़े गये, उसमें से एक समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य का निजी सचिव था. जैसा कि समाचार पत्रों में पढ़ने को मिला है, उसके अनुसार रक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण तमाम दस्तावेज पड़ोसी मुल्क को दिए हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के लिए वैसे ही बहुत सम्वेदनशील है. फरहत प्रकरण जुड़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गयी है. यह पहला केस है, इसलिए समाजवाद एवं उसे प्रश्रय देने वाली देश की सभी पार्टियों को सजग हो जाना चाहिए. उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. इसलिए उन्हें और सतर्कता बरतने की जरूरत है. चूंकि अब समाजवादी पार्टी की पूरी कमान व्यवहारिक रूप से अखिलेश के हाथों में आ गयी है. इसलिए उन्हें अपने तमाम सांसदों, विधायकों के निजी सचिवों, उनके इर्द-गिर्द अधिकांश समय बिताने वाले नेताओं की जांच करने के साथ-साथ नजर रखने की भी जरूरत है. इसके लिए उन्हें राज्य की ख़ुफ़िया एजेंसियों को सक्रिय कर देना चाहिए. इसके आलावा अपने सभी नेताओं को भी साफ़ शब्दों में लिखित आदेश जारी करना चाहिए कि जिसे भी आप स्टाफ के रूप में रखें, सिर्फ उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराके अपनी आंखे बंद न कर लें, बल्कि उसकी गतिविधियों पर ध्यान रखें. यदि कभी कोई बात नागवार गुजरे, तो तुरंत उस सम्बन्ध में उससे पूछताछ करें, जिससे समाजवादी पार्टी के ललाट पर इस प्रकार का कलंक न लगे. वैसे ही तमाम तमगों से लोग स्पा को नवाजते रहते हैं. लेकिन अखिलेश को इसके लिए अभी तक कोई भी जिम्मेदार नही ठहराता नही है. चूंकि अब पार्टी की लगाम उनके हाथ में है, इसलिए उन्हें अपनी प्रकृति के अनुरूप इस प्रकरण के प्रकाश में आ जाने के बाद कदम उठाने चाहिए.


इसे समाजवादी पार्टी तक सीमित मान लेना ठीक नही है. बल्कि देश की सभी पार्टियों को इस प्रकरण से नसीहत लेते हुए, अपने निजी सचिवों-अंगरक्षकों की जाँच एवं उनकी हरकतों पर ध्यान रखना चाहिए. जिससे देश की अस्मिता एवं सुरक्षा खतरे में न पड़े.


बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि फरहत पिछले 18 वर्षों से आईएसआई के संपर्क में था. हर महीने उसकी एक मीटिंग भी पाक उच्चायोग के अधिकारीयों के साथ होती थी. इसके आलावा वह हर दिन किसी न किसी रूप में पाकिस्तानी लोगों के संपर्क में रहता था. देश की सुरक्षा से जुड़े हर दस्तावेज उसे बिना किसी मशक्कत के तो मिल नही जाते होंगे. उसे उसके लिए बराबर एवं बार-बार प्रयत्न करना होता होगा. हर दस्तावेज के एवज में उसे मोटी रकम भी मिलती थी. इसके बावजूद भी देश की गोपनीय सुरक्षा कर रहे लोगों को भनक नही लग सकी. इसलिए अब देश की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों, अधिकारियों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है. रक्षा प्रतिष्ठानों एवं उसमें काम करने वालों पर विशेष नजर रखनी चाहिए. जैसे ही उसकी कोई गतिविधि संदिग्ध दिखे, उससे पूछताछ करनी चाहिए. इस तरह से लोगों पर गोपनीय नजर रखी जा रही है, इसका भी एहसास इन प्रतिष्ठानों से जुड़े हर के कर्मी को होनी चाहिए. इसका भी फायदा मिलेगा. देश की सुरक्षा सर्वोपरि है. यदि देश की अवाम राष्ट्रप्रेम से अभिभूत नही होगी, तो देश की सुरक्षा कर रहे जवान अकेले पड़ोसी मुल्क को शिकस्त देने में कामयाब नही होंगे. रोज कोई न कोई सैनिक शहीद होता रहेगा. धरती माता का भाल अपने ही पुत्र के खून से लाल होता रहेगा.

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