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अखिलेश फिर सरकार बना सकते हैं बशर्ते मानी ये 10 बातें!

 Special Coverage News |  7 Nov 2016 11:25 AM GMT  |  New Delhi

अखिलेश फिर सरकार बना सकते हैं बशर्ते मानी ये 10 बातें!

प्रो. (डॉ.) योगेन्द्र यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चरित्र एवं चाल में कोई अंतर नही है, यह इस प्रदेश की जनता बहुत अच्छी तरह जानती है. उन्होंने तमाम अवरोधों के बावजूद बहुत काम भी किये हैं. इनके कामों से सभी लोगों को फायदा हुआ है. लेकिन समाजवादी पार्टी में पिछले एक महीने से जो उठा-पटक हो रही है, उससे इस पार्टी को अपना अमूल्य मत देने का मन बना चुका मतदाता एक बार भी चिंता की स्थिति में है. मैंने जब उनसे इस सम्बन्ध में बात की, तो उन्होंने साफ-साफ़ शब्दों में कुछ सुझाव दिए, जिसे मैं यहाँ आपके सामने अपने शब्दों में रख रहा हूँ –

1. शिवपाल जी से पूरी तरह अलग होना – इस प्रदेश के समाजवादी मतदाताओं में यह गलतफहमी पूरी तरह से अपनी जड़ें जमा ली है कि यदि वे समाजवादी पार्टी को वोट देकर उसकी सरकार भी बना देते हैं, तो भी शिवपाल अपने तमाम वायदों के बाद भी सरकार में हस्तक्षेप करने से बाज नही आ सकते हैं. इसलिए जो भी कुछ हो, आर-पार हो जाए, जिससे एक बार फिर अखिलेश यादव के पक्ष में मतों का ध्रुवीकरण हो सके.

2. गुंडों एवं अपराधियों को टिकट नही देना –
उत्तर प्रदेश की जनता यह बहुत अच्छी तरह जानती है कि वर्तमान समय में चाहे वह सरकार हो, या संगठन, मंत्री हों, या विधायक हों, उसमें अधिकाँश गुंडे एवं अपराधी छवि के हैं. जनता ने बातचीत के दौरान कहा कि अखिलेश इस प्रदेश की जनता की पहली पसंद इसलिए बने हैं, क्योंकि जब उनका राजनीतिक वजूद भी नही था, तब भी उन्होंने डीपी यादव के मसले पर जो किया था, उसकी प्रशंसा सभी ने की थी. इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यदि जिन्हें जनता गुंडा या अपराधी मानती है, उसे टिकट न देकर साफ-सुथरी छवि के लोगों को टिकट दे देते हैं, तो प्रदेश की जनता उन्हें प्रदेश की कमान एक बार फिर उनके हाथ में दे सकती है. लेकिन जनता पूरी तरह से अपराधी एवं गुंडे मुक्त पार्टी चाहती है.

3. अपने दलाल मित्रों से दूरी बनाना – इस बातचीत में प्रदेश के सपाई मतदाताओं ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बेदाग़ हो सकते हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द भी दलाल टाइप के नेता हैं, जिनका जनता एवं अपने क्षेत्र में कोई वजूद नही है. उनके लिए पैसा भी भगवान है, यदि आप पैसा देते हैं, तो वे आपका काम करवाते हैं, यदि नही, तो वह आपको टरकाते रहते हैं. यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एक बार फिर सत्ता में आना चाहते हैं, तो उन्हें अपने इन दलाल मित्रों से भी एक निश्चित दूरी बनानी होगी. अन्यथा इस प्रदेश की जतना उन्हें वोट देगी, इसमें संदेह है.

4. पिछड़े एवं दलित वर्ग के नेताओं को तरजीह देना – प्रदेश की जनता ने जोर देकर अखिलेश के ऊपर यह आरोप लगाया कि वे सवर्णों से ज्यादा घिरे रहते हैं. उन्हें ही ज्यादा तरजीह देते हैं. उनके काम भी ज्यादा करते हैं. जब भी उन्हें सवर्ण और पिछड़े-दलित में चुनना होता है, तो वे सवर्ण को ही चुनते हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी छवि निखारने के लिए इस दिशा में भी काम करना पड़ेगा.

5. सामाजिक न्याय को तरजीह देना –
उत्तर प्रदेश के छात्रो एवं नौकरी की तयारी करने वाले युवाओं ने बातचीत में मुझसे साफ़-साफ कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने दलितों एवं पिछड़ों के साथ सामाजिक न्याय नही किया. आयोग की परीक्षाओं एवं दलित अधिकारियों के साथ जो कुछ हुआ, उससे इस प्रदेश के मुख्यमंत्री भी अनभिज्ञ नही है. इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस दिशा में भी काम करना होगा. पिछड़े एवं दलित वर्ग के युवाओं के प्रति कुछ ऐसे निर्णय या आशवासन देना होगा, जिससे वे उनके प्रति विश्वास कर सकें.

6. विकास के छोटे-छोटे काम भी करना – उत्तर प्रदेश की जनता ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को विकास के छोटे-छोटे काम करना चाहिए. सरकार द्वारा अक्युपाईड जमीन का जो मुआबजा जो सैफई के किसानों को दिया गया है, वह प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के किसानों को भी दिया जाना चाहिए. जबकि ऐसा नही हुआ है. जसवंत नगर विधान सभा के ही किसानों ने बातचीत के दौरान यह बताया कि फर्रुखाबाद रोड पर स्थित किसानों को ही कम मुआबजा दिया गया है. इन विसंगतियों को भी दूर करना पड़ेगा. तभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का वरण इस प्रदेश की जनता कर सकती है.

7. नौकरी एवं रोजगार के अवसर उत्पन्न करना – समाजवादी पार्टी ने अपने पिछले कार्यकालों में उत्तर प्रदेश के नौजवानों एवं बेरोजगारों नौकरी देकर अपनी विश्वसनीयता कायम की है. इस बार की सरकार उनके इस विश्वास पर खरी नही उतरी है. इस दिशा में अखिलेश को काम करने की जरूरत है. विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता इस दिशा में उनके कदम न उठाने के कारण नाराज है. रोजगार के भी बहुत अवसर उत्पन्न किये गये हों, जनता इस पर विश्वास नही करती है. दरअसल जनता कहती है कि उनके नेता जिस अवसर की बात करते हैं, वे मांग के अनुरूप नही है.

8. नौकरी की नीति का विधि सम्मत होना – उत्तर प्रदेश के युवाओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी वैकेंसी आई, कोई भी वैकेंसी ऐसी नही दिखी, जिसके खिलाफ कोर्ट में लोग न गये हों. इस प्रदेश की जनता चाहती है कि जो भी वैकेंसी आउट की जाए, वह विधि सम्मत हो, पारदर्शिता हो, पिछड़े एवं दलितों के साथ न्याय हो. इस क्षेत्र में अभी अखिलेश यादव को प्रदेश की जनता को विश्वास में लेना होगा.

9. गन्ना का मूल्य बढ़ाना एवं समय से भुगतान की व्यवस्था करना –
समाजवादी पार्टी की गहरी पैठ की यदि हम बात करें, तो प्रदेश के किसानों में उसकी गांवों में अधिक है. लेकिन इस प्रदेश के किसानों ने बातचीत में मुझे बताया कि इस कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गन्ने के मूल्य में वृद्धि नही की. जबकि महंगाई कई गुना बढ़ी. दूसरी शिकायत यह भी की कि गन्ना का भुगतान समय से हो. जो अभी तक नही हुआ है, वह उन्हें तत्काल कराया जाये. विशेषकर पश्चिम के किसानों ने कहा कि यदि करीब 40-50 रूपये प्रति कुंतल भाव में वृद्धि अखिलेश यादव कर देते हैं, तो पश्चिम की 100 सीटें हम उन्हें जीता कर दे देंगे.

10. मुसलमानों, यादवों एव ठाकुरों को अधिक तरजीह देना – उत्तर प्रदेश की जनता ने अखिलेश के ऊपर के और ब्लेम लगाया. यह ब्लेम लगाने वाले अन्य पिछड़े एवं दलित वर्ग के लोग हैं. उन्होंने कहा कि वे इस प्रदेश के मुसलमानों, यादवों एवं ठाकुरों को तरजीह दें, लेकिन उनकी जाति के अधिकारीयों – कर्मचारियों के साथ भी न्याय करें. जो योग्य हों, उन्हे पदारूढ़ करें. संगठन में भी उन्हें स्थान दें और उचित सम्मान मिले, इसकी व्यवस्था करें. पश्चिम के जिलों के लोगों ने शिकायत की कि उन्हें संगठन में भी नहीं रखा गया है. साथ में एक प्रश्न भी कर डाला क्या मुसलमानों के आलावा इन्हें कोई वोट नही देता ? या उनसे अधिक योग्य या निष्ठावान लोग नही है. इस पर अभी अखिलेश यादव को काम करने की जरूरत है.

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