Top
Home > Archived > मोदी की नोटबंदी ने मार डाला, अब क्या करें?

मोदी की नोटबंदी ने मार डाला, अब क्या करें?

 Special Coverage News |  9 Dec 2016 12:56 PM GMT  |  New Delhi

मोदी की नोटबंदी ने मार डाला, अब क्या करें?

कन्नौज: नोटबंदी की मार आलू किसानों पर किसी आफत की तरह गिरी है. खून पसीने से उपजाए गये आलू के लिए उन्हें बाजार में कोई खरीददार नहीं मिल रहा. वहीँ कोल्डस्टोरेज में भी जगह नहीं होने के बाद अब वे आलू की फसल को फेंक रहे हैं.आलू बेल्ट के मुख्य जिले कन्नौज के किसान नोटबंदी के बाद कहीं के भी नहीं रहे.यहां के हजारों किसानों का आलू नोटबंदी की वजह से कोल्डस्टोरेज में नहीं खरीदा जा रहा है जिसके बाद अब वे अपनी मेहनत की फसल को फेंक रहे हैं.


सैकड़ों किसानों ने बिक्री न होने के चलते अब कोल्डस्टोरेज से मुंह मोड़ लिया. जिसके बाद कोल्डस्टोरेज मालिकों ने किसानों को नोटिस जारी कर आलू निकलवाने के निर्देश दिए हैं. दरअसल किसानों और कोल्डस्टोरेज मालिकों को समझ में नही आ रहा है कि बचे हुए भंडारित आलू का क्या करें.किसानों ने आलू की बिक्री न होने के कारण अपना आलू एक बड़े गड्ढे में फेंकने का निर्णय लिया है. आलू के बोरे नई फसल भरने के लिए खरीदने न पड़े इस कारण किसान बोरा खाली कर सैकडों क्वींटल आलू गड्ढे में फेंकने को मजबूर हैं. किसान आलू की बिक्री न होने की सबसे बड़ी वजह नोटबन्दी को बता रहे हैं.


आलू किसान सोने लाल ने कहा कि इस नोटबंदी के कारण मंडी में कोई आलू खरीद ही नहीं रहा. उपजाए गये आलू को फेंकना पड़ रहा है और इस प्रक्रिया में उनका भाड़ा भी जेब से लग रहा है.दूसरे आलू किसान मुकेश कटियार ने कहा कि कोई रास्ता नहीं दिखा तो गड्ढे में आलू की उपज को डालना पड़ रहा है. मंडी में आलू की गाड़ी तीन-चार दिनों तक खड़ी रहती है.8 तारीख के बाद से तो हमलोगों की कमर ही टूट गई. 8 तारीख के बाद बाजार गिरता गया. मंडियों में कोई खरीददार ही नहीं है.


किसानों की पसंदीदा फसल आलू के इस तरह फेंके जाने पर कोल्डस्टोरेज मालिक भी परेशान हैं. कोल्डस्टोरेज मालिकों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि दिसम्बर माह में कोल्ड स्टोरेज को खाली करवाकर उसकी सफाई करवाई जाती है जबकि किसानों ने बिक्री न होने के कारण कोल्डस्टोरेज में जाना ही बंद कर दिया है. उनका कहना है कि यही हाल रहा तो हजारों आलू किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे. उनका कहना है कि सरकार को आलू की बर्बादी रोकने के लिए कोई रास्ता निकालना चाहिए.


कोल्ड स्टोरेज मालिक पुनित दुबे ने कहा कि यहां आलू सिर्फ खाया जाता है. आलू को खपाने के लिए कोई फुड प्रॉसेसिंग इंडस्ट्री नहीं है. एक्सपोर्ट प्रमोशन की कोई व्यवस्था नहीं है. आलू वेफर की फैक्ट्री लगनी चाहिए. आलू पाउडर का प्लांट लगना चाहिए. खाने के अलावा आलू का और भी यूटीलाइजेशन होना चाहिए.


साल 2015 में ठंड न पड़ने के कारण कन्नौज में आलू का उत्पादन कम हुआ था. प्रदेश सरकार ने भी आलू किसानों को अच्छा बीज देकर आलू की क्वालिटी सुधार की तरफ एक कदम आगे बढ़ाया था. किसानों को उम्मीद थी कि इस साल अच्छा मुनाफा होगा. लेकिन नोटबंदी के बाद आलू का बाजार पूरी तरह खत्म हो गया. रही सही कसर कैश की कमी ने पूरी कर दी. आखिर में यह नौबत आ ही गयी कि आलू से मालामाल होने का सपना देखने वाला किसान उसे खुद अपने हाथों से गड्ढे में डालने को मजबूर हो गया है.

स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...
Next Story
Share it