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हिन्दू महासभा का खुलासा, धन के बल पर संगठनों से करवा रही हैं समर्थन माया

 Special Coverage News |  10 Feb 2017 3:21 PM GMT  |  New Delhi

हिन्दू महासभा का खुलासा, धन के बल पर संगठनों से करवा रही हैं समर्थन माया

लखनऊ: अखिल भारत हिन्दू महासभा ने आज यहां बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधते हुये कहा है कि जातिगत आधार पर हिन्दू समाज को विभाजित कर मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति करने वाले को समर्थन करने का सवाल ही नहीं उठता है।


इसके साथ ही पार्टी ने मायावती पर जातिगत आधारित संगठनों के पदाधिकारियों को धन देकर अपने पक्ष में बयान दिलवाने का आरोप लगाया है। वहीं हिन्दू महासभा के नाम से बसपा का समर्थन को चुनावी भ्रष्टाचार करार देते हुये तथाकथित संत चक्रपाणि के खिलाफ चुनाव आयोग से काररवाई करने की मांग की है। आज यहां हिन्दू महासभा की उत्तर भारत की विभागीय मंत्री रीता रॉय ने जारी अपने बयान में कहा कि हिन्दू महासभा भले ही चुनाव मैदान से बाहर है, लेकिन उसने किसी भी राजनैतिक दल को समर्थन नहीं दिया है, और अगर बात बहुजन समाज पार्टी की हो तो उसके साथ कतई खड़ा नहीं हुआ जा सकता क्योंकि बसपा हिन्दू समाज को तोड़ने वाली पार्टी है और वह दलित-मुस्लिम का साथ नारा देकर मैदान में खड़ी हुयी है।


कल ग्रेटर नोएडा में बहुजन समाज पार्टी को हिन्दू महासभा के समर्थन दिये जाने को सिरे से खारिज करते हुये कहा सुश्री रॉय ने कहा कि स्वामी चक्रपाणि को हिन्दू महासभा के प्रारम्भिक सदस्य भी नहीं है, और इस पर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट भी अपनी मुहर लगा चुका है। ऐसे में पार्टी के नाम का दुरूपयोग कर बहुजन समाज पार्टी के समर्थन की घोषणा करना पार्टी की छवि को बदनाम करना है। इस तथाकथित समर्थन पर बसपा के महासचिव सतीश मिश्र पर भी सवालिया निशान उठाते हुये कहाकि चक्रपाणि जैसे व्यक्ति से बसपा के पक्ष में समर्थन करवाने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह से समझ बूझ लेना चाहिए, जो न्यायालय के आदेशों को दरकिनार करता हो उसे न्याय के क्षेत्र जुड़े रहने वाले बसपा नेता सतीश मिश्र कैसे सहयोग और समर्थन ले सकते है।


सुश्री रॉय ने कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि हिन्दू समाज को तोड़ने वाली बहुजन समाज पार्टी को सत्ता हासिल करने की छटपटाहट किस कदर बढ़ी हुयी है, कि विभिन्न जातिगत और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों को खुलेआम खरीदकर अपने पक्ष में समर्थन करवा रही है, और इसी छटपटाहट में वह यह भूल गयी कि चक्रपाणि जैसे व्यक्ति से हिन्दू महासभा के नाम से समर्थन करवा लिया। जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने केस नम्बर एलपीए नम्बर 522/2011 में 16 मार्च 2016 को दिये निर्णय में हिन्दू महासभा का प्रारम्भिक सदस्य भी मानने से इंकार कर चुका है और इस निर्णय के खिलाफ दायर एसएलपी अपील को सुप्रीम कोर्ट भी 10 मई 2013 को खारिज कर चुका है। हिन्दू महासभा नेत्री सुश्री रॉय ने कहा कि पार्टी के नाम के दुरूपयोग किये जाने के मामले को पार्टी के उच्चस्तर के नेताओं ने गंभीरता से लिया है और जल्द ही स्वामी चक्रपाणि के खिलाफ कानूनी काररवाई की तैयारी कर रही है।

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