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7 मार्च 1984 की भयावह रात: गोलियों की तडतडाहट में कैसे बची मुलायम सिंह की जान, जानें पूरी दास्तान

 Special Coverage News |  2017-02-17T08:54:12+05:30  |  New Delhi

7 मार्च 1984 की भयावह रात: गोलियों की तडतडाहट में कैसे बची मुलायम सिंह की जान, जानें पूरी दास्तान

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को याद दिलाया कि 33 साल पहले कथित रूप से कांग्रेस के इशारे पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव पर जानलेवा हमला हुआ था। उस वक्त कांग्रेस यूपी में सत्ता में थी और मुलायम सिंह चरण सिंह के भारतीय लोक दल के नेता थे। मार्च 8, 1984 को इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के हिंदी अखबार जनसत्ता ने इस खबर को एेसे हुआ था 'मुलायम सिंह यादव पर हमला' शीर्षक से छापा था। आइए आपको बताते हैं कि मोदी ने जिस घटना का जिक्र किया था, आखिर वह क्या थी।


जनसत्ता अखबार के मुताबिक उत्तरप्रदेश के लोकतांत्रिक मोर्चा और विधान परिषद् में विपक्ष के नेता मुलायम सिंह यादव पर 7 मार्च 1984 की रात को जानलेवा हमला हुआ था। उनकी कार के आगे बाइक चला रहे छोटेलाल नाम के शख्स की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी और एक अन्य शख्स नेत्रपाल बुरी तरह घायल हो गया था। यह घटना तब हुई जब मुलायम मैनपुरी जिले से इटावा की ओर लौट रहे थे।


इस घटना के बारे में मुलायम सिंह बताया कि वह 2 मार्च से इटावा जिले के दौरे पर थे, जहां उनकी सिलसिलेवार रैलियां होनी थीं।4 मार्च के शाम 5 बजे उन्हें इटावा और मैनपुरी की सीमा पर स्थित झिंगपुर गांव में एक बैठक को संबोधित करना था। इसके बाद उन्हें महिखेड़ा गांव में अपने एक दोस्त से मिलना था। यहां से 9.30 बजे वह मैनपुरी के लिए निकले और 800 मीटर दूर जाते ही उन्होंने अपनी गाड़ी के आगे गोली की आवाज सुनी। यादव के ड्राइवर ने देखा कि गाड़ी के आगे बाइक पर जा रहे लोग गिर गए और इसके तुरंत बाद मुलायम सिंह की गाड़ी में आग लग गई। उनके सुरक्षाबलों ने जवाबी हमला किया और गोलीबारी आधे घंटे तक चली। जब हमलावर शांत हो गए तो पुलिस ने एक सुरक्षा घेरा बनाया और एक जीप में मुलायम सिंह को बैठाकर कुर्रा पुलिस थाने ले गई। एक प्राइमरी स्कूल में बतौर टीचर काम करने वाले छोटेलाल की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि नेत्रपाल को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।


मुलायम सिंह ने जान बचाने वाले उनके सुरक्षाबलों की जमकर तारीफ की थी। इस हादसे के बाद मुलायम सिंह की गाड़ी पर गोलियों के 9 निशान देखे गए थे। यह उसी तरफ थे, जहां गाड़ी में अकसर मुलायम सिंह बैठते थे।उस वक्त पत्रकारों से बातचीत में मुलायम सिंह बेचैन नजर आए थे। उन्होंने किसी का नाम न लेते हुए कहा था कि यह उन्हें मारने की साजिश थी और भगवान की कृपा से वह बच गए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान करहल से पूर्व विधायक नत्थू सिंह यादव भी मौजूद थे। उन्होंने कहा था कि मैनपुरी और इटावा के लोकदल कार्यकर्ता डर के साए में जी रहे थे।



राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री बलराम सिंह यादव के समर्थकों पर हमला कराने का आरोप लगाते हुए लोकदल के इटावा जिले के अध्यक्ष महाराज सिंह यादव ने कथित तौर पर सत्ताधारी कांग्रेस (आई) पर आरोप लगाया था कि वह अपराधियों के सहारे अपनी राजनीति चलाना चाहते हैं।

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