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"गन्ने का सीजन चल पड़ा यानी सड़को पर मौत के दानव निकल पड़े"

 Special Coverage News |  17 Nov 2016 9:47 AM GMT  |  New Delhi

गन्ने का सीजन चल पड़ा यानी सड़को पर मौत के दानव निकल पड़े

मुजफ्फरनगर राजीव प्रताप सैनी: जी हां गन्ना किसानों की आड़ में चीनी मिलो और प्रशाशन से सांठ गाँठ कर कर ट्राले वाले ज्यादा से ज्यादा किराया कमाने के चक्कर में ट्रालो पर 400 से 600 क्विंटल तक गन्ना भरते है। ये ट्राले वाले गन्ना किसान नही बल्कि उन संगठित लोगो समूह है जो प्रशासन पर दबाव बनाकर मानव जीवन को हर वक़्त मोत के मुहाने पर धेकेलते है।



सड़को पर इनकी गुंडागर्दी ,सड़को को ओवर लोड से तोडना , बिजली के खम्बे और पोल तोडना ,किसी के भी घर पर ट्राले को पलट देना ,और कही भी रात के अँधेरे में खड़ा करके रुक जाना ।जिसके परिणामस्वरूप आये दिन अन्य वाहन इनमे घुस जाते है और लोगो के घर के चिराग बुझ जाते है। आम किसान ज्यादा से ज्यादा अपनी ट्रेक्टर ट्राली में 50 -60 क्विंटल गन्ना भरता है जिससे ना तो यातायात को समस्या होती है और ना ही व्यापक जान हानि की आशंका।


इस मामले पर इसलिए भी लिखना पड रहा है कि क्योंकि बीती रात मुज़फ्फर मार्ग पर तावली के निकट गन्ने के इसी दैत्य कार ट्राले से भिड़ने से तीन युवकों की मौत हो गयी ।एक अपने घर का इकलौता चिराग था। हर साल इसी तरह अनेको लोग अपनी जिंदगी से हाथ धोते है। पर अवैधानिक और गैरकानूनी और गैरसम्माजिक काम करके अपनी तिजोरियां भरने वाले लोगो में ना नपुंसक प्रशाशन का डर और ना खुद की शर्म।

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