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बीजेपी को यूपी चुनाव में सबसे बड़ा झटका, जब बिना लडे ही इस सीट पर हुई चुनाव से बाहर

 special coverage news |  2017-02-19T10:21:54+05:30  |  लखनऊ

बीजेपी को यूपी चुनाव में सबसे बड़ा झटका, जब बिना लडे ही इस सीट पर हुई चुनाव से बाहर

पूर्वांचल के चर्चित माफिया मुख्तार अंसारी को जेल की सलाखों से प्रचार के लिए परोल पर बाहर आने में भले पेच फंस गया है लेकिन उनके लिए एक अच्छी खबर भाजपा की तरफ से मिल रही है। मऊ सदर से बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे मुख्तार के खिलाफ भाजपा ने अशोक सिंह को मैदान में उतारा था। भाजपा के प्रदेश मुख्यालय से मऊ जिला मुख्यालय लाकर पार्टी सिंबल जमा करने में देरी के चलते उनका नामांकनपत्र खारिज हो गया है।



अशोक सिंह ने नामांकनपत्र 2 सेट में भरा था। एक भाजपा की तरफ से, दूसरा निर्दलीय उम्मीदवार की हैसियत से दाखिल किया था। भाजपा की ओर से दाखिल पर्चा खारिज होने के बाद अब वह निर्दलीय उम्मीदवार की हैसियत से मैदान में टिके रह सकते हैं लेकिन उन्होंने शनिवार को पर्चा वापस लेने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मिलने वाले चुनाव चिन्ह का जनता के बीच प्रचार-प्रसार करना मुमकिन नहीं होगा इसलिए वह नामांकनपत्र वापस ले लेंगे। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की लापरवाही के चलते यूपी के चुनाव मैदान में खड़े सबसे बड़े बाहुबली को वॉकओवर मिल गया है।मऊ सदर की जिस सीट से माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ भाजपा ने अंतिम समय में अशोक सिंह को उम्मीदवार बनाने के लिए प्रदेश मुख्यालय पर 14 फरवरी को सिंबल दिया, उस सिंबल को उस दिन वह मऊ जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष नहीं जमा कर सके। 15 फरवरी को जब वह भाजपा का सिंबल जमा करने पहुंचे तो उसको अस्वीकार कर दिया गया। इस तरह बसपा उम्मीदवार मुख्तार अंसारी को भाजपा ने चुनाव से पहले ही वॉकओवर दे दिया।


गौरतलब है अशोक सिंह के भाई अजय सिंह की 2009 में हत्या कर दी गयी थी। इस हत्या में मुख्तार अंसारी नामजद है। मुख्तार के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पिछले साल अप्रैल में अशोक सिंह ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। तय समय पर नामांकन भी किया लेकिन पार्टी सिंबल स्वीकार न होने से नामांकन खारिज हो गया। नामांकन खारिज होने के बाद मऊ के उपजिलाधिकारी सुरेद्र नाथ मिश्र ने मिडिया से कहा निर्वाचन आयोग द्वारा सिंबल जमा करने की तय तिथि निकल जाने के कारण सिंबल स्वीकार नहीं किया गया।

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