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मँगरू की मजदूरी छूटी, लड्डन खाए चोट रामलड़ैते पूछ रहे हैं , बन्द किए क्यों नोट?

 शिव कुमार मिश्र |  2017-03-04T17:10:16+05:30  |  New Delhi

मँगरू की मजदूरी छूटी, लड्डन खाए चोट रामलड़ैते पूछ रहे हैं , बन्द किए क्यों नोट?

अनिल द्विवेदी

प्रधानमन्त्री के रोड शो के बाद काशी गलियों में ये आवाज गूंज रही है. इस रोड शो से बीजेपी की हकीकत सामने आएगी, असली फिल्म तो 11 मार्च को ही चलेगी. अब उम्मीद आखिरी चरण से है अब केवल दो दिन की उम्मीद बची है बाकी. इस पर एक सोशल मिडिया पर एक कविता आई है जरुर पढ़ें,



जोगीरा सारारा.रा........

आज बनारस में साहेब के रोड शो के दौरान बनारसियो के भाषा के सौंदर्य को देखिए, समझ में आए तो समझिए, मिर्ची लगे तो झेलिए ....

1 . अड़ही देखलीं गड़ही देखलीं , देखलीं सब रंगरूट
बड़ नसीब साहेब के देखलीं , बेचत आपन सूट
..... जोगीरा सा रा रा रा

जल जमीन जंगल के खातिर , अध्यादेशी रूट
संसद बइठि बात पगुरावे , साहब बेचें सूट
......जोगीरा सा रा रा रा

2) भइंस बिआइल पाड़ी पड़रू ,गाय बिआइल बाछा
भयल विकसवा पैदा पल्टू , खोल पछोटा नाचा
........जोगीरा सा रा रा रा

3) कौन दुल्हनिया डोली जाए, कौन दुल्हनिया कार
कौन दुल्हनिया झोंटा नोचे, नाम केकर सरकार
.... जोगीरा सा रा रा रा

संघ दुल्हनिया डोली जाए , कारपोरेट भरि कार
धरम दुल्हनिया झोंटा नोचे , बउरहिया सरकार
....जोगीरा सा रा रा रा

4) चिन्नी चाउर महंग भइल , महंग भइल पिसान
मनरेगा क कारड ले के , चाटा साँझ बिहान
.....जोगीरा सा रा रा रा

का करबा अमरीका जाके , का करबा जापान
एम डी एम क खिचड़ी खाके , हो जा पहलवान
.....जोगीरा सा रा रा रा

5) इक रुपया में चार चवन्नी , चारो काटें कान
बुलेट ट्रेन में देश चढ़ल बा , परिधानी परधान
....जोगीरा सा रा रा रा

6) कौन देस के लोहा जाई , कौन देस अलमुनिया
आ कौन देस में डंडा बाजी , कौन देस हरमुनिया
..... जोगीरा सा रा रा रा

चीन देस के लोहा जाई , अमरीका अलमुनिया
आ नियामगिरि में डंडा बाजी , संसद में हरमुनिया ....जोगीरा सा रा रा रा

7) केकरे खातिर पान बनल बा , केकरे खातिर बांस
केकरे खातिर पूड़ी पूआ , केकर सत्यानास.
..... जोगीरा सा रा रा रा

नेतवन खातिर पान बनल बा , पब्लिक खातिर बांस
अफ़सर काटें पूड़ी पूआ , सिस्टम सत्यानास
.... जोगीरा सा रा रा रा

9. हार्डवर्क की चढ़ी कड़ाही, दुनिया देखे खेल
अर्थशास्त्र की भजिया हो गइ, जीडीपी का तेल
जोगीरा सा रा रा रा

10. गंगापार से उड़ी टिटिहरी, बैठी अस्सी घाट
हार्ड वर्क ने खड़ी कर दई, हारवर्ड की खाट
जोगीरा सा रा रा रा रा

11. पाकिस्तान से बात न करियो , दुश्मन नम्बर एक
हम कुछ बोलें राष्ट्रविरोधी, तुम चभकाओ केक
जोगीरा सा रा रा रा

12. सोमवार को खिचड़ी राँधें , शुक्रवार को खीर
बच्चे टन टन प्लेट बजावें, गुरु ठोंकें तक़दीर
जोगीरा सा रा रा रा

13 . घर घर घूमें वोट बढ़ावें , बढ़वावें मतदान
व्हाट्सअप पर बालक खोजें , बतरा जी का ज्ञान
जोगीरा सा रा रा रा

14. वोटतन्त्र का चउचक उत्सव , भौंचक पल्टूदास
सारी करनी गधे की निकली, गारी सुने विकास
जोगीरा सा रा रा रा

15. हीरागज की फटही धोती, भूख रही भिन्नाय
वोटतन्त्र में चर्चित ख़ाली , मरघट गदहा गाय
जोगीरा सा रा रा रा रा

16. राष्ट्रवाद का नया पजामा , नाड़ा है कमज़ोर
दुनों हाथ से धरे सनीचर , मचा रहे हैं शोर
जोगीरा सा रा रा रा

17. मँगरू की मजदूरी छूटी, लड्डन खाए चोट
रामलड़ैते पूछ रहे हैं , बन्द किए क्यों नोट
जोगीरा सा रा रा रा

18. चले बकइयाँ माटी खाए, पढ़े गदहिया गोल
दिल्ली वाली ट्रेन पकड़तss , भूले आपन बोल
जोगीरा सा रा रा रा

19. भाषण रोटी भाषण कपड़ा , भाषण गेहूं-धान
अस विकास की भई दुर्दशा, खोज रहा शमशान
जोगीरा सा रा रा रा

20.कबो बोलावें गंगा मइया, कबो खुदै आ जायं
साठ बरिस में गोद जाय के, बाप-बाप चिल्लायं
जोगीरा सा रा रा रा

21. बेल हुई थी जेल हो गयी, चिन्नम्मा की पीर
खट्टा होते-होते आख़िर, शाही भया पनीर
जोगीरा सा रा रा रा

22. ताक-झांक की जिसकी हिस्ट्री , स्नूपिंग में ले स्वाद
रोज़गार का चान्स सुनहरी , एंटी रोमियो स्क्वाड
जोगीरा सा रा रा रा

23. उत्तर पट्टी बिल्ली पाले , दक्खिन पाले मूस
देशभक्ति के ठेके वाले, पाल रहे जासूस
जोगीरा सा रा रा रा

24. नेकर से पतलून भई पर नंगेपन से आस
ज़ोर लगा जब कुछ नहीं बदला बदल रहे इतिहास
जोगीरा सा रा रा रा

25. दूध बिगड़ कर दही हो गया, सुधरा अगर तो खीर
दशा तुम्हारी ऐसी होगी , सॉरी यार पनीर !
जोगीरा सा रा रा रा
#चिनम्मा

26. ए से इसकी अभिनय-क्षमता, बी से बुक्का फार
सी से चीखे जोर-जोर , एक्रोनिम की सरकार
जोगीरा सा रा रा रा

27. डिजिटल, डिजिटल करते-करते, ऐसा किया कमाल
मनरेगा का कारड लेके, लड्डन खोजें ताल
जोगीरा सा रा रा रा

28. क्योटो-काशी काशी-क्योटो दिखा रहे थे ख़्वाब
नींद खुली तो लिए फावड़ा खोद रहे तालाब
जोगीरा सा रा रा रा

पिछले साल का जोगीरा आचार्य रामपलट दास जी की रचनाएँ। जो आज बनारस में सुनने को मिला..... कहा से मिल गया उनको पता नहीं...

सा र सा रा रा रा

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