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कृषि की पूरी व्यवस्था और उसके पैटर्न में बदलाव की जरूरत है - वरुण गाँधी

 Special News Coverage |  26 April 2016 8:25 AM GMT

Varun
नई दिल्ली भाषा
धरती के बढ़ते तापमान और इसके चलते फसलों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव का मुद्दा आज लोकसभा में उठा और भाजपा के लोकसभा सदस्य वरूण गांधी ने आशंका जतायी कि इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आधी जमीन बंजर हो जाएगी।

वरूण गांधी ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए सीएससी रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान में वृद्धि के प्रभाव से देश के दस राज्यों में रबी की 20 हजार करोड़ रूपये मूल्य की फसल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से नष्ट हो गयी है। इसी प्रकार पंजाब और हरियाणा में खरीफ की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।


तापमान के तेवरों के चलते चावल के उत्पादन में आने वाले समय में 70 फीसदी तक की कमी की आशंका जताते हुए वरूण गांधी ने कहा कि कृषि की पूरी व्यवस्था और उसके पैटर्न में बदलाव की जरूरत है।

उन्होंने इसके लिए स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने के लिए वैज्ञानिक उपकरण लगाए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में गन्ने की उंची कीमतों के कारण गन्ने की फसल बड़े पैमाने पर होती है और इसके बाद चीनी मिलों में पानी की भारी खपत की जाती है। यह भी राज्य में जल संकट का एक कारण है।

वरूण गांधी ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए आशंका जतायी कि यदि कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो आधी जमीन बंजर हो जाएगी।

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