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राज्यपाल अपनी मर्जी से नहीं बुला सकते है सत्र- सुप्रीम कोर्ट

 Special News Coverage |  9 Feb 2016 3:07 AM GMT


supreme court of india
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा, राज्यपाल अपनी मर्जी से विधानसभा का सत्र नहीं बुला सकते। अरूणाचल प्रदेश में वैसा मौका नहीं आया था जिसके बारे में हम शुरूआत से ही कह रहे हैं। वहां वैसे हालात नहीं थे। अदालत ने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को हटाए जाने के बाद सदन की कार्यवाही का प्रभार उपाध्यक्ष के हाथ में होने के दौरान अगर विधानसभा में तुकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया जाता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।



“सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल जेपी राजखोवा राज्य विधानसभा का सत्र अपनी मर्जी से नहीं बुला सकते। राज्यपाल ने अरूणाचल प्रदेश में नबाम तुकी की कांग्रेस सरकार के बहुमत का पता लगाने के लिए विधानसभा का सत्र एक महीने पहले बुलाने का फैसला किया था। अरूणाचल प्रदेश में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगा है।”


अदालत ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलों को सुनने के दौरान की। वह कांग्रेस के कुछ बागी विधायकों की तरफ से पेश हुए थे। उन्होंने अपने रुख को दोहराया कि राज्यपाल के मुख्यमंत्री और उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना अपनी मर्जी से विधानसभा का सत्र बुलाने पर रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल के पास विशेषाधिकार है। अदालत संविधान के तहत राज्यपाल की कुछ शक्तियों पर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत कल भी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

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