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ओवेसी न कभी CM बना न ही PM तो मुस्लिमों की बदहाली को जिम्मेदार क्यों?

 Special News Coverage |  26 March 2016 6:14 AM GMT



लेखक इंजी. वसीम अकरम

असदुद्दीन ओवैसी ना तो कभी CM बना है ना तो PM के पद पर रहा है और ना ही कभी किसी राज्य और केन्द्र सरकार मे कभी मंत्री के पद पर काम किया है। फिर किस मुँह से आप सेकुलर लोग उसे मुसलमानो की बदहाली के लिए ज़िम्मेदार मानते है और दिन-रात पानी पी-पीकर गाली देते है। क्या कभी आप लोगो ने ये सवाल अपने फर्जीसेकुलर आकाओ से किया?

क्या कभी आप लोगो का ज़मीर गवारा किया कि देश मे सेकुलरिज्म का सर्टिफ़िकेट बाँटने वाली पार्टी कांग्रेस से जवाब माँगा जाए? सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा की सिफ़ारिशों को लागू करने से क्या ओवैसी ने रोका था? पिछले 11 साल और 4 महीनों से एक मामूली सांसद होते हुए मुसलमानो के हक़ के लिए संसद मे जितना लड़ा क्या आप लोगो के कोई और सेकुलर सुरमाओ ने उनका साथ दिया? बेबुनियाद फर्जी इल्ज़ामों की लिस्ट लेकर हमेशा तैयार रहने वाले आप लोगो ने कभी अपने गिरेबान मे झाँक कर देखा? ख़ुद को शोसल मिडिया पर बुद्धिजीवी समझने वाले आप लोगों को उनके उपर ब्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कभी शर्म क्यों नही आई?



किस बुनियाद पर आप लोग उसे चोर, लुटेरा, दलाल, दंगाई, बेईमान और मुसलमानो का सौदा करने वाला ब्यापारी बोलते हो? है कोई पुख़्ता दलील और सबूत तो पेश करिये कल से मै भी आप लोगो के साथ उसे गाली देना शुरु कर दूँगा। एक तरफ़ उसके चाहने वालों को आप लोग बद्तमीज अनपढ़ तथा जाहिल कहते हो दूसरी तरफ़ ख़ुद ही आप लोग जाहिलियत की ओछी हरकतों पर उतर कर रोज़ाना अनाप सनाप बोलते रहते हो। क्या फ़र्क़ है फिर जाहिलो और आप जैसे बुद्धिजीवियों मे। अपने दिखावे की क़ाबिलियत अपने पास रखिये आप लोग और जाइये जाकर कांग्रेस सपा बसपा और अन्य तथाकथित सेकुलर पार्टियों से मुसलमानो की बदहाली का हिसाब माँगिये, क्योंकि ये वही लोग है जो पिछले 65 सालों से मुसलमानो का वोट लेते आए है।

ओवैसी ने हमेशा अपने द्वारा किये गए कामों का हिसाब जनता को और चाटूकार मिडिया को दिया है, ये चीज़ आप लोगो को नज़र नही आती तो अपने आँखो का ईलाज कराईये। मनमोहन सिंह सरकार ने कौन सा मंत्री पद दिया था ओवैसी को ज़रा बता दिजीए? क़ौम की भलाई के लिए UPA को समर्थन जरुर किया था ओवैसी ने लेकिन जब ये सरकार सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा की सिफ़ारिशों को लागू करने मे आना-कानी करने लगी तो तुरंत साथ छोड़ दिया और कांग्रेस की दोगली नीयत को जनता के सामने लाने के लिए और क़ौम को संगठित करने के लिए अकेले निकल पड़े। अब इसमे आप लोगो को संघ और बीजेपी की चाल नज़र आती है तो इसका इलाज किसी के पास नही है।


तेलंगाना मे 7 विधायक है और इनका ख़ौफ़ इतना है कि सरकार कोई ग़लत फ़ैसला लेने से पहले हज़ार बार सोचती है। महाराष्ट्रा मे 2 है लेकिन उनका ख़ौफ़ 200 के बराबर है। आपके यहाँ तो 68 चूहे है फिर किसी ने मुज़फ़्फ़र नगर दंगों पर सवाल क्युं नही उठाया? धरना क्युं नही दिया? मंत्री पद क्युं नही छोड़ा? विधायकी और सांसद पद से इस्तीफ़ा क्युं नही दिया? है कोई जवाब तो बता दिजिये? क्या इसके लिए भी ओवैसी ज़िम्मेदार है? ये होता है फर्जी सेकुलरवाद, फर्जी समाजवाद, फर्जी बहुजनवाद और चमचागिरी की ज़ंजीर जो आपके आवाज़ और ज़मीर दोनो को मार देती है। संसद मे उठने वाले शेर की इस दहाड़ को मत रोकिये नही तो पूरे क़ौम की आवाज़ मर जाएगी...सर।

वसीम बरेलवी साहब की दो लाईन है, "उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी

लेखक के अपने निजी विचार इस लेख के लिए स्पेशल कवरेज की कोई जिम्मेदारी नहीं है

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