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सूखा राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछे केंद्र सरकार से तीखे सवाल, कल सुबह तक माँगा हलफ़नामा

 Special News Coverage |  6 April 2016 2:35 PM GMT


Prashant Bhushan
नई दिल्ली
देश के 13 सूखा प्रभावित राज्यों में हालात पर गहरी चिंता जताते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कई तीखे सवाल पूछे। स्वराज अभियान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख़्त लहज़े में टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार कहा है कि इस गंभीर सूखे से आँख नहीं मूँद सकती है सरकार।

अदालत ने क्या क्या पूछा

1-क्या सरकार खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मिलने वाले राशन के अलावा सूखा प्रभावित लोगों के लिए कोई विशेष राशन देने पर विचार कर रही है?


-स्वराज अभियान ने हर परिवार के लिए प्रति माह 2 किलो दाल और 1 लीटर खाद्य तेल की मांग की है।

2-क्या सरकार बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मिड-डे मील स्कीम में पर्याप्त प्रोटीन दे रही है?

- स्वराज अभियान ने सूखाग्रस्त इलाकों में हर बच्चे के लिए प्रतिदिन एक ग्लास दूध या एक अंडे की मांग की है।

3- क्या सरकार मनरेगा के तहत 100 दिन प्रतिवर्ष रोज़गार उपलब्ध करवाने के अपनी कानूनी दायित्व के प्रति गंभीर है?

- स्वराज अभियान ने यह दर्शाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा में बजट की सीमा लगाकर इस कानून के मुख्य उद्देश्य को ही नकार दिया है।

स्वराज अभियान की ओर से प्रशांत भूषण ने सरकारी आंकड़ों के जरिये यह दिखाया कि मनरेगा में पिछले साल का 12,500 करोड़ रूपये का भुगतान अभी बकाया है। केंद्र सरकार ने कहा कि वो अगले तीन दिन में 11,000 करोड़ का भुगतान कर देगी। प्रशांत भूषण ने दिखाया कि सरकार को अपने ही नियमों के मुताबिक़ तुरंत 32,000 करोड़ रूपये देना चाहिए था। सरकार के इस रवैये से इस साल गर्मी के मौसम में सूखाग्रस्त इलाकों में रोज़गार देने के लिए पैसा रहेगा ही नहीं। इस मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वो कल सुबह तक हलफ़नामा दायर करके यह बताये कि मनरेगा के लिए वह कितना पैसा और कब जारी करने वाली है।

योगेंद्र यादव के नेतृत्व में जय किसान आंदोलन की एक टीम ने अक्टूबर में देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा की थी। इसके पश्चात स्वराज अभियान के राज्यों की टीमों ने लोगों के बीच ज़मीन पर काम किया और राज्य सरकारों पर राहत पहुंचाने के लिए दबाव भी बनाये। स्वराज अभियान ने देश के 13 राज्यों में व्याप्त गंभीर सूखे से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। इन 13 में से 3 राज्यों में तो अब तक आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा भी नहीं की गयी है।

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