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विहिप ने कहा मोदी सरकार कानून के द्वारा मंदिर बनाए

 Special News Coverage |  12 April 2016 2:53 AM GMT

Praveen-Togadia
अवधेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार
आज विश्वहिन्दू परिषद ने विक्रम संवत् के नव वर्ष को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें मुख्यतः पत्रकारों को बुलाया गया था। उसमें विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने दो मांगें रखीं। एक, श्रीनगर के एनआइटी में भारत विरोधी नारा लगाने वालों को स्थायी रुप से विश्वविद्यालय से निकाल दिया जाए ताकि फिर आगे कोई ऐसा न कर सके। लेकिन उनकी दूसरी मांग रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण से संबंधित था। तोगड़िया का कहना था कि भाजपा ने 1987 के अपने पालमपूर प्रस्ताव में संसद के द्वारा कानून बनाकर मंदिर निर्माण की बात की थी। इस समय केन्द्र में सरकार है और नरेन्द्र भाई मोदी अपने वचन के पक्के माने जाते हैं, इसलिए मुझे यकीन है वो इस वायदे को पूरा करेंगे।


तो विश्व हिन्दू परिषद ने मोदी सरकार एवं भाजपा के लिए परीक्षा की घड़ी ला दी है। भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में अब कानून बनाकर मंदिर निर्माण की बात नहीं होती। उसमें वे कहते हैं कि या तो आपसी बातचीत से या फिर न्यायालय द्वारा इसका समाधान हो सकता है। भाजपा के नेता भी कहते हैं कि भव्य मंदिर निर्माण वो चाहते हैं लेकिन इन्हीं दो रास्ते से। यानी संसद में कानून बनाने की बात वे नहीं करते। एक समय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इसके लिए उनको दोनों सदनों में बहुमत चाहिए। तो क्या करेगी भाजपा और क्या करेगा मोदी सरकार?

मेरी दृष्टि में कुछ नहीं, क्योंकि अयोध्या के विवादास्पद स्थल पर मंदिर का निर्माण भाजपा की प्राथमिकता मंें नहीं है। और कानून बनाने की पहल करने की तो सोच ही नहीं है। तो फिर विहिप क्या करेगी? जब प्रवीण तोगड़िया से पूछा गया कि क्या आंदोलन करेंगे तो उन्होंने कहा कि आंदोलन आप बोल रहे हैं मैंने नहीं कहा है। इसका अर्थ हुआ कि अभी कुछ समय तक विहिप इसी तरह सार्वजनिक स्तर पर कानून बनाकर निर्माण की बात करती रहेगी और सरकार कुछ नहीं करेगी।


उच्चतम न्यायालय में मामला गए करीब 6 वर्ष हो जाएंगे लेकिन अभी तक सुनवाई ही आरंभ नहीं हुई है। यानी उच्चतम न्यायालय के लिए भी यह प्राथमिकता नहीं है। सरकार भी न्यायालय में यह अपील लेकर नहीं जा रही है कि मंदिर मामले की सुनवाई आरंभ की जाए।

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