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दिल्ली चुनाव में इन तीन ट्वीट के बाद एक्जिट पोल भी हैरान, क्या होंगे नतीजे?

 Shiv Kumar Mishra |  9 Feb 2020 7:16 AM GMT  |  दिल्ली

दिल्ली चुनाव में इन तीन ट्वीट के बाद एक्जिट पोल भी हैरान, क्या होंगे नतीजे?
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नवनीत चतुर्वेदी

आप क्रोनोलॉजी समझ लीजिए...

1. चुनाव आयोग की प्रवक्ता शेफाली शरण का ट्वीट आता है कि दिल्ली में कुल वोटिंग शाम 5 बजे तक 44.52% हुआ है।

फिर

2. चुनाव आयोग का आधिकारिक एप्प बताता है कि लास्ट में वोटिंग खत्म होते होते कुल वोटिंग 61.75% की हो गई है,, अर्थात सिर्फ अगले डेढ़ घण्टे में करीब 17% वोट करिश्मे की तरह बढ़ जाते है।

फिर

3. कल शाम को आइटिसेल प्रमुख अमित मालवीय का ट्वीट आता है कि हमारे कार्यकर्ताओ ने अंतिम समय के लास्ट घण्टे में जनता को प्रेरित किया और घर से निकल कर बूथ तक भेजा और वोटिंग % बढ़ी इस तरह से।

इस प्रकार उन्होंने चुनाव आयोग की एप्प वाले डेटा वोटिंग %61.75 को जस्टिफाई किया।

फिर

4. मनोज तिवारी समेत तमाम नेता एग्जिट पोल को नकारते हुए यह दावा करना शुरू कर देते है कि लिख के रख लीजिए बीजेपी 48 सीट लाएगी और सरकार बनेगी।

फिर

5. एग्जिट पोल के आंकड़ों के हिसाब से चुनावी सट्टे बाजार में जम कर अरबो के दांव लग रहे है ,बीजेपी की हार यहां सुनिश्चित है लेकिन यदि किसी करिश्मे से जीत गई तो एक झटके में अरबो रुपए इधर से उधर ...मतलब गुज्जुओ के खून में ही व्यापार है। वो यहां भी विशुद्ध धंधा कर रहे है।

फिर

6. सवाल उठता है अन्य विपक्षी दलों की नाकाबिलियत पर कि वो अपने पोलिंग एजेंट से प्राप्त डेटा को मिला कर अपना दावा पेश क्यों नही करते कि आखिर सच्चाई क्या है ,कुल वोटिंग 61.75% हुई भी है या यह बाद में मैनिपुलेट किया हुआ डेटा है ??

जाहिर है एक असेंबली में औसतन 200 बूथ है और 70 असेंबली के हिसाब से 14000 पोलिंग एजेंट हुए,,इन सब 14000 पोलिंग एजेंट से डेटा ले कर उसको चुनाव आयोग वाले डेटा से मैच करना ....यह सिरदर्द का काम कम से कम कांग्रेसी नही करते है,,इतना मेरे को विश्वास है। लेकिन केजरीवाल टीम नही कर पाई जाने अनजाने जैसे भी।

मोरल ऑफ स्टोरी ...कुछ न कुछ झोल है इस मामले में बढ़ते हुए वोटिंग% से बीजेपी को फायदा होगा, और इसलिए यह खेल रचा गया है।

चुनाव आयोग वैसे ही बीजेपी का सहयोगी दल है अतः ये कुछ भी कर सकते है।

(नोट:-- इस पोस्ट के लेखक एक पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक होने के साथ साथ दोनों गुज्जओं पर शोध कर चुके है अतः इनकी क्रोनोलॉजी समझते हुए मैं यह कह सकता हूं कि एग्जिट पोल के नतीजे गलत साबित होंगे।)


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