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कल रात जेल से निकलकर मैंने आजादी की सांस ली, कश्‍मीरियों की आजादी को लेकर चिंतित हूं : पी चिदंबरम

तिहाड़ जेल से बाहर निकले पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार किया.

कल रात जेल से निकलकर मैंने आजादी की सांस ली, कश्‍मीरियों की आजादी को लेकर चिंतित हूं : पी चिदंबरम
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तिहाड़ जेल से बाहर निकले पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार किया. पी चिदंबरम ने कहा, बिना आरोप के नेताओं को हिरासत में लिया जा रहा है. कश्‍मीर में लोगों की आजादी छीन ली गई. अर्थव्‍यवस्‍था पर सरकार सक्षम नहीं है.

पी. चिदंबरम ने कहा, मैं उन राजनीतिक नेताओं के बारे में विशेष रूप से चिंतित हूं, जिन्हें बिना किसी आरोप के हिरासत में लिया जा रहा है. अगर हमें अपनी स्वतंत्रता को संरक्षित रखना है तो पहले उनकी स्वतंत्रता के लिए हमें एकजुट होकर लड़ना चाहिए.

पी चिदंबरम बोले, कल रात 8 बजे मैंने आजादी और खुली हवा में सांस ली. बाहर निकलते ही मैंने सबसे पहले कश्मीर घाटी के 75 लाख लोगों के बारे में सोचा और उनके लिए प्रार्थना की, जिन्हें 4 अगस्त, 2019 से अपनी बुनियादी स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया है. पी चिदंबरम ने यह भी कहा, अर्थव्‍यवस्‍था पर सुस्‍ती के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्‍पी असामान्य है. उन्होंने अपने मंत्रियों को खुला छोड़ दिया है कि वे लोगों को झांसे पर झांसा देते रहें. सच बात तो यह है कि सरकार अर्थव्यवस्था की 'अक्षम प्रबंधक'बन गई है.

पी. चिदंबरम ने कहा विकास दर का आंकड़ा यदि 5% को छूता है, तो हम बहुत भाग्यशाली होंगे. कृपया डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम की सतर्कता को याद करें इस सरकार में विकास दर 5% जो वास्तव में 5% नहीं है, बल्‍कि 1.5% से भी कम है. विकास दर की सरकार की पद्धति संदिग्‍ध है.

पी चिदंबरम ने कहा, सरकार गलत है क्योंकि यह विचारशून्य है. बर्बादी के कारणों को खोजने में असमर्थ है, क्योंकि यह पीएमओ के नोटबंदी, जीएसटी, टैक्‍स टेररिज्‍म, रेगुलेटरी ओवरकिल, संरक्षणवाद और केंद्रीकृत नियंत्रण जैसी अपनी गलतियों का बचाव करने की जिद में लगी हुई है. उन्‍होंने मोदी सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा, इलाज सबसे शुरुआती उपाय है. यदि इलाज गलत है, तो नुस्खा बेकार होने के साथ घातक भी हो सकता है. वित्तीय वर्ष में 7 माह बीतने पर भी बीजेपी सरकार का मानना ​​है कि अर्थव्यवस्था के सामने जो समस्याएं हैं, वे चक्रीय हैं.

पी चिदंबरम बोले, मैं कल के स्पष्ट और व्यापक आदेश के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभारी हूं. आदेश से धूल की कई परतें साफ हो जाएंगी, जो दुर्भाग्य से आपराधिक कानून के बारे में हमारी समझ और जिस तरह से हमारे न्यायालयों द्वारा आपराधिक कानून को प्रशासित किया गया है, उस पर आधारित हैं. हमें पूरा विश्वास है कि न्यायालय अंतत: न्याय प्रदान करेगा.

पी चिदंबरम ने कहा, अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर लाया जा सकता है, लेकिन यह सरकार ऐसा करने में असमर्थ है. मेरा मानना ​​है कि कांग्रेस और कुछ अन्य दल अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर निकालने और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं लेकिन हमें बेहतर समय का इंतजार करना होगा. यूपीए ने 2004 से 2014 के बीच 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, जबकि एनडीए ने 2016 से लाखों लोगों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल दिया है.

उन्‍होंने कहा, मांग में कमी है क्योंकि लोगों के पास अनिश्चितता और भय के कारण उपभोग करने के लिए न तो पैसे हैं और न ही इच्छा है. जब तक मांग नहीं बढ़ती, उत्पादन या निवेश में वृद्धि नहीं होगी. मनरेगा की मांग बढ़ रही है. एफएमसीजी- टिकाऊ और गैर-टिकाऊ दोनों की बिक्री कम है. थोक भाव ऊपर हैं. सीपीआई बढ़ रही है. प्याज 100 रुपये किलो बिक रहा है. इनका क्या मतलब है.

पी चिदंबरम बोले, एनएसएसओ के अनुसार ग्रामीण खपत कम है. ग्रामीण मजदूरी घट रही है. विशेषकर किसानों के लिए पैदावार की कीमतें कम हैं. दैनिक वेतन भोगियों को महीने में 15 दिनों से अधिक समय तक काम नहीं मिल रहा है. दुनिया के निवेशक, बैंकर, रेटिंग एजेंसियां ​​और कंपनियों के निदेशक मंडल - इकोनॉमिस्ट, वॉल स्ट्रीट जर्नल और टाइम पत्रिका- ये सभी संख्याओं पर पूरा ध्यान देते हैं. प्रत्येक संख्या एक बदहाल अर्थव्यवस्था का संकेत करती है.

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