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प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने क्यों बनाया बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को होम मिनिस्टर ?

 Special Coverage News |  2 Jun 2019 4:39 AM GMT  |  दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने क्यों बनाया बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को होम मिनिस्टर ?

मई 31, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह को देश का गृह मंत्री नियुक्त किया है जो अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय है। सबसे पहला संकेत तो ये दिखता है कि होम मिनिस्टर कायदे से प्रधानमंत्री के बाद दूसरे नंबर का पोस्ट माना जाता है। संयोग की बात है कि देश के पहले होम मिनिस्टर सरदार वल्लभ भाई पटेल के बाद अमित शाह गुजरात से बनने वाले दूसरे होम मिनिस्टर हैं।

पहला सवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह को होम मिनिस्टर क्यों बनाया है? दूसरा सवाल, क्या अमित शाह उन चार मुद्दों को सुलझा पाएंगे जो वर्षों से उलझे हुए हैं? आइए इन्हीं दोनों सवालों का उत्तर जानने का प्रयास करते हैं-

पहला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और होम मिनिस्टर अमित शाह के बीच वर्षों पुराना है और दोनों बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े रहे हैं। कहते हैं कि अमित शाह का परिचय नरेंद्र मोदी से 1982 में हुआ था. और ये सम्बन्ध आगे बढ़ता गया। अमित शाह ने लाल कृष्ण अडवाणी के लिए 1991 में और अटल बिहारी वाजपेयी के लिए 1996 में गांधीनगर लोक सभा चुनाव प्रचार की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली थी जो उनके लिए निर्णायक साबित हुआ। उसके बाद तो शाह आगे बढ़ते गए और 1997 में गुजरात विधान सभा के उप चुनाव में जीत हासिल करते हुए विधान सभा पहुँच गए। फिर दौर आया नरेंद्र मोदी का जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2002 में अमित शाह बन गए गुजरात के गृह मंत्री। 2002 से 2010 तक शाह रहे बल्कि एक समय तो ऐसा आया कि शाह के पास होम मिनिस्ट्री के अलावे 12 अतिरिक्त मंत्रालय थे जिससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अमित शाह नरेंद्र मोदी के कितने करीब थे।

अब समय आ गया था जब अमित शाह को गुजरात से बाहर निकलना था। 2014 लोक सभा चुनाव के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी को 2013 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया और उसके बाद अमित शाह को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बना दिया गया जहाँ भाजपा को 2009 के लोक सभा चुनाव में सिर्फ 10 सीटें मिलीं थीं। वहीं 2014 के लोक सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 71 और उसके सहयोगी अपना दल को 2 सीटें मिलीं। उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम ने अमित शाह के भाग्य का पिटारा खोल दिया साथ ही पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं और नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने।

उसके बाद अमित शाह को जुलाई 2014 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उसके बाद भाजपा ने अमित शाह के नेतृत्व में दर्जनों विधान सभा चुनाव जीते जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश और हारे भी जैसे दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़। और फिर आया 2019 का लोक सभा चुनाव जो अमित शाह के नेतृत्व में लड़ा गया और फिर से ऐतिहासिक परिणाम। भाजपा ने अकेले 303 और एनडीए ने 352 सीटें जीती। नरेंद्र मोदी दूबारा भारत के प्रधानमंत्री बने और इसी भारी जीत ने आज अमित शाह को देश का होम मिनिस्टर बना दिया। कुल मिलाकर अमित शाह चुनावी मैदान और शासकीय मैदान दोनों में खड़े उतरे और यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने अमित शाह को देश का होम मिनिस्टर बनाया है और 'क्यों' के पीछे का उत्तर भी यही है।

दूसरा सवाल है कि होम मिनिस्टर अमित शाह के सामने क्या क्या मुद्दे हैं जिसे उन्हें सुलझाना होगा? पहला, जम्मू कश्मीर का मुद्दा; दूसरा, एनआरसी का मुद्दा; तीसरा, नक्सल उग्रवाद का मुद्दा और चौथा, राम मंदिर का मुद्दा।

जम्मू-कश्मीर का मुद्दा

पहला, देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद है जिसे पाकिस्तान वर्षों से शह देता रहा है और पाकिस्तानी आतंकी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। दूसरा, जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाज, आंदोलनकारी और अलगाववादियों ने पूरे राज्य को तबाह कर दिया है. तीसरा , कश्मीरी पंडितों की कश्मीर में वापसी कैसे हो बहुत ही गंभीर सवाल है. इसके साथ ही शाह अनुच्छेद 35 ए को सुलझाने के लिए भी आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि होम मिनिस्टर अमित शाह एक तालमेल बनाकर जम्मू-कश्मीर में तमाम चुनौतियों से निबटने का प्रयास करेंगे।

एनआरसी का मुद्दा

दूसरा, मोदी सरकार में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण भी एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। पूर्वोत्तर और खासकर असम के इतिहास से इसकी जड़े जुड़ी हुई हैं। भाजपा बांग्लादेश के अनाधिकृत रूप से रह रहे विदेशियों को लेकर लगातार संवेदनशील रही है। असम विधान सभा के पिछले चुनाव में भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया था। ऐसा माना जा रहा है कि अमित शाह इस समस्या का भी समाधान ढूंढने का प्रयास करेंगे।

नक्सल उग्रवाद का मुद्दा

तीसरा, देश के सामने नक्सल उग्रवाद एक सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। आये दिन कहीं न कहीं नक्सली घटना घटती ही रहती है। ऐसा माना जा रहा है किअमित शाह के होम मिनिस्टर बनने से नक्सल समस्या को नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी।

राम मंदिर का मुद्दा

चौथा, राम मंदिर का मुद्दा भी वर्षों से कोर्ट में लटका हुआ है। सभी पक्ष कोर्ट के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। होम मिनिस्टर अमित शाह को राम मंदिर मुद्दे को कोर्ट के माध्यम से जितना जल्दी हो सके उसका प्रयास करना होगा क्योंकि ये मुद्दा एक मुद्दा ही नहीं बल्कि एक आस्था का सवाल भी है।

अंत में, देश की आंतरिक समस्या से जुड़ी और भी कई मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाना बहुत आबश्यक है. इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमित शाह एक सख्त पॉलिटिशियन हैं और सख्ती से लागू कराने वाले चेहरे के रूप में भी उन्हें देखा जाता है. ऐसा माना जा रहा है कि अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद केन्द्र सरकार की नीतियों में एक स्पष्टता देखने को अवश्य मिलेगी। अतः कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ सोच समझ कर ही अमित शाह पर भरोसा जताया है जिससे समस्या का समाधान निकल सके और यदि अमित शाह इन समस्याओं को सुलझाने में सफल हो जाते हैं तो उनका राजनितिक कद तो बढ़ेगा ही साथ ही देश का भी भला होगा और आम जनता में भी शाह की पकड़ मजबूत हो पायेगी. साथ ही आयरन मैन ऑफ़ इंडिया सरदार पटेल से भी उनकी तुलना की जा सकती है।

वैसे अमित शाह ने अपनी वरीयता को स्पष्ट करते हुए ट्वीट किया है, 'आज भारत के गृह मंत्री के रूप में पदभार संभाला। मुझ पर विश्वास प्रकट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करता हूँ। देश की सुरक्षा और देशवासियों का कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, मोदी जी के नेतृत्व मैं इसको पूर्ण करने का हर सम्भव प्रयास करूँगा।'

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